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AMAN SINHA's Blog (150)

चरित्रहीन

चार दिन भी हुए नहीं ब्याह के उसको आए हुए

उसके नाम की चर्चा में हैं मनचले बौहराये हुए

बस्ती में चर्चा है काफी उसके लम्बे बालों की

लोग तारीफे कर रहे हैं उसके गोरे गालों की

पति प्रेम है उसका सच्चा, तन से है वो थोड़ा कच्चा

अगन प्यास की बुझा ना पाए, है अकल से पूरा बच्चा

तन की प्यास बुझाने को वो दिल ही दिल में व्याकुल…

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Added by AMAN SINHA on March 24, 2022 at 10:55am — No Comments

घर वापसी

आज का दिन है बड़ा सुहाना, हवा में खुशियां फैली है

आओ मिलकर ख़ुशी मनाए, घाटी ने बाहें खोली है

सत्तर साल से जिन पैरों को, जंजीरों ने जकड़ा था

घाटी के दामन को अब तक, जिन धाराओं ने पकड़ा था

ख़त्म हुआ अनुच्छेद आज वो, अब तुम खुलकर साँसे लो

कदम बढ़ाओ तुम भी आगे, इस राष्ट्र पुरुष (अखण्ड भारत) के संग हो लो

शायद थोड़ी देर हुई है, ये पहले ही हो जाना…

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Added by AMAN SINHA on March 23, 2022 at 10:04am — 2 Comments

नेता के बोल

(वोट के पहले)

वोट माँगने आए हैं, जोड़ कर दोना हाथ

बोले कभी न छोड़ेंगे, हम जनता का साथ

इस जनता का साथ, कभी जो हमने छोड़ा

उम्मीदों का तार, जैसे हो हम हीं ने तोड़ा

भूखा होगा कोई ना, ना सोएगा खाली पेट

हर कोई शिक्षा पाएगा, विद्यालय में…

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Added by AMAN SINHA on March 22, 2022 at 10:30am — No Comments

यम का ग़म

भैंसे पर बैठे हुए आ धमके यमराज

बोले बच्चा खत्म हुए सकल तुम्हारे काज

अपने सभी परिजन को देख ले अंतिम बार

यमलोक को जाने को तुम अब हो जाओ तैयार

 

वो बोली मैं चलती हूँ बस काम पड़े है चार 

कपडे, बर्तन बाकि है धर दूँ मैं आचार

रसोई अभी तक हुई नहीं, नहीं बना आहार

कैसे अभी मैं चल पडू छोड कर ये…

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Added by AMAN SINHA on March 18, 2022 at 12:29pm — No Comments

याद आ रही है

याद आ रही है

उन गलियों की

जहां खेल कर मैं बड़ा हुआ

उन राहों की जो आज भी

मेरे मन मे बसते है

वो कच्चा मकान

जिसमे मेरा बचपन बिता

वो छोटी दुकान जिसमे ना जाने

कितनी उधारी रह गयी…

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Added by AMAN SINHA on March 17, 2022 at 1:00pm — 2 Comments

कैंसर

क्या?

क्या कहा तुमने ?

अब और जी ना पाओगे

चल पड़े हो लम्बे सफर पर

अब कभी लौट के ना आओगे

मैंने देखा है तुम्हे

 

रात को छुप के तन्हाई…

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Added by AMAN SINHA on March 16, 2022 at 11:30am — 2 Comments

कोरोना का डर

सुबह निंद से जागा तो मैं काँप उठा

सर्दी कड़क की थी पर मेरे तन से भांप उठा

एक जकड़न सी थी पूरे बदन मे मेरे

हाथ ऊपर जो उठाया तो बदन जाग उठा

 

पहले कभी मुझे ऐसा लगा ही नहीं

मर्ज़ हल्का हीं रहा कभी बढ़ा ही नहीं

लगा ये रोग मुझे कैसे क्या बताऊँ मैं

कभी बदनाम उन गलियों मे मैं गया ही नहीं

 

थोड़ी सर्दी थी लगी और ये तन तपता था

ज़रा बदन भी मेरा आज जैसे दुखता था

सर दबाया मैंने खूब मगर फर्क पड़ा हीं नही

एक…

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Added by AMAN SINHA on March 15, 2022 at 12:01pm — No Comments

क्या होगा मेरे मरने के बाद

क्या होगा मेरे मरने के बाद?

