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अपने  दोहे .......

पत्थर को पूजे मगर, दुत्कारे इन्सान ।
कैसे ऐसे जीव का, भला करे भगवान ।1।

पाषाणों को पूजती, कैसी है सन्तान ।
मात-पिता की साधना, भूल गया नादान ।2।

पूजा सारी व्यर्थ है, दुखी अगर माँ -बाप ।
इससे बढ़कर  सृृष्टि में , नहीं दूसरा  पाप।3।

सच्ची पूजा का नहीं, समझा कोई अर्थ ।
बिना कर्म संंसार में,अर्थ सदा है व्यर्थ ।4।

मन से जो पूजा करे, मिल जाएँ भगवान ।
पत्थर के भगवान में, आ जाते हैं प्रान ।5।

झूठी पूजा से प्रगट , कैसे हों भगवान ।
धन लोलुप तो माँगता, धन का बस वरदान ।6।

चाहे पूजो राम तुम, चाहे पूजो श्याम ।
मन में जब तक छल-कपट, व्यर्थ ईश का नाम ।7।

सुशील सरना / 16-10-21

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 2, 2021 at 4:26pm

सुंदर दोहे हुए आदरणीय सरना जी..हार्दिक बधाई

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 20, 2021 at 11:05pm

आदरणीय सुशील सरना जी ,
सच्ची पूजा का नहीं, समझा कोई अर्थ ।
बिना कर्म संंसार में,अर्थ सदा है व्यर्थ ।4।
सारा सार तो इसमें है , बहुत खूब , हार्दिक बधाई ! सादर।

Comment by Samar kabeer on October 19, 2021 at 6:56pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब , दोहों का प्रयास अच्छा है बधाई स्वीकार करें I 

`पत्थर को पूजे मगर, दुत्कारे इन्सान`---इस मिसरे के दुसरे हिस्से का वाक्य विन्यास ठीक नहीं , देखें I

`पाषाणों को पूजती, कैसी है सन्तान ।
मात-पिता की साधना, भूल गया नादान`--इस दोहे की पहली पंक्ति के दुसरे चरण में `है की जगह "ये" और  दूसरी पंक्ति के दुसरे चरण में  `गया` की जगह "गये" होना चाहिए मेरे ख़याल से विचार कीजिएगा I 

`मन से जो पूजा करे, मिल जाएँ भगवान ।
पत्थर के भगवान में, आ जाते हैं प्रान `--इस दोहे की तुकांतता दुरुस्त नहीं है क्यूंकि सहीह शब्द "प्राण " है , देखिएगा I 

`चाहे पूजो राम तुम, चाहे पूजो श्याम `-- इस पंक्ति के पहले हिस्से में `तुम` की जगह "को" शब्द उचित होगा ,विचार करें I 

    

Comment by Sushil Sarna on October 17, 2021 at 4:35pm
आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब, आदाब - सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर । सादर नमन
Comment by Sushil Sarna on October 17, 2021 at 4:35pm
आदरणीय छोटे लाल सिंह जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार
Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on October 17, 2021 at 12:55pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, बहुत अर्थपूर्ण और संदेशप्रद दोहे हुए हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर। 

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on October 17, 2021 at 11:18am
आदरणीय सुशील सरना जी बहुत ही दमदार दोहे वह भी सन्देशप्रद दिल से बधाई

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