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सारा हिन्दुस्तान

पढ़ी - लिखी जो गृहणियाँ

देखें निज परिवार

घर में बूढ़ी सास हैं

और श्वसुर लाचार

शिशु जिनके हैं पालने

सेवा की दरकार

आया पर छोड़ें नहीं

सहें स्वयं सब भार

गढ़ती हैं व्यक्तित्व वह

जिस विधि कोई कुम्हार

खोट सुधार सहन करें

चाहे विघ्न हजार

सदा करें निष्काम हो

सबके सुख की वृद्धि

प्रेम , हर्ष , ऐश्वर्य की

होती तभी समृद्धि

घर कुटुम्ब के हेतु जो

अपना सुख दे वार

उस गृहणी को नमन है

बार - बार , शत बार

मान करो उस नारि का

आलय की आधार

नीव अगर मजबूत हो 

टूटे क्यों दीवार ?

ऐसी नारी को अगर

मिले नहीं सम्मान

दोषी सर्व समाज संग

सारा हिन्दुस्तान

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by Usha Awasthi on August 26, 2020 at 5:54am

रचना अच्छी लगी ,जान कर खुशी हुई ।

आभार आपका

Comment by आशीष यादव on August 26, 2020 at 12:19am

Very good creation हुआ है। congratulations स्वीकार कीजिए।

Comment by Usha Awasthi on August 24, 2020 at 1:41pm

 आभार , शीला शीला जी

Comment by Sheela Sharma on August 24, 2020 at 9:49am

आदरणीया दीदी, रचन के लिये बधाई।

Comment by Usha Awasthi on August 21, 2020 at 6:29pm

आ0 समर कबीर जी, आदाब ,आपको रचना अच्छी लगी , यह जान कर खुशी हुई। हार्दिक धन्यवाद आपको 

Comment by Samar kabeer on August 21, 2020 at 3:46pm

मयहटरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Usha Awasthi on August 20, 2020 at 9:07am

भाई लक्ष्मण धामी  ' मुसाफिर '  जी ,  प्रणाम ।

हार्दिक धन्यवाद आपको।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 20, 2020 at 4:22am

आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

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