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वो ख़्वाब उज़ागर क्यूँ  किये हमने 

सौ दर्द  ज़िगर को क्यूँ दिए हमने||

 जब करनी थी बातें कई हज़ार

वो लब  चुपके से क्यूँ सिये हमने||

ख़्वाब  बुनते रहे वो ही गलीचा 

 तलवे ये जख्मी क्यूँ किये हमने ||

 ता उम्र करते रहे  उन से  वफ़ा

ये जफ़ा के घूँट  क्यूँ पिए हमने ||

 दे के जहान  भर की दुआ उनको

मिटा दिए सुख के क्यूँ ठिये हमने  

 अश्क तो पलकों में ज़ब्त हो जाते 

 ये सब  हथेली पे  क्यूँ लिए हमने || 

             ********

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 16, 2012 at 7:05pm

उमा शंकर मिश्र   जी तहे दिल से शुक्रिया हार्दिक आभार 

Comment by UMASHANKER MISHRA on July 11, 2012 at 10:56pm

आदरणीय राजेश कुमारी जी इस दर्द भरी रचना पर हार्दिक बधाई आपने अश्क पलकों से हाँथो पर ला ही दिया

बहुत मार्मिक

हार्दिक बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 11, 2012 at 8:08pm

हार्दिक आभार प्रिय दीप्ति 

Comment by deepti sharma on July 11, 2012 at 7:23pm

वाह वाह बहुत खूब

बधाई आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 11, 2012 at 2:16pm

संदीप द्विवेदी जी रचना पर आपकी मुहर भी लग गई हार्दिक शुक्रिया 

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on July 11, 2012 at 2:08pm

ख़्वाब  बुनते रहे वो ही गलीचा 

तलवे ये जख्मी क्यूँ किये हमने

वाह.. ख़ूबसूरत भावों के सफल सम्प्रेषण पर हार्दिक बधाई आदरणीया...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 11, 2012 at 11:39am

अरुण शर्मा अनंत जी मेरे शब्दों ने आपके दिल को छुआ आपका  हार्दिक आभार

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 11, 2012 at 11:29am

वाह आदरणीया राजेश कुमारी जी क्या बात , लाजवाब रचना मुझे बेहद पसंद आई, बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 11, 2012 at 11:16am

कुमार गौरव जी तहे दिल से शुक्रिया 

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on July 11, 2012 at 11:06am
आदरणीया राजेश जी, बहुत सुन्दर रचना। बधाई।

कृपया ध्यान दे...

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