For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रामबली गुप्ता's Blog (72)

आखिर क्यों?(अतुकांत)-रामबली गुप्ता

वो समुद्रतट की

चांदनी रातें

सुहानी बातें

रजनी का रजनीकर के

स्नेहिल ज्योत्स्ना में

नहाना

भीगना।

प्रेम-सिक्त

पुलकित

यामिनी के

निःशब्दता में

चुम्बन

आलिंगन

रति-परिणय, आहा!

हृदय में

उमड़ते

लहराते

गहरे प्रेमधि का

विश्वास

और

गंभीर जलधि की

उपेक्षा

पर आज

वो दृश्य नही

प्रेमधि नही

सिर्फ अश्रुधि

वही रजनी

रजनीकर

निःशब्दता

किन्तु

सर्प की भाँति डंसता… Continue

Added by रामबली गुप्ता on August 4, 2016 at 12:37pm — 8 Comments

सवैये : रामबली गुप्ता

वागीश्वरी सवैया



वशीभूत जो सत्य औ स्नेह के हो, जहाँ में उसे ढूंढना क्या कहीं?

न ढूंढो उसे मन्दिरों-मस्जिदों में,शिवाले-शिलाखण्ड में भी नहीं!

जला प्रेम का दीप देखो दिलों में, मिलेगा तुम्हें वो सदा ही यहीं।

जहाँ नेह-निष्काम निष्ठा भरा हो, सखे! ईश का भी ठिकाना वहीं।।



दुर्मिल सवैया



दुख जीवन में अति देख कभी, मन को नर हे! न निराश करो।

रहता न सदा दुख जीवन में, तुम साहस से मन धीर धरो।।

रजनी उपरांत विहान नया, अँधियार घना मत देख डरो।

लघु-दीप जला…

Continue

Added by रामबली गुप्ता on August 1, 2016 at 8:30pm — 10 Comments

गज़ल : मधु-मिलन -रामबली गुप्ता

वह्र-122 122 122 122



निशा मध्य धीरे से घूँघट उठेगा।

खिला रूप विधु का ये मन मोह लेगा।।



प्रतीक्षा हृदय जिसकी करता रहा है।

उसी रात्रि का इंदु हिय में खिलेगा।।



मुदित होंगे मन सुख के सपने सजेंगे।

अमित स्रोत सुख का उमड़ के बहेगा।।



रहा आज तक है जो अव्यक्त हिय में।

वही प्रेम-सागर तरंगें भरेगा।।



नयन बंद होंगे अधर चुप रहेंगे।

मुखर मौन ही हाल हिय का कहेगा।।



खिला पुष्प-यौवन बिखेरेगा सौरभ।

भ्रमर पी अमिय मत्त आहें… Continue

Added by रामबली गुप्ता on July 25, 2016 at 2:00pm — 8 Comments

चैन लुटा जब नैन मिले

मदिरा सवैया

चैन लुटा जब नैन मिले
तन औ मन की सुध भी न रही।

कोमल भाव जगे उर में
शुचि-शीतल-स्नेह-बयार बही।।

मौन रहे मुख नैनन ने
प्रिय से मन की हर बात कही।

चंद्र निहारत रैन कटें
मन की अब पीर न जाय सही।।

रचना-रामबली गुप्ता
मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by रामबली गुप्ता on July 21, 2016 at 4:30pm — 12 Comments

