For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

निजत्व की खातिर

निजत्व की खातिर
कर्तव्यो की बलिवेदी से
कब तक भागेगा इन्सान
ऋण कई हैं
कर्म कई हैं
इस मानव -जीवन के
धर्म कई हैं
अचुत्य होकर इन सबसे
क्या कर सकेगा
कोई अनुसन्धान
कई सपने हैं
कई इच्छाये हैं
पूरी होने की आशाये हैं
पर विषयों के उद्दाम वेग से
कब तक बच सकेगा इन्सान
भीड़-भाड़ है
भेड़-चाल है
दाव-पेंच के
झोल -झाल है
इनसे बच कर अकेला
कब तक चलेगा इन्सान
कौन है ईश्वर
जीवन क्या है
मै कौन हूँ
क्यूँ आया हूँ
जिज्ञासायों के कई भंवर हैं
डूब के इनमे
अपनों से कब तक
मुख मोड़ सकेगा इन्सान

Views: 1295

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by MAHIMA SHREE on May 3, 2012 at 2:58pm
आदरणीय प्रवीन सागर जी व् गौरव जी ..
आप दोनों का ह्रदय से धन्यवाद
Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on May 3, 2012 at 12:11pm

नमस्कार महिमा जी, बहुत अच्छी रचना, बधाई आपको|

Comment by MAHIMA SHREE on April 19, 2012 at 11:10am
आदरणीया शन्नो दीदी ,
सादर प्रणाम ,आपका ह्रदय से धन्यवाद , स्नेह बनाए रखे
Comment by Shanno Aggarwal on April 18, 2012 at 11:06pm

बहुत सुंदर रचना. महिमा श्री, आपको इस सर्वश्रष्ठ रचना पर बहुत-बहुत बधाई. 

Comment by MAHIMA SHREE on April 18, 2012 at 5:09pm
आदरणीया वंदना जी
नमस्कार,
बहुत-२ धन्यवाद आपका , आभारी हूँ
Comment by MAHIMA SHREE on April 13, 2012 at 2:19pm
आदरणीय अजय जी ,
नमस्कार , स्वागत है आपका , आपको अच्छी लगी , आपने सराहा , आपका हार्दिक धन्यवाद
Comment by AjAy Kumar Bohat on April 13, 2012 at 9:45am
Atee sundar rachana, badhai sweekar karein Mahima ji...
Comment by MAHIMA SHREE on April 10, 2012 at 5:02pm
आदरणीय राजेश दी ,
सादर नमस्कार , आप मार्मिक विछोह से गुजर रही थी इस बात का मुझे बेहद अफ़सोस है और ख़ुशी भी है आप उस दुःख बहार निकल आई और अपने सभी कर्तव्यों का निर्वहन करने लगी है..
आपने कहा ये रचना पढ़ कर दिल खुश हो गया ..इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट और कुछ नहीं हो सकता आपका ह्रदय की गहराइयों से धन्यवाद , आभारी हूँ , स्नेह बनाये रखे..
Comment by MAHIMA SHREE on April 10, 2012 at 4:52pm
आदरणीय मुकेश जी ,
नमस्कार , स्वागत है आपका , आपको अच्छी लगी , आपने सराहा , आपका हार्दिक धन्यवाद , आपके आलेख जरुर पढूंगी..

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 10, 2012 at 9:57am

main khud se hairaan hoon ki itni sundar rachna mere padhe bina kaise chhoot gai aaj fir aapki is post ki data dekhi sab clear ho gaya us vaqt me baahar gai hui thi apni mom ke antim safar me kuch din gamgeen thi .

atah aaj ye rachna padhkar dil khush ho gaya really this creation deserve appreciation.ati sundar,sashaqt abhivyakti.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
29 minutes ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
35 minutes ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
36 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आजकल खूब हो रहा है ये चलन और कभी कभी विवाद भी। आपकी चिरपरिचित शैली में विचारोत्तेजक लघुकथा। बधाई…"
43 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"समसामयिक विषय है ये। रियायत को ठुकराकर अपनी काबलियत से आगे बढ़ना अच्छा है,पर इतना स्वाभिमान कम ही…"
46 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब। हार्दिक स्वागत आदरणीय मनन कुमार सिंह जी। समसामयिक और सदाबहार विषय और मुद्दों पर सकारात्मक और…"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"चाहतें (लघुकथा) : बार-बार मना करने पर भी 'इच्छा' ने अपनी सहेली 'तमन्ना' को…"
1 hour ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दूसरा अंक -पत्र'..... तो बी. ए. की परीक्षा आपने दोबारा क्यों पास की? ' इंटरव्यू बोर्ड के…"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रतीक्षा है विषय मुक्त  सार्थक रचनाओं की।"
2 hours ago
रामबली गुप्ता posted a blog post

कर्मवीर

आधार छंद-मनहरण घनाक्षरी सुख हो या दुख चाहें रहते सहज और, जग की कठिनता से जो न घबराते हैं। स्थिति…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर और समसामयिक नवगीत रचा है आपने। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service