मेरी लाश को उठाएंगे

नाक को दबाते हुए

शरिर को छूएँगे मगर

खुदको बचाते हुए

 

बच्चे कुछ दिन रोएँगे, गाएँगे

मेरी यादों मे डूब जाएंगे

बीबी की चूड़ियाँ तोडी जाएगी

सिंदूर मिटाया जाएगा

सफ़ेद सारी पहनाई जाएगी

कुछ लोग जो…

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Added by AMAN SINHA on March 14, 2022 at 12:17pm — 7 Comments

धोखा हो गया

हज़ारों यहाँ इश्क़ में बीमार बैठे है

जीस गली में देखो दो चार बैठे है

किसी काम में अब जी नहीं लगता इनका

लोग कहते है की ये सब बेकार बैठे है

 

उंगलिया हटती नहीं कभी इनकी चैटिंग से

वक्त मिलता नही इनको कभी भी डेटिंग से

हर दिन बदलते है ये प्रोफाइल कपड़ो की तरह

फर्क पड़ता है इन्हे बस टिंडर की सेटिंग से

 

साथ इनके है अभी कल कोई नया आएगा

भूल जाएगा ये भी वो भी इन्हें भूल जाएगा

दिल का टूटना तो बस एक छलावा है

ये किसी…

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Added by AMAN SINHA on March 12, 2022 at 11:44am — No Comments

केसरी

रंग है ये शान का रंग है ये आन का

वीरों के मान का देश के अभिमान का

रंग है बखान का प्राणों के दान का

सीमा पर जो मर मिटे उनके बलिदान का

 

रंग है ललकार का शत्रु पर वार का

शेरों से जा भिड़े जो उनके हुंकार का

रंग है ये आस का मन के विश्वास का

दुष्टों को ताड़ दे उस शुभ के आभास का

 

रंग है प्रताप का रंग है सुभाष का

तिलक का रंग है और रंग है आज़ाद का

रंग है कमान का वीरों के बाण का

आश्रित कभी न हो उस सत्य के प्रमाण…

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Added by AMAN SINHA on March 11, 2022 at 12:47pm — No Comments

एक तरफ़ा मोहब्बत

तु देखे ना देखे मुझे तुझ पर छोडा है

पर मैं ना देखूं तुझे ये मुमकिन ही नहीं

तु चाहे ना चाहे मुझे ये तेरी मर्ज़ी है

पर मैं ना चाहूँ तुझे ये मुमकिन नहीं

 

एक सच ये भी है की तु बस मेरी है 

ये तु ना माने, बात कुछ खास नहीं

कभी फुर्सत में भी ना देखना तू आईना

अक्स मेरा तुझमे ना दिख जाए…

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Added by AMAN SINHA on March 10, 2022 at 12:30pm — No Comments

वर्चुअल बनाम सच्चाई

सैकड़ो शब्द हमने लिखे लैपटॉप, टैबलेट पर

कलम को जब उठाया लिखने का मज़ा आया

स्काइप और डुओ में कई बार सबको देखा

गले लग के दोस्तों से मिलने का मज़ा आया

 

बेतुकी सी कई बाते चैटिंग में हमने बोली

संग बैठ कर गरियाये बकने का मज़ा आया

गाना और सावन में हज़ारो गाने सुन डाले

ताल ढोलक पर जब लगाया गाने का मज़ा…

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Added by AMAN SINHA on March 9, 2022 at 9:53am — 1 Comment

परछाई

जब मैं चलता हूँ तो साथ साथ वो भी चलती है

जहां मैं मुड़ा कहीं मेरे साथ वो भी मुड़ जाती है

रूप रंग में हाव-भाव में बिल्कूल मेरे जैसी है

मैं तो दीखता हूँ हर जगह वो कहीं-कहीं छुप जाती है

सूरज हो या चाँद फलक पर इसको फर्क नही पड़ता

खोली हो या हो कोई हवेली इसको डर नहीं लगता

आगे पीछे ऊपर निचे ये कही भी हो सकती है

टेढ़ी मेढी छोटी मोटी ये कैसी भी हो सकती…

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Added by AMAN SINHA on March 7, 2022 at 11:38am — 1 Comment

आंधी

चिड़ियों के चहक में आज कोलाहल था शोर था

उत्तर के पुरे आसमान में काले बादल का ज़ोर था

पेड़ अभी तक शांत खड़े थे धूल की ना कोई रैली थी

सूरज अब तक ढला नहीं था ना तो अंधियारी फैली थी

हवा थमी फिर सूरज चमका गर्मी थोड़ी और बढ़ी

काले बादलों की एक टोली आसमान में और चढ़ी

एक तरफ थे काले बादल एक तरफ उजियरा था

भी कहीं पर चमकी…

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Added by AMAN SINHA on March 5, 2022 at 12:31pm — 1 Comment