सावन मनभावन

घेरि-घेरि घनघोर घटा अति स्नेह-सुधा बरसाए जन में।

चमक चंचला हाय! विरही मन की तपन बढ़ाये छन में।।



भीग-भीग हिय गीत प्रीत के गाये सुख पाये सावन में।

झूम-झूम तरु राग वागश्री गाएं हरषाएं जीवन में।।



टर्र-टर्र टर्राएं दादुर अति रति भाव जगा निज मन में।

म्याव-म्याव धुन गाये, नाचे मोर मोरनी के सँग वन में।।



कुहुक-कुहुक कर गाये कोयल हृदय चुराए छिप उपवन में।

सुखमय यह सावन मनभावन अति सुख लाये हर जीवन में।।





रचना-रामबली गुप्ता

मौलिक एवं… Continue

Added by रामबली गुप्ता on July 19, 2016 at 9:58pm — 7 Comments

ईश-वन्दना : दोहा छंद

ईश करूं नित वंदना, रहो सदा हिय-धाम।

कलुष-भेद उर-तम मिटा, सफल करो सब काम।।1।।



सदा वास उर में करो, करुणानिधि जगदीश।

करूं जोर कर वंदना, धरो कृपा-कर शीश।।2।।



पार करो भवसिंधु से, बन तरणी-पतवार।

तुम बिन कौन सहाय अब, हे! जग-पालनहार।।3।।



हरि! हर लो हर भेद-तम, द्वेष-दंभ-दुर्भाव।

उर में नित सत-स्नेह के, भर दो निर्मल भाव।।4।।



सूर्य-चंद्र-भू-व्योम-जल, अनल--अनिल तनु-श्यान।

सिंधु-शैल-सरि सृष्टि के, कण-कण में भगवान।।5।।



कृपा-सिंधु… Continue

Added by रामबली गुप्ता on July 15, 2016 at 11:14am — 4 Comments

गज़ल-दिल तेरे बिन कहीं अब बहलता नही।

वह्र-212 212 212 212

दिल तेरे बिन कहीं अब बहलता नही।
दर्द सीने में है दम निकलता नही।।

दर्द दिल का बढ़ा जा रहा है बहुत।
दर्दे दिल पे कोई जोर चलता नही।।

सिसकियों से मेरी दिल पिघलते गए।
दिल तेरा ये भला क्यूँ पिघलता नही।।

टालता हूँ बहुत ख़्वाब तेरे सनम।
टालने से मगर अब ये टलता नही।।

काश! मिल जाए तेरा सहारा मुझे।
बिन सहारे ये दिल अब सँभलता नही।।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by रामबली गुप्ता on July 11, 2016 at 10:30am — 10 Comments

ज्योतिपुंज जगदीश!

*छप्पय छंद*





ज्योतिपुंज जगदीश!

रहो नित ध्यान हमारे।



कलुष-द्वेष-दुर्भाव,

हृदय-तम हर लो सारे।।



सत्य-स्नेह-सद्भाव,

समर्पण का प्रभु! वर दो।



जला ज्ञान का दीप,

प्रभा-शुचि हिय में भर दो।



दो बल पौरुष-सद्बुद्धि हरि!

फहराएं ध्वज-धर्म हम।



हर जनजीवन के त्रास हर,

करें सदा सद्कर्म हम।।





*किरीट सवैया*





संकटमोचन! राम-सखा! तुम,

बुद्धि-दया-बल-सद्गुण-सागर।



दीन-दुखी… Continue

Added by रामबली गुप्ता on July 7, 2016 at 8:23am — 4 Comments

गीत-ऐ! राही आगे बढ़ता जा

ऐ! राही! आगे बढ़ता जा।



पथिक सत्य के पथ का तूँ है

उच्च-शिखर पर चढ़ता जा।

ऐ! राही! पथ पर.......



संघर्षों से तूँ ना डरना।

पथ पर पग पीछे ना धरना।।

बहुत मिलेंगे क्षणिक बवंडर।

रोकेंगे तुझको पग-पग पर।।

तोड़ आँधियों का मद प्यारे!

बाधाओं से लड़ता जा।

ऐ! राही! पथ पर.......



यूँ प्रतिमान रचे ना कोई।

कठिनाई से बचे न कोई।।

करके फिर अवलोकन देखो।

युग-पुरुषों का जीवन देखो।।

पाठ सत्य-संघर्ष-विजय का,

तव-जीवन के पढ़ता… Continue

Added by रामबली गुप्ता on July 4, 2016 at 12:18pm — 9 Comments

मृग-से सुंदर नैन हैं

*महाभुजंगप्रयात सवैया*



करूं अर्चना-वंदना मैं तुम्हारी, महावीर हे ! शूर रुद्रावतारी!

कृपा-दृष्टि डालो दया दान दे दो, बढ़े बुद्धि-विद्या बनूं सद्विचारी।।

हरो दीनता-दुःख-दुर्भाग्य सारे, तुम्हीं नाथ हे! लाल-सिंदूरधारी!

