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देखो !

उस चिड़िया के पंख निकाल आए

अब वो अपने पंख फैलाएगी

आसमानों के गीत गाएगी

बातें करेगी-

-गगनचुम्बी उड़ानों की !

तोड़ डालेगी-

-तुम्हारी निर्धारित ऊंचाईयां !

और उसकी अंगडाईयां

कंपा देंगी तुम्हारे अंतरिक्ष को !

 

वो देख आएगी

तुम्हारे सूरज में घुटता अँधेरा !

प्रश्न उठाएगी

तुम्हारे सूर्योदय पर भी !

 

फिर कौन पूजेगा -

-तम्हारे अस्तित्व को ?
कौन मानेगा -

-तुम्हारी प्रधानता ?

 

उसे दिखाओ -
-नुचे हुए पंख

सुनाओ उसे -

-बांज की झूठी कहानियां

-पंछी और जहाज की भ्रामक कथाएँ

उसे पिंजरे का महत्त्व समझाओ ,

असमान से जुड़ने मत दो !

रोको ! उसे उड़ने मत दो !

 

 

......................................... अरुन श्री !

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Comment

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Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 12, 2012 at 10:13pm

उसे दिखाओ -
-नुचे हुए पंख

सुनाओ उसे -

-बांज की झूठी कहानियां

-पंछी और जहाज की भ्रामक कथाएँ

उसे पिंजरे का महत्त्व समझाओ ,

अरुण श्रीवास्तव जी गहन भाव लिए ..सुन्दर कविता ..हाँ उसे ये सब दिखा.. समझा के पिंजरे का महत्व बताना बहुत जरुरी है ...अपनी परिधि ...

भ्रमर ५  ..
Comment by Rekha Joshi on July 12, 2012 at 9:00pm

अरुण जी 

उसे दिखाओ -
-नुचे हुए पंख

सुनाओ उसे -

-बांज की झूठी कहानियां,भावपूर्ण रचना ,हार्दिक बधाई 

 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 12, 2012 at 7:57pm

आदरणीय अरुण भाई जी
बहुत सुन्दर भावों को संजोते हुए बेहतरीन अंदाज में आपने बहुत गंभीर बात कही है
एक दम सटीक क्या बात है बहुत बहुत बधाई आपको 

Comment by Albela Khatri on July 12, 2012 at 2:58pm

गज़ब है अरुण श्रीवास्तव जी.........
वास्तव में उम्दा रचना की आपने.........

उसे दिखाओ -
-नुचे हुए पंख

सुनाओ उसे -

-बांज की झूठी कहानियां

-पंछी और जहाज की भ्रामक कथाएँ

उसे पिंजरे का महत्त्व समझाओ ,

असमान से जुड़ने मत दो !

रोको ! उसे उड़ने मत दो !

___इन पंक्तियों पर क़ुर्बान !

@@@@ थोड़ा सा टंकण की भूलों को  सुधार लें....बेहतर होगा

कृपया ध्यान दे...

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