मन का डर

काँप उठता है बदन और धड़कने बढ़ जाती हैं

शब्द अटकते है जुबां पर साँसे भी थम जाती हैं

लाल हो जाती है आंखें भौह भी तन जाती हैं

सैकड़ो ख्याल मन को एक क्षण में घेरे जाती हैं

खून बेअदबी से तन में फिर बेधड़क है भागता

नींद से आँखे भरी पर रात भर है जागता

मन किसी भी काम में फिर कहीं लगता नहीं

अपने हीं विचार पर ज़ोर तब चलता…

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Added by AMAN SINHA on March 4, 2022 at 11:30am — No Comments

उल्कापिंड

आसमान से टूटा तारा उल्का बनकर दौड़ चला

अन्धकार के महाशून्य में पाने अपनी राह चला

घर छूटने का तो दुःख था साथ टूटने का ग़म भी

अंतिम बार जो मुड़के देखा उसके नैन हुए नम भी

उसके वेग से महाशून्य में ज़ोर की गर्जन फ़ैल गयी

मिलों तक फिर ऊर्जा फैली अंधियारे को लील गयी

अभी जन्म हुआ था उसका चाल में अभी लड़कपन था

सालो बीते चलते चलते अब आने वाला यौवन था

सिर भागता था आगे उसका पूँछ दूर तक फैली थी

पीछे फैली कई मील तक तुक्ष पिंड की रैली…

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Added by AMAN SINHA on March 3, 2022 at 11:40am — No Comments

मेरा अभिमान

उसकी एक हंसी से बगिया की सारी क्यारी खिल गयी

आज हमारे उदासी घर को ढेर सी खुशियां मिल गयी

दिए जलाओ ख़ुशी मनाओ फूलों का झूला तैयार करो

लक्ष्मी चल कर घर है आई मिलकर उसका सत्कार करो

जिसके कर्म बड़े अच्छे हो बड़े पुण्य के काम किए

कर्म फल उनको है मिलता कन्या का अवतार लिए

जिसके घर में बेटी जन्मी , वो घर स्वर्ग बन जाता है

माँ बाप का पूरा जीवन तभी सफल हो जाता है

उसके घर में ना होने से जग सुना हो जाता है

चाहे भीड़ बरी हो घर में…

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Added by AMAN SINHA on March 2, 2022 at 11:27am — 3 Comments

विदाई

कुछ दिन पहले तक ही तो,वो घुटनो के बल चलती थी

अपनी तुतलाती भाषा में, पापा-पापा कहती थी

पहली बार जो अपने मुँह से, पहला शब्द वो बोली थी

मुझे याद अब भी वो तो, पापा ही तो बोली थी

कल ही की तो बात है उसने, गुड़िया मुझसे माँगा था

मेरे काम के थैले को कल ही, खूंटी पर उसने टांगा था

कल तक जो मेरे घुटनो के, ऊपर तक ना बढ़ पाई थी

अपने पैरों पर चल कर वो,…

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Added by AMAN SINHA on February 28, 2022 at 10:44am — No Comments

कम्बख्त ये वक्त

कम्बख्त ये वक्त , बड़ा बेरहम है

खुद ही दवा है अपनी, खुद में ये जखम है

हाथ होता है मगर ये, साथ होता है नहीं

हक़ में लगता है मगर ये, हक़ में होता है नहीं

क्या बला की शै है ये, खुद को ही दोहराता है

बन कभी तस्वीर खुद की, गुमशुदा हो जाता है

शख्श है आवारा जाने, क्यूँ कहीं रुकता नहीं

कोई भी हो सामने पर, ये कभी झुकता नहीं

साथ जिसके ये हुआ, अर्श पर छा जाएगा

सर पे जिसके आ गिरा, वो ख़ाक में मिल जाएगा

कोई कितना भी बड़ा हो,…

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Added by AMAN SINHA on February 26, 2022 at 1:58pm — No Comments

जीवन साथी

जीवन साथी है वो मेरी, साथ हमेशा रहती है

सुख हो या हो दुःख के दिन, पास सदा वो रहती है

साथ फेरों का बंधन बांधे, घर मेरे जब आई थी

खुद से पैसे बच ना पाते, बस इतनी मेरी कमाई थी

घर आई वो साथ में अपने, ढेरों खुशियां ले आयी

मेरे मन के अंधियारे को, दूर किसी को दे आयी

टुटा फूटा डेरा मेरा, सबकुछ उसने अपनाया

दो दिन में ही उस डेरे को ,महलों जैसा मैंने पाया

बिखरा बिखरा जीवन मेरा, जैसे तैसे चलता था

कभी यहाँ पर कभी वहाँ पर, युहीं…

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Added by AMAN SINHA on February 25, 2022 at 11:30am — No Comments

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