सदा हाथ आशीष का शीश पे हो, यही प्रार्थना हे! महाब्रह्मचारी।।



*कुण्डलिया छंद*



मृग-से सुंदर नैन हैं, ओष्ठ-अरुण-अंगार।

यौवन के हर पोर से, फूटे मधु की धार।

फूटे मधु की धार, तार उर के झंकृत कर।

काले-कुंचित केश, झूमते अहि से कटि…

Continue

Added by रामबली गुप्ता on June 28, 2016 at 1:00pm — 4 Comments

हे! जगदीश! सुनो विनती

'मत्तगयन्द सवैया'



हे! जगदीश! सुनो विनती अब, भक्त तुम्हें दिन-रैन पुकारे।

व्याकुल नैन निहार रहे मग, दर्शन को तव साँझ-सकारे।

कौन भला जग में तुम्हरे बिन, संकट से प्रभु ! मोहि उबारे?

आय करो उजियार प्रभो ! हिय, जीवन के हर लो दुख सारे।।1।।



'दुर्मिल सवैया'



जय हे जगदीश! कृपा करके, कर आय प्रभो! मम शीश धरो।

तुम मूरत बुद्धि-दया-बल के, सदबुद्धि-दया-बल दान करो।

शुचि ज्ञान-प्रकाश बहा प्रभु हे ! मन के तम-पाप-प्रमाद हरो।

हर लो हर दुर्बलता हिय के, उर…

Continue

Added by रामबली गुप्ता on June 13, 2016 at 1:00pm — 6 Comments

वंदना- दुर्मिल सवैया

तव भक्त पुकार रहा कब से,

अब आय प्रभो! कर शीश धरो।

मन में अँधियार घना बढ़ता,

तम-बंधन काट प्रकाश भरो।।

बस एक सहाय प्रभो! तुम ही,

दुविधा-दुख-संकट धाय हरो।

मम डूब रही नइया मग में,

भवसागर से प्रभु! पार करो।।1।।



मधुसूदन! द्वार परा कब से,

निज दर्शन दे उपकार करो।

तुम दीनन के दुख तारन हो,

दुविधा-दुख मोर अपार हरो।

प्रभु! ज्ञानद-प्रेमद-पुंज तुम्हीं,

उर ज्ञान-प्रभा-चिर-प्रेम भरो।

कमलापति हे! कमला सँग ले,

मन-मन्दिर मोहि सदा… Continue

Added by रामबली गुप्ता on May 27, 2016 at 3:00pm — 5 Comments

प्रिय से रँगवावन को चुनरी

प्रिय से रँगवावन को चुनरी,

मन मोद लिए मुसकाय चली।

सब छाड़ि जहाँ के लाज सखे!

भरि थाल गुलाल उड़ाय चली।

पट पीतहि लाल हरा रँग से,

मन प्रेमहि रंग रँगाय चली।

नव यौवन के मद से सबके,

मन में मदिरा छलकाय चली।।1।।



सुंदर पुष्प सजा तन पे,

लट-केश -घटा बिखराय चली है।

अंजित नैन कटार बने,

अधरों पर लाल लुभाय चली है।।

अंगहि चंदन गंध भरे,

मदमत्त गयंद लजाय चली है।

हाय! गयो हिय मोर सखे!

