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भूल मन पीड़ा विगत की गा रहा है - लक्ष्मण धामी'मुसाफिर' (गजल)

२१२२/२१२२/२१२२


भूल मन पीड़ा विगत की गा रहा है
शुभ रहे नव  वर्ष  ये  जो आ रहा है।१।
*
आँख जब आँसू झराने को विवश थी
अन्त उस मौसम  का होने जा रहा है।२।
*
जिन्दगी होगी सुहानी आज से फिर
भोर का  सूरज  हमें  समझा रहा है।३।
*
बह न पाए फिर लहू इन्सानियत का
ये वचन मन को  सभी के भा रहा है।४।
*
पेट भर भूखे को रोटी नित मिलेगी
साथ यह उम्मीद  साथी  ला रहा है।५।
*
बाँटना  हर  द्वार  जाकर  है  उसे भी
मन को जो अन्जान सुख हर्षा रहा है।६।
*
वर्ष नूतन फिर से भर भण्डार देना
लूटने वाला  बरस  तो  जा  रहा है।७।

मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 5, 2021 at 1:17pm

आ. भाई सुरेन्द्र नाथ जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार ।

Comment by नाथ सोनांचली on January 5, 2021 at 12:50pm

आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफ़िरजी सादर अभिवादन। बढिया गज़ल कही आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 2, 2021 at 11:22am

आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on January 2, 2021 at 11:00am

जनाब लक्ष्मण भाई मुसाफ़िर जी आदाब, शानदार ग़ज़ल पेश की है आपने दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 1, 2021 at 6:04pm

आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन सहः नववर्ष की हार्दिक शुभ कामनाएँ । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 1, 2021 at 6:02pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए धन्यवाद । इंगित मिसरे के विषय में आपका सुझाव उचित है । सादर आभार..

Comment by सालिक गणवीर on January 1, 2021 at 3:14pm

भाई लक्ष्मण धामी जी

सादर अभिवादन

बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने. बधाइयाँ. कबीर साहब की इस्लाह से मैं भी सहमत हूँ. 'झराने" की बजाय "बहाने" ज़ियादा उचित होगा.

Comment by Samar kabeer on January 1, 2021 at 2:28pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

'आँख जब आँसू झराने को विवश थी'

इस मिसरे में 'झराने' की जगह "बहाने" शब्द पर विचार करें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 1, 2021 at 11:59am

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन एवं नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ । गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन  लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 1, 2021 at 11:57am

आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन एवं नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ । गजल पर उपस्थिति , उत्साहवर्धन एवं त्रुटि की ओर ध्यान दिलाने के लिए आभार ।

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