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निजत्व की खातिर

निजत्व की खातिर
कर्तव्यो की बलिवेदी से
कब तक भागेगा इन्सान
ऋण कई हैं
कर्म कई हैं
इस मानव -जीवन के
धर्म कई हैं
अचुत्य होकर इन सबसे
क्या कर सकेगा
कोई अनुसन्धान
कई सपने हैं
कई इच्छाये हैं
पूरी होने की आशाये हैं
पर विषयों के उद्दाम वेग से
कब तक बच सकेगा इन्सान
भीड़-भाड़ है
भेड़-चाल है
दाव-पेंच के
झोल -झाल है
इनसे बच कर अकेला
कब तक चलेगा इन्सान
कौन है ईश्वर
जीवन क्या है
मै कौन हूँ
क्यूँ आया हूँ
जिज्ञासायों के कई भंवर हैं
डूब के इनमे
अपनों से कब तक
मुख मोड़ सकेगा इन्सान

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Comment

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Comment by Mukesh Kumar Saxena on April 8, 2012 at 5:47pm
Jis ne nijatv ko jan liya vo jag se juda ho jaate hai.
Jisne khud ko pahichan liya vo log khuda ho jaate hai. Khudi se hi khudai hai . Pl read my spiritual article in dharmic. Gp. Apki rachna vahut achchhi hai. Badhai sweekar kare.
Comment by MAHIMA SHREE on April 8, 2012 at 5:34pm
आदरणीय श्याम बिहारी जी   ,
नमस्कार ,  स्वागत है , कोटिश  धन्यवाद , ..  
Comment by MAHIMA SHREE on April 8, 2012 at 5:33pm
आदरणीय जवाहर सर ,
नमस्कार , धन्यवाद , स्नेह बनाये रखे..  
Comment by Shyam Bihari Shyamal on April 8, 2012 at 7:06am

वाह.. जीवंत रचना... बधाई..

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 7, 2012 at 8:08pm

आदरणीया महिमा श्री जी..

बेहतरीन और शानदार प्रस्तुति...महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना हेतु चयनित होने पर आपको कोटिशः बधाइयाँ

Comment by MAHIMA SHREE on April 6, 2012 at 11:14am
आदरणीय अविनाश जी,
सादर नमस्कार ,
आपको मेरा हार्दिक धन्यवाद , आपने पढ़ा , सराहा, उत्साह वर्धन किया...आभारी हूँ..
Comment by AVINASH S BAGDE on April 6, 2012 at 10:08am

कर्तव्यो की बलिवेदी से
कब तक भागेगा इन्सान
ऋण कई हैं 
कर्म कई हैं
इस मानव -जीवन के
धर्म कई हैं............................बहुत ही उम्दा.
अचुत्य होकर इन सबसे
क्या कर सकेगा
कोई अनुसन्धान....वाह!
कई सपने हैं
कई इच्छाये हैं
पूरी होने की आशाये हैं
पर विषयों के उद्दाम वेग से
कब तक बच सकेगा इन्सान........सटीक आशंका.
भीड़-भाड़ है
भेड़-चाल है
दाव-पेंच के
झोल -झाल है................सत्य-वचन.
इनसे बच कर अकेला
कब तक चलेगा इन्सान
कौन है ईश्वर
जीवन क्या है
मै कौन हूँ
क्यूँ आया हूँ
जिज्ञासायों के कई भंवर हैं..........अनगिनत...असंख्य......अनंत...
डूब के इनमे
अपनों से कब तक
मुख मोड़ सकेगा इन्सान....महिमा श्री जी.....पहले तो आपको बधाई...माह का सर्वश्रेष्ठ होने के लिये साथ ही इतनी विचार-श्रेष्ठ   रचना हेतु साधुवाद .........कुल मिला कर लाजवाब.

Comment by MAHIMA SHREE on April 5, 2012 at 9:30pm

आदरणीय मयंक सर,

नमस्कार , आपका बहुत -२ हार्दिक धन्यवाद

Comment by MAHIMA SHREE on April 5, 2012 at 9:28pm
 आदरणीय सौरभ सर,
सादर प्रणाम , आप सब गुणीजनों का प्रोत्साहन और आशीर्वाद यूँ ही मिलता रहा ..तो भविष्य में भी जरुर अच्छा करने का उत्साह  रहेगा ,  सचमें आज आप सबो के आशीर्वचनो से मेरा ह्रदय आह्लादित हो रहा है...स्नेह बनाये रखे..    
 
Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on April 5, 2012 at 9:07pm

आदरणीया महिमा श्री जी..

बेहतरीन और शानदार प्रस्तुति...महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना हेतु चयनित होने पर आपको कोटिशः बधाइयाँ

कृपया ध्यान दे...

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