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आओ फिर से दिए जलाएं //

माननीय अटलबिहारी जी की एक रचना की प्रसिद्ध पंक्ति "आओ फिर से दिए जलाएं "से प्रेरित 

टूटे मन के खँडहर तन में 

सूने अंतर के आँगन में 

ज्योतिर्मय अल्पना बनाएं 

आओ फिर से दिए जलाएं 

 

भीगी सीली नमी हटायें

आतंकित डैनो से भय की

पंखों को झाडे फड़कायें

गर्द उडा दें हर संशय की 

दें उड़ान उपहार स्वयं को

पखों में आकाश सजाएं

आओ फिर से.......

 

सपनों की चटकीली दुनिया

के जितने भी कूट लेख है

जब्त करें आँखों से सारे

झूठे जितने भी प्रलेख हैं

श्री यथार्थ के हवन कुंड में

प्रज्ञा की समिधा सुलगाएं

 आओ फिर से .........

 

हरा केसरी हो या नीला 

पुतली के बस हैं सारे भ्रम

सबका केवल एक जिस्म है

दृष्टिकोण से बिखरा हर क्रम

बाँध धार बिखरे वर्णों की

एक अमर जाह्नवी बहायें

आओ फिर से ....... 

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Comment

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Comment by नादिर ख़ान on January 2, 2013 at 11:51pm

हरा केसरी हो या नीला 

पुतली के बस हैं सारे भ्रम

सबका केवल एक जिस्म है

दृष्टिकोण से बिखरा हर क्रम

बाँध धार बिखरे वर्णों की

एक अमर जाह्नवी बहायें

आओ फिर से ....... 

सुंदर भाव , शानदार लय,  उम्दा गीत के लिए सीमा जी बधायी .

Comment by seema agrawal on January 2, 2013 at 9:54pm

विजय जी आपकी तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ 

Comment by vijay nikore on January 2, 2013 at 9:19pm

सपनों की चटकीली दुनिया

के जितने भी कूट लेख है

जब्त करें आँखों से सारे

झूठे जितने भी प्रलेख हैं

श्री यथार्थ के हवन कुंड में

प्रज्ञा की समिधा सुलगाएं

आओ फिर से .........

         आदरणीया सीमा जी,

         वाह, वाह, वाह। शब्द चयन, भाव, सभी के लिए  बधाई।

         विजय निकोर

 

Comment by seema agrawal on January 2, 2013 at 8:45pm

दिल से शुक्रिया राजेश जी और रश्मि जी 

Comment by राजेश 'मृदु' on January 2, 2013 at 4:24pm

बहुत ही सुन्‍दर अभिव्‍यक्ति, एक संकल्‍प जगाती, ऊर्जा घोलने वाली रचना, आपको पढ़ना यूं भी बहुत अच्‍छा लगता है, सादर

Comment by rashmi gupta lallbeeharry on January 2, 2013 at 10:47am

बधाई सीमा जी सुन्दर कल्पना के लिए शब्द चयन बहुत अच्छा है

Comment by seema agrawal on January 2, 2013 at 10:41am

डाक्टर अजय खरे जी, श्याम नारायण जी , अशोक जी, सौरभ जी  प्रिय अरुण ,संदीप,प्राची ,महिमा आप सभी को पुनः नव वर्ष की शुभकामनाएं ...रचना पर स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on January 1, 2013 at 4:37pm

इस सुन्दर गीत के लिए बहुत बहुत बधाई आदरणीया सीमा जी
अनुज की और से नववर्ष की ढेरों शुभकामनाये स्वीकार कीजिये
आशीर्वाद और स्नेह यूँ ही बनाये रखिये


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 1, 2013 at 1:27pm

टूटे मन के खँडहर तन में 

सूने अंतर के आँगन में 

ज्योतिर्मय अल्पना बनाएं ...बहुत खूबसूरत पंक्तिया, हार्दिक बधाई इन पंक्तियों पर.

सपनों की चटकीली दुनिया

के जितने भी कूट लेख है

जब्त करें आँखों से सारे

झूठे जितने भी प्रलेख हैं

श्री यथार्थ के हवन कुंड में

प्रज्ञा की समिधा सुलगाएं......................बहुत सुन्दर भाव प्रस्तुति,

हार्दिक बधाई इस नव गीत पर आदरणीया सीमा जी,

और आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं 

Comment by Shyam Narain Verma on January 1, 2013 at 11:15am

नववर्ष की बधाई  और  मंगलकामनाएं  !

कृपया ध्यान दे...

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