For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

221       1221       1221       122


ख़्वाबों को ज़रा आँख के पानी से निकालो
इन बुलबुलों को अश्क-फ़िशानी से निकालो

ईमान  की  कश्ती  पे  मुहब्बत  की  मसर्रत
इस कश्ती  को तूफ़ां की रवानी से निकालो

इस  रास्ते  पे  वस्ल   की  उम्मीद   नहीं  है
तरकीब   कोई   राह   पुरानी   से  निकालो

ग़ज़लों को रखो नफ़रती शोलों  से बचाकर
अश'आर  सभी लफ़्ज़ गिरानी से  निकालो

इक रोज़ गुज़र जाऊँगा ज्यूँ वक़्त  गुज़रता
भावों में रखो मुझको मआनी  से निकालो

ग़र  याद  उसे  करते  ही आ  जाते हैं आँसू
'ब्रज' इतना  बुरा है तो कहानी  से  निकालो

(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Views: 646

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on September 14, 2022 at 11:16am

मैं पहले ही कह चुका हूँ निर्णय आपका है। 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 14, 2022 at 11:08am

आदरणीय अमीरुद्दीन जी सच कहूँ तो मैं अब भी आपकी बात नहीं समझा..अगर,मगर,गर ये प्रश्नवाचक शब्द हैं.. जैसे हम कहें "अगर ऐसा हुआ" के बाद हमें तो लगाना ही पड़ेगा तभी सम्पूर्ण प्रश्न सामने आएगा।वैसे ही इतना,कितना किसी प्रश्न में प्रयुक्त हों तो उन्हें तो से ही जोड़ना पड़ेगा...

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on September 14, 2022 at 10:21am

//गर और तो समानार्थी नहीं है शायद...गर मतलब यदि और यदि के साथ तो का इस्तेमाल कर सकते हैं//

जनाब बृजेश जी, लगता है मैं अपनी बात को सही तरीके से पहुँचा नहीं सका हूँ, ये बात सही है कि गर और तो शब्द समानार्थी नहीं हैं... मगर हम इन शब्दों का प्रयोग कैसे कर रहे हैं और इनका प्रभाव क्या दर्शा रहा है, ये बहुत अहम है, मैं चेतन प्रकाश जी के उदाहरण स्वरूप दिये वाक्य पर आपके तर्क से भी सहमत हूँ और आदरणीय समर कबीर जी के कोट किये गये तमाम अशआर पर भी मुत्तफ़िक़ हूँ कि अगर के साथ तो का इस्तेमाल ज़बान के ऐतबार से दुरुस्त है...मगर अगर बात एक वाक्य में पूरी हो रही हो तो, जैसे -

'यदि आज भी बुखार रहता है, तो मैं काॅलेज नहीं जाऊँगा' 

इसी तरह आ. समर कबीर जी का कोट किया गया हर एक मिसरा। 

मगर आपके मक़्ते के ऊला के शुरूअ में गर आने से वाक्य पूरा नहीं हो रहा है, और सानी मिसरे का 'इतना बुरा है तो' शब्द समूह भी अगर का इम्पैक्ट दे रहा है, शायद मैं अपनी बात पहुँचा सका हूँ। 

बाक़ी विवेक और निर्णय आपका है। 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 14, 2022 at 9:34am

रचना पटल पे आपका हार्दिक अभिनंदन एवं आभार आदरणीय मेहता जी...

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 14, 2022 at 9:32am

आदरणीय चेतन जी...जैसा कि आपने बताया 

'यदि आज भी बुखार रहता है, मैं काॅलेज नहीं जाऊँगा! ' इसमें तो की कमी साफ महसूस हो रही है।दो वाक्यों को जोड़ने के लिए मध्य में एक पुल तो चाहिए न!?

और आदरणीय समर जी ने कुछ उदाहरण के साथ विस्तृत में बताया है कि गर और तो का इस्तेमाल एक साथ किया जा सकता है...सादर

Comment by जयनित कुमार मेहता on September 14, 2022 at 8:37am

आदरणीय बृजेश जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है। बाक़ी आदरणीय समर कबीर जी ने जो सुझाव दिया है, उसपर गौर फरमाइयेगा।सादर।

Comment by Samar kabeer on September 13, 2022 at 7:24pm

जनाब चेतन प्रकाश जी , 

जनाब अमीरुद्दीन जी, अव्वल तो ये कि 'गर'(अगर) और 'तो' शब्द के अर्थ अलग-अलग हैं और इनका इस्तेमाल 'ब्रज' जी के मक़्ते में बिल्कुल  दुरुस्त है, मैं चंद ऐसे शाइरों के अशआर पेश कर रहा हूँ जो ज़बान पर पूरी दस्तरस रखते हैं  I 

ग़ालिब के शागिर्द मौलाना अल्ताफ़ हुसैन 'हाली' का ये मतला देखें :-

'वाँँ  अगर  जाएँ तो लेकर जाएँ क्या 

मुँह उसे हम जा के ये दिखलाएँ क्या '

    (हाली)

'साए हैं अगर हम तो हो क्यों हम से गुरेज़ाँ 

दीवार  अगर  हैं  तो गिरा  क्यों  नहीं देते '

    (अहमद फ़राज़ )

'हम हक़ीक़त हैं तो तस्लीम न करने का सबब 

हाँ अगर हर्फ़-ए-ग़लत हैं  तो मिटा दो हमको" 

     (अहसान दानिश)

साहिर का मशहूर गीत :-

'तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं 

तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी'

उम्मीद है संतुष्ट हुए होंगें ? 

Comment by Chetan Prakash on September 13, 2022 at 6:08pm

आदाब, भाई बृजेश कुमार ब्रज, आप यूँ समझिये, सानी और ऊला दो रस्सी के टुकड़े हैं, आपको उन्हें एक करना है, कितने जोड़ लगाइएगा, बताइये! भाषा शास्त्र और ध्वन्यात्मक विज्ञान  Linguistics & Phonetics) ताउम्र विश्व विद्यालय स्तर पर पढ़ाया, आप मेरी अन्यथा न ले!  शर्त वाले वाक्य का विन्यास कुछ यूँ होता है, 'यदि आज भी बुखार रहता है, मैं काॅलेज नहीं जाऊँगा! '

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 13, 2022 at 5:41pm

आदरणीय चेतन जी जहाँ तक मेरी जानकारी है गर का अर्थ यदि है...और यदि के साथ तो ठीक ही है...

Comment by Samar kabeer on September 13, 2022 at 4:22pm

भाई चेतन जी, मैंने ऊला में कुछ मशविरा दिया है, उसके बाद मुझे नहीं लगता कि कोई गुंजाइश है ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
Wednesday
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212   22 वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है कितने दुःख दर्द से भरा दिल…"
Mar 3
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Mar 3
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२***पीछे गयी  है  छूट  जो  होली  गुलाल की साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१। *…See More
Mar 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
Feb 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
Feb 28

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
Feb 28
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
Feb 28

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
Feb 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
Feb 28

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service