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तर्क यदि दे सको तो

बैठो हमारे सामने

व्यर्थ  के उन्माद में , अब

पड़ने की इच्छा नहीं

यदि हमारी संस्कृति को

कह वृथा , ललकारोगे

ऐसे अज्ञानी मनुज से 

लड़ने की इच्छा नहीं

सर्व ज्ञानी स्वयं को

औरों को समझें निम्नतर

जिनके हृद कलुषित , है उनको

सुनने की इच्छा नहीं

व्यर्थ के उन्माद में , अब

पड़ने की इच्छा नहीं

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Usha Awasthi on April 23, 2020 at 5:00pm

आप सभी की टिप्पणी द्वारा मुझे बहुत हौसला मिलता है।

बहुत आभार आपका

Comment by नाथ सोनांचली on April 23, 2020 at 1:49pm

आद0 उषा अवस्थी जी सादर अभिवादन। आपकी उम्दा रचना पर कोटिश बधाई निवेदित है। सादर

Comment by Usha Awasthi on April 22, 2020 at 5:25pm

हार्दिक धन्यवाद आपको

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 22, 2020 at 4:18pm

आ. उषा जी, बेहतरीन रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Usha Awasthi on April 19, 2020 at 12:05pm

आपको रचना पसंद आई , मेरा प्रयास सार्थक हुआ।

हार्दिक आभार आपका

Comment by TEJ VEER SINGH on April 19, 2020 at 9:50am

हार्दिक बधाई आदरणीय ऊषा अवस्थी जी। बेहतरीन रचना।

यदि हमारी संस्कृति को

कह वृथा , ललकारोगे

ऐसे अज्ञानी मनुज से 

लड़ने की इच्छा नहीं

Comment by Usha Awasthi on April 17, 2020 at 7:14pm

धन्यवाद अरुणेश कुमार जी

Comment by ARUNESH KUMAR 'Arun' on April 17, 2020 at 6:19am

सुन्दर रचना के लिए बधाई हो।

कृपया ध्यान दे...

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