For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Amita tiwari's Blog (82)

पिता -प्रणाम

पिता 

परिवार -नैया पिता  पतवार  

तूफान-आंधी में  खेते जाते 

बोते जाते  श्रम -कण फसलें 

साधिकार पल जाती  नस्लें 

पिता के काँधे …

Continue

Added by amita tiwari on June 19, 2016 at 7:18pm — 3 Comments

हमारे पास भी

हमारे पास  भी 
 
कहने को तो बहुत कुछ है हमारे पास भी 
ये बात अलग है कि कहते बनता नहीं 
ऐसा भी नहीं कि कहना नहीं जानते 
शब्द भंडार भी है अपार 
जानते हैं खूब वाक्य विन्यास 
फिर भी ऐसा कुछ है निःसन्देह  
रोक लेता है जुबान को 
लफ्ज़-ए - ब्यान को 
 
ठीक वैसे ही  जैसे 
सतीतत्व- प्रमाणिकता बनाम   
विश्वास भरोसे संवारती जानकी
अग्नि -परीक्षा के लिए…
Continue

Added by amita tiwari on June 15, 2016 at 10:00pm — 5 Comments

हाँ !चुनाव तुम्हारा है

आते है गंदले कीचड़े उथले नारे नदी

मिलते है गंगा में और गंगा हो जाते हैं

पर गंगा बन मिलते है जब सागर में

गंगा के नामो निशाँ मिट जाते हैं .....…

Continue

Added by amita tiwari on June 5, 2016 at 8:00pm — 7 Comments

तीर लगता आज सूना

बादल सा पल फिसल गया  

बिन बरसे ही निकल गया 
जाने गया किस व्यथित तीरे 
चुपके चुपके धीरे  धीरे 
धरा धरी सी अवाक रह गयी 
विरहनी सी निर्वाक  रह गयी 
बदरा जाने क्या कह  गया 
अश्रू ठहरा फिर बह गया  
उर्मिला की  इक आस सी 
अमावस में उजास सी 
गले सा कुछ रुद्ध गया 
दिया जला और बुझ गया 
कागा भी  कगराये तो क्या 
पलक…
Continue

Added by amita tiwari on May 30, 2016 at 10:30pm — 4 Comments

वक्त बड़ा ही शरारती बच्चा

वक्त बड़ा ही शरारती बच्चा…

Continue

Added by amita tiwari on May 10, 2016 at 7:30pm — 3 Comments

ज़िद्दी बालक से अश्रु

अश्रु जब बागी हो जाते हैं 
तो  सुनते ही नहीं 
किसी भी बहाने से 
 बहलाने से …
Continue

Added by amita tiwari on April 29, 2016 at 10:00pm — 9 Comments

आज़ादी का भ्रम छलावा है

आज़ादी का भ्रम छलावा है

कौन यहाँ आज़ाद हो सका…
Continue

Added by amita tiwari on April 25, 2016 at 8:00pm — 3 Comments

अहिल्या के लिए मत सोचना

प्राण तो प्राण हैं दृष्टि के गुलाम हैं
वजह नहीं हैं कदापि ,वजह के अंजाम हैं  
कभी प्रेम पुचकार प्रगाढ़ से
पाषाणी अजन्ता युगवाणी  बना गए
कभी तिरस्कार का तीर भेद  
प्रेयसी अहिल्या को पाषाणी बना गए
अहिल्या के लिए
कभी भी मत सोचना
जैसे ऋषिवर ने नहीं सोचा
परमात्मा ने तो हरगिज़ नहीं  
कि प्रतिलांच्छित पतिव्रता
निरपराध ,निराश्रय अहिल्या
आदतन नारी -धर्म तो…
Continue

Added by amita tiwari on April 12, 2016 at 11:06pm — 4 Comments

उफान नहीं होते

दिखा दे आईना मिला दे खुदी से

अब ऐसे कोई इम्तहान नहीं होते ......

मसीहा के घर न उगे ज्यों मसीहा



बेईमान के हमेशा बेईमान नहीं होते.......

गलियों के ज़िम्मे वो मासूम बचपन

जिनके सर निगेहबान नहीं होते ........

किस्से उनके भी कम नहीं होते

जिनके कभी दर्ज़े बयान नहीं होते ......

