For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

1212    1122     1212     112/22

पुराने ख़त मेरे अब भी जो सामने होंगे,
तो पढ़के होंठ यकीनन ही कांपते होंगे।

सफर उदास रहा जिनकी आस में अपना,
किसी के साथ वो चुपचाप चल पड़े होंगे।

तुम्हारे होठों को छूकर करार पाएंगे,
इसी ख्याल से मिसरे बहक रहे होंगे।

बिछड़ के उनसे मैं कितना उदास रहता हूँ,
मैं सोचता हूँ वो अक्सर ये सोचते होंगे।

मैं अपने बच्चों को ख़्वाबों में देखता हूँ यहाँ,
वह सोके उठते ही मुझको पुकारते होंगे।

तुम्हें जो फूल किताबों में देके आया था,
कई बरस से वो तुमने नहीं छुए होंगे।

निकलके भीड़ से मिल पाते एक रोज कहीं,
पर अब भी ख़ौफ है सब लोग देखते होंगे।

मुझे सताती है वो अनछुए बदन की महक,
तुझे भी जल चुके वो ख़त कचोटते होंगे।

मुझे ग़ज़ल का सलीका नहीं मिला यारों,
कुछ एक शेर तो फिर भी सही कहे होंगे।

ज्यों रोते रोते ही सो जाता है कोई बच्चा,
यूँ तुझमें प्यार के अहसास सो गए होंगे।

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 94

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on February 18, 2021 at 9:58pm

बहुत ही खूब ग़ज़ल कही भी मनोज जी...बधाई

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on February 16, 2021 at 7:00pm

जनाब मनोज 'अह्सास' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। 

जनाब 'जान' गोरखपुरी साहिब की इस्लाह पर ग़ौर कीजियेगा, 

सफर उदास रहा जिनकी आस में अपना,

किसी के साथ वो चुपचाप चल पड़े होंगे।  इस शे'र के मिसरों में रब्त नहीं है, इसे यूंँ कह सकते हैं - 

"मुझे न घर पे मेरे पा के ग़मज़दा होकर 

किसी के साथ वो चुपचाप चल पड़े होंगे"   सादर।

Comment by gumnaam pithoragarhi on February 16, 2021 at 4:35pm

वाह बहुत खूब।, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई।

Comment by Manoj kumar Ahsaas on February 15, 2021 at 5:56pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय जान गोरखपुरी साहब

 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on February 15, 2021 at 4:30pm

बहुत ख़ूब, मनोज अहसास जी,ये ग़ज़ल निश्चत रूप से सुखद अहसास दे रही है बहुत बहुत बधाई।

कुछ मिसरों को और स्पष्टता की दरकार है।जैसे

//पुराने ख़त मेरे अब भी जो सामने होंगे,
तो पढ़के होंठ यकीनन ही कांपते होंगे।//  ऐसे कहे तो अधिक स्पष्टता होगी

पुराने खत जो कभी आते सामने होंगे
तो पढ़के होंठ यकीनन ही कांपते होंगे।

पांचवे शेर में वह को वे कर लें।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Chetan Prakash posted a blog post

पाँच बासंती दोहेः

चम्पई गंध बसे मन, स्वर्णिम हुआ प्रभात । कौन बसा  प्राणों, प्रकृति, तन - मन के निर्वात ।। धूप हुई मन…See More
29 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"आदाब। विषयांतर्गत बेहतरीन व उम्दा प्रभावशाली रचना संवादात्मक शैली में। बहुत ख़ूब। हार्दिक बधाई…"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"चैन स्नेचर्ज़ (लघुकथा) : सब अपने सपनों और अपनों के ही पीछे दौड़ रहे थे। कलयुग के घोर अँधकारमय अँधेर…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"आ. भाई अतुल जी, अभिवादन। अच्छी लघुकथा हुई है । हार्दिक बधाई।"
1 hour ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"वाह हर रोज नये मानको के आधार पर अपनी सहूलियतों के अनुसार उत्पादों को गिराया उठाया जा रहा है मीडिया…"
1 hour ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"सकारात्मक भाव लिये रचना के लिये बधाई आदरणीय"
2 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"रिश्तों की प्रगाढ़ता में बुने ताने बाने ने एक खूबसूरत रचना को जन्म दिया है। हार्दिक बधाई आदरणीय…"
2 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"गोष्ठी का आरंभ एक सशक्त रचना से करने के लिये हार्दिक बधाई आदरणीया बबीता जी। नारी को कम आँकने के दिन…"
2 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"वो दो____ मुझे नहीं पता मेरी उम्र क्या है। बरसों से यहीं हूँ।इतना याद है कि मेरे आसपास ये पार्क और…"
2 hours ago
Atul Saxena replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"प्रयास की सराहना के लिए शुक्रिया शहज़ाद भाई  ग्रुप नियमो के विषय में आगे…"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"आदाब। मंच समूह पर हार्दिक स्वागत आदरणीया अर्चना राय साहिबा आपका और विषयांतर्गत आपकी इस बेहतरीन रचना…"
5 hours ago
Archana Rai replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"लघुकथा- सीढ़ी उनके दिन के चैन के साथ, रातों की नींद भी उड़ गई थी.एक वायरल वीडियो ने महज चंद दिनों…"
5 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service