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1222 1222 1222 1222

अज़ीब इस दिल की बातें हैं अज़ीब इसके तराने हैं

अज़ीब ही दर्द है इसका अज़ीब ही दास्तानें हैं

अज़ीब अंज़ाम है इसका अज़ीब आग़ाज़ करता है

अगर जो टूट भी जाये तो ना आवाज़ करता है

कभी सुरख़ाब करता है कभी बेताब करता है

दिल ए नादाँ............. दिल ए नादाँ...........

दिल ए नादाँ हर इक ख़्वाहिश को ही आदाब करता है

ये करतब कितनी आसानी से यारो दिल ये करता है

कभी ये ज़ख़्म देता है, कभी ये ज़ख़्म भरता है

बताएं क्या किसी को इश्क में दिल क्या कै करता है

भले ही ख़ाक हो जाये , महब्बत फिर भी करता है

कोई पागल नहीं होता किसी के इश्क में गर जो

ये दिल ही यार सीने में, अगर होता ही ना गर जो

मगर दिल भी जरूरी है नये सपने सजाने को

कभी आ'बाद करता है, कभी बर्बाद करता है

अज़ब इसकी कहानी है अज़ब है दास्तां इसकी

हो जिसको भूलना लाज़िम, उसी को याद करता है

हज़ारों ख्वाहिशें पल में जला कर शाद करता है

कभी ये कैद करता है, कभी आज़ाद करता है

कज़ा हर ख़्वाब लिख लिख कर मिटाता रहता है अक्सर

तड़पता है मचलता है, रज़ा नाशाद करता है

ये रूहों की कहानी है उतर कर आसमानों से

करीनों सी नगीनों पर उतर आई ज़मीनों पर

उतर कर ज़िस्म में जैसे कोई इमदाद करता है...........

दिलों का दर्द गाता है कि गाकर नाद करता है

ये मेरा दिल भी ना जाने, कै क्या फरियाद करता है

मौलिक व अप्रकाशित

आज़ी तमाम

Views: 416

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Comment by Aazi Tamaam on June 12, 2021 at 6:54am

हौसला अफ़ज़ाई व मार्गदर्शन के लिये सहृदय शुक्रिया आ धामी सर

सादर प्रणाम

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 12, 2021 at 2:55am

आ. भाई आजी तमाम जी, सादर अभिवादन। नगमें का प्रयास के लिए हार्दिक बधाई । इसे और समय देकर बेहतर करने की जरूरत है । सादर..

कृपया ध्यान दे...

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