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आहट .....

दिल
हर आहट को
पहचानता है

आहट
बेशक्ल नहीं होती
होती हैं उसमें
हज़ारों ख़्वाहिशें
जिनके इंतज़ार में
ज़िंदगी
रहती है ज़िंदा
फ़ना होने के बाद भी

सहर होती है साँझ होती है
वक़्त मगर
ठहरा ही रहता है
किसी आहट के इंतज़ार में

नज़रें
अपनी ख़्वाहिशों के अक़्स
देखने को बेताब रहती हैं


तसव्वुर में
ज़िंदा रहती हैं
आहटें

मगर
मिलता है धोख़ा
सायों की मानिंद
ज़ह्न से गुजरती
अफ़सुर्दा यादों की
रेशमी आहट से

शायद
हर आहट को तकना
और तकते -तकते गुज़र जाना ही
ज़िंदगी है फ़साना है

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 571

Comment

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Comment by Sushil Sarna on May 4, 2020 at 10:17pm

आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'  जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by नाथ सोनांचली on May 2, 2020 at 6:43pm

आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। वाह वाह वाह वाह,, नमन है आपको। बहुत बेहतरीन भावो को उमड़ती इस सृजन पर कोटिश बधाई स्वीकार कीजिये।

Comment by Sushil Sarna on May 1, 2020 at 8:28pm

आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on May 1, 2020 at 8:27pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''कुशक्षत्रप'जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on May 1, 2020 at 11:48am

आदरणीय सुशील सरना जी सादर अभिवादन बहुत ही मार्मिक भावनाओं से ओतप्रोत आकर्षक रचना के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल करें

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 30, 2020 at 4:55pm

आ. भाई सुशील जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

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