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मन पागल बौराय है, इसे कोउ समझाय,
बीत गया है जो समय, लौट कभी न आय  !   
.
जिसकी जो गति वो लिखा वही बने तक़दीर ,
होनी तो होके रहे, सहज हो या गंभीर  ,
.
दुःख से घबराओ नहीं, सुख का ये आधार,
दुःख से डर के भागना, बदलो ये व्यवहार,


दिलकी दिल में रख छुपा, नहीं किसी को बोल ,
ठेस किसी को न लगे ,सोच समझ मुँह खोल ,
.
जो करो रूह से करो, जैसा मन को भाय,
उसको ही सच जानिये, जो जग देत सुखाय !

नारी की इज्जत करो, दो पूरा सम्मान,
दुर्गा रूप है बालिका, ब्याही मात समान ,
.
जो सोया वो खो दिया, जागे सब कुछ पाय,
जो पर में सुख ढूँढता, जगत लिया अपनाय !


Views: 591

Comment

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Comment by Rash Bihari Ravi on November 3, 2011 at 2:13pm

dhanyavad ambarish ji

Comment by Er. Ambarish Srivastava on November 2, 2011 at 12:16am

//जो करो रूह से करो, जैसा मन को भाय,

उसको ही सच जानिये, जो जग देत सुखाय !//

जो भी कर लो रूह से , जैसा मन को भाय,

उसको ही सच जानिये, जो जग देत सुखाय !
//नारी की इज्जत करो, दो पूरा सम्मान,
दुर्गा रूप है बालिका, ब्याही मात समान ,//
/इज्जत नारी की करो, दो पूरा सम्मान,
दुर्गा रूप है बालिका, ब्याही मात समान

बहुत खूब गुरु जी ! इन दोहों की रचना के लिए हार्दिक बधाई !

Comment by Rash Bihari Ravi on October 27, 2011 at 2:54pm

dhanyavad ashish bhai

Comment by आशीष यादव on October 27, 2011 at 2:46pm
वाह गुरू जी, बड़े नेक विचारोँ वाले दोहे रच दिए आप। बधाई स्वीकार कीजिए।
Comment by Rash Bihari Ravi on October 27, 2011 at 1:10pm

dhanyavad saurabh bhaiya , yograj sir and satish bhai 

Comment by satish mapatpuri on October 26, 2011 at 8:21pm
ये हुई न बात .................. कमाल कर दिए गुरूजी .............. दाद कबूल
करें साथ ही दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं भी

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on October 25, 2011 at 4:54pm

वाह वाह गुरु जी - क्या सुन्दर दोहे कहे हैं !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 24, 2011 at 4:04pm

अच्छी और समझदार कोशिश के लिये मेरी शुभकामनाएँ रविजी.

ये तो दिवाली गिफ़्ट है भाई ! आपका प्रयास बना रहे.

कृपया ध्यान दे...

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