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मेरी जिंदगी एक खुली किताब है

हर पन्ने पे तेरा नाम है ।

मैं रहूँ न रहूँ ,परवाह नहीं है

जिंदगी मेरी तुम्हारे नाम है ।

 

जब कभी ख्यालों की आँधी उठेगी

तन्हाई में मेरी आवाज़ गूँजेगी

परछाईं बनकर तुम्हारे पास रहूँगी

गेसूओं की छाँव से ढक लूँगी।

 

जीने के पैमाने यूँ तो बहुतेरे हैं

हर रंग पर फीके  हो चले हैं ।

जिन शोख रंगों में तुम्हारी तस्वीरें हैं

दिल के कैनवास  पर  बखूबी उकेरे हैं ।

 

सितारों की महफ़िल जब- जब सजेगी

 तुम्हारी निगाहें मुझको  ढ़ूँढ़ेगी।

चमने इश्क की खुशबू पहचानी सी होगी

चाँद को शिकस्त देती नूर मुझसे होगी ।

 

अपनी यादों का कारवाँ रोक लेना

बाँहों का दायरा ज़रा बढ़ा देना ।

तोड़ दीवार हया की ,आगोश में ले लेना

उस शामे बसहर को मेरे नाम कर देना ।

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Comment

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Comment by Dr. Shashibhushan on March 21, 2012 at 9:13pm

आदरणीय कविता जी,
सादर !
"अपनी यादों का कारवाँ रोक लेना
बाँहों का दायरा ज़रा बढ़ा देना ।
तोड़ दीवार हया की ,आगोश में ले लेना
उस शामे बसहर को मेरे नाम कर देना ।"
खूबसूरत पंक्तियाँ !
दिलकश रचना ! बधाई !

Comment by kavita vikas on March 20, 2012 at 10:30pm
sabhar ,dhanywad......friends.
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 20, 2012 at 1:28pm

मेरी जिंदगी एक खुली किताब है

हर पन्ने पे तेरा नाम है ।

मैं रहूँ न रहूँ ,परवाह नहीं है

जिंदगी मेरी तुम्हारे नाम है 

bahut sundar bhav evam prastuti. badhai.

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 20, 2012 at 1:26pm

सुन्दर भावों की प्रस्तुति| बधाई|

Comment by Harish Bhatt on March 20, 2012 at 10:56am

aadarniya kavita ji Namastey ..bahut hi sundar rachna......... hardik aabhar.

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