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जाने क्या लोग कर गए होंगे.......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122-1212-22/112

जाने क्या लोग कर गए होंगे
जी रहे हैं या मर गए होंगे (1)

वो भरी दोपहर गए होंगे
पाँव छालों से भर गए होंगे (2)

लड़कियाँ माँ की तर्ह सीधी हैं
लड़के तो बाप पर गए होंगे (3)

ख़ौफ़ होता है देख कर जिनको
आइना देख डर गए होंगे (4)

टेढ़े-मेढ़े जलेबी जैसे लोग
है ये मुमकिन सुधर गए होंगे (5)

दफ़्न माज़ी को जब किया होगा
याद के गड्ढे भर गए होंगे (6)

हमको जिन पर नहीं भरोसा वो
आप लोगों के मोतबर होंगे (7)

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on October 28, 2021 at 8:44pm

जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ये ग़ज़ल क़ाफ़िया पैमाई के सिवा कुछ नहीं, इसे ख़ारिज करें ।

Comment by सालिक गणवीर on October 28, 2021 at 8:43pm

आदरणीय  Nilesh Shevgaonka  साहिब
आदाब
ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए आपका शुक्रग़ुज़ार हूँ

मतला यूँ पढ़ा जाये जनाब
सर झुका कर जो घर गए होंगे
लोग जीते जी मर गए होंगे

Comment by सालिक गणवीर on October 28, 2021 at 8:43pm

आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर'  साहिब
आदाब
ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए आपका शुक्रग़ुज़ार हूँ

मतला यूँ पढ़ा जाये जनाब
सर झुका कर जो घर गए होंगे
लोग जीते जी मर गए होंगे

Comment by सालिक गणवीर on October 28, 2021 at 6:34pm

आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर'  साहिब
आदाब
ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए आपका शुक्रग़ुज़ार हूँ

मतला यूँ पढ़ा जाये जनाब
सर झुका कर जो घर गए होंगे
लोग जीते जी मर गए होंगे

Comment by Nilesh Shevgaonkar on October 27, 2021 at 7:37am

आ. सालिक जी,
अच्छी ग़ज़ल हुई है. 
मतला काम मांग रहा है .
ग़ज़ल के लिए बधाई 

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on October 26, 2021 at 9:54am

आदरणीय सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें।

मतले पर जनाब चेतन प्रकाश जी से सहमत हूँ, यही बात मतला-ए-सानी पर भी लागू होती है। शेष शुभ शुभ।  सादर।

Comment by सालिक गणवीर on October 24, 2021 at 7:36pm

आदरणीय  Chetan Prakash साहिब
आदाब
ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए आपका शुक्रग़ुज़ार हूँ

Comment by Chetan Prakash on October 24, 2021 at 4:27pm

 आदाब भाई सालिक गणवीर  जी, अच्छी छोटी बह्र की ग़ज़ल हुई है, बधाई  ! मतला देखिएगा, दोमुंहा लगता है! 

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