महलों में ही चलती हैं…

Continue

Added by amita tiwari on March 26, 2016 at 8:04pm — 9 Comments

निःशब्द

कल सोते सोते

मेरी बांह को अश्रू से भिगोते
मेरे लाल ने जगा दिया
सकते में ला…
Continue

Added by amita tiwari on March 25, 2016 at 8:30pm — 2 Comments

हम भी होली खेलते जो होते अपने देश

हम भी होली खेलते जो होते अपने देश
विधि ने ऐसा वैर निकला भेज दिया परदेश
भेज दिया परदेश लेकिन भेजी न  सोगातें
अपने हिस्से में बस आई भूली बिसरी बातें
 …
Continue

Added by amita tiwari on March 3, 2016 at 11:42pm — 7 Comments

आहत करने से पहले कितना आहत होना पड़ता है

एक आस थी बावरी
बहुत दिन धकिया गयी 
उदास होने ही नहीं दिया  मन
आखिर आज
जब पहुंच ही गए हो
ले के अपने तंज ,दंश
तो आस का क्या
मन का तो बिलकुल ही क्या
मजाल कि बिन झुलसे रह जाए
कोई चूं भी कर जाए
आप तो  बस आप हैं 
सब आप की सौगात है
बहुत बधाई…
Continue

Added by amita tiwari on March 1, 2016 at 1:30am — 2 Comments

तुम्हारा काम इतना भर है

जवाब मेरे पास हैं
और बहुत खास हैं
तुम्हारा काम इतना भर है
कि सवाल भर बनाना है
भुरभुरी रेत पे लिखना है
कोई नाम ही तो मिटाना है
हालत मेरे पास हैं
और बहुत खास हैं
तुम्हारा काम इतना भर है
कि उनको उलझाना है
एक अफवाह फैंकनी है
बस्ती को ही तो  जलवाना है
विश्वास मेरे पास है
और बहुत खास है
तुम्हारा काम इतना भर है
कि बस तोड़ते जाना…
Continue

Added by amita tiwari on February 25, 2016 at 9:04pm — No Comments

गिरने से गुम जात हैं

 गिरने से गुम जात हैं मान अश्रू और ओस
समय धार में वही टिकें जिनके ह्रदय निर्दोष
.
बहते रहिये गंगा सम   जल पीवे संसार
ठहर गए जो जलधि सम हो जाए जल खार
.…
Continue

Added by amita tiwari on February 23, 2016 at 11:30pm — 4 Comments

बस दृष्टा बने रहो

तोड़ कर आरोपित बन्धन 
जब जब
बंधना चाहा जी चाहे बंधन में
पूरी तरह असफलता केवल मिली
न कल न आज
सम्भव ही नहीं स्वंय का स्वंय से मुक्त होना
कभी दलील ने
कभी दहलीज़ ने
कभी सीखी सिखाई
नसों में दौड़ती तहज़ीब ने
रोक लिए कदम
बस केवल हो पाया  इंतज़ार
तारों के जागने का
धूप के भागने का
कि  एक मैं  रहूँ एक मेरा संसार
मेरा आकाश…
Continue

Added by amita tiwari on February 22, 2016 at 10:30pm — 4 Comments

चाणक्य को सज़ा है

नन्द की सभा है

चाणक्य को सज़ा है

बाकी सब ठीक है ......

...

कान्हा जेलों में हैं

कंस मेलों में हैं

बाकी सब ठीक है ........

ताज बहरा है

राज़ गहरा है

बाकी सब ठीक है...........

अखबार झूठी है

तराज़ू देवी रूठी है

बाकी सब ठीक…

Continue

Added by amita tiwari on February 18, 2016 at 10:53pm — 4 Comments

निर्भया का गुनाहगार बाइज़्ज़त बरी

आज फिर भीष्म शर्मसार है

बंद मुठियां भींचती है…

Continue

Added by amita tiwari on February 5, 2016 at 9:30pm — 3 Comments

मुरलिया का मन पहचाना नहीं ......

वंशी बजाते जीता किये जग



मुरलिया का मन पहचाना नहीं ......



कह के गए थे लौटंगे लौटेंगे ...



कहना हमारा तो माना नहीं ......



जिनके पैरों में बादल छिपे हों



उनका तो कोई ठिकाना नहीं .......



जोड़ा कभी दिल ले तोडा कभी



बातों में तेरी अब आना नहीं .........



सौगंध का क्या ले…
Continue

Added by amita tiwari on February 5, 2016 at 9:30pm — 4 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Tuesday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Tuesday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service