कटि जूँ गगरी छलकाय चली… Continue

Added by रामबली गुप्ता on May 9, 2016 at 5:30pm — 5 Comments

दुर्मिल सवैया

बन प्रेम-प्रसून सुवासित हो,

उर में सबके नित वास करो।



मद-लोभ-अनीति-अधर्म तजो,

धर धर्म-ध्वजा नर-त्रास हरो।।



सत हेतु करो विषपान सदा,

नहि किंचित हे! मनुपुत्र! डरो।



सदभाव-सुकर्म-सुजीवन का,

जग में प्रतिमान नवीन धरो।।1।।



पथ में अति काल-बवंडर से,

नहि किंचित कंत! कदापि डरो।



करके दृढ़-निश्चय साहस से,

हिय धीर धरे नित यत्न करो।।



हर रोक-रुकावट-विघ्न मिटे,

जब सिंह समान हुँकार… Continue

Added by रामबली गुप्ता on May 6, 2016 at 4:30am — 5 Comments

कविता-प्रियतम की याद में

प्रियवर! अब तुम आन मिलो ।

सच में अब तुम आन मिलो ।।



तुम बिन भटकूँ मै बन पगली ।

हुई जिन्दगी जल बिन मछली ।।

रात चाँदनी आये जब-जब ।

मन की अगन बढ़ाये तब-तब ।।

दिन का दूजा नाम उदासी ।

हुई तिहाई तन से दासी ।।

नैना हर पल बाट तके हैं ।

विरह वेदना सह न सके हैं ।।

पर यादों में आते जब तुम ।

मन को बड़ा रिझाते तब तुम ।।

किन्तु चेतना लौटे ज्योंही ।

बिलख हृदय रो बैठे त्योंही ।।

नैन धैर्य खो देते हैं तब ।

अश्रु कपोल धो देते हैं तब… Continue

Added by रामबली गुप्ता on April 21, 2016 at 10:37am — 2 Comments

अतुकांत-तुम तो न जानते थे न महात्मन्!

हे महात्मन्!

हे वयोवृद्ध!

तेरी मृतात्मा सुने!

राम-गौतम की इस भूमि पर

अब वटवृक्ष छोड़,

उसकी टहनियों को

पूजा जायेगा।

तूने जो किये थे,

निः स्वार्थ कृत्य,

कर विस्मृत उन्हें,

बस तेरी कमियों को ही

उकेरा जायेगा।

इस सत्य-भूमि पर,

सत्यता को झुठलाकर

इतिहास को ही

तोड़ा मरोड़ा जायेगा,

तेरी रीतियों-नीतियों की

प्रबुद्ध आवाज को

अब अहिंसात्मक असहिष्णुता

बोला जायेगा।

जिन घटितों का तुझसे

दूर तक रिश्ता… Continue

Added by रामबली गुप्ता on April 13, 2016 at 2:15pm — 2 Comments

गीत-आज प्रिये कुछ कहना चाहूँ।

आज प्रिये! कुछ कहना चाहूँ, हिय में तेरे रहना चाहूँ।

तेरे तन-मन में खोया मैं खोया ही अब रहना चाहूँ।।

आज प्रिये! कुछ.........



निज नृग-से न्यारे नयनों में अंजन-सा मुझे रचा लो तुम।

उलझा लो कुंचित-केशों में या गजरा मुझे बना लो तुम।।

अधरों की लाली बन प्यारी मैं अधर-सुधा पा लेना चाहूँ।

आज प्रिये! कुछ............



कानों का कुंडल बन जाऊँ या उर का हार बना लो तुम।

बन जाऊँ छम-छम पायल मैं या कंगन मुझे बना लो तुम।

नथ की नथिया बन सजनी मैं चूम होठ को लेना… Continue

Added by रामबली गुप्ता on April 8, 2016 at 10:01am — 1 Comment

रचना-शृंगारिक

लच-लचक-लचक लचकाय चली,

कटि-धनु से शर बरसाय चली।

कजरारे चंचल नयनों से,

हिय पर दामिनि तड़पाय चली।।1।।



फर-फहर फहर फहराय चली,

लट-केश-घटा बिखराय चली।

अलि मनबढ़ सुध-बुध खो बैठे,

अधरों से मधु छलकाय चली।।2।।



सुर-सुरभि-सुरभि सुरभाय चली,

चहुँ ओर दिशा महकाय चली।

चम्पा-जूही सब लज्जित हैं,

तन चंदन-गंध बसाय चली।।3।।



लह-लहर-लहर लहराय चली,

तन से आँचल सरकाय चली।

नव-यौवन-धन तन-कंचन से,

रति मन में अति भड़काय… Continue

Added by रामबली गुप्ता on April 5, 2016 at 11:00am — 12 Comments

गीत-हृदय का भ्रमर गुनगुनाता चला है।

हृदय का भ्रमर गुनगुनाता चला है।

नया सुर अधर पर सजाता चला है।

हृदय का भ्रमर.............



उजड़ जो गयी एक बगिया हुआ क्या,

बगीचे नए भी यहीं पर मिलेंगे।

नई नित्य कलियाँ सजाएंगी उपवन,

नए पुष्प अमृत-कलश ले खिलेंगे।

यही सोंचकर गीत गाता चला है।

हृदय का भ्रमर.............



तिमिर रात्रि का कब सदा ही रहेगा?

दिवा के उजाले भी चहुँ ओर होंगे।

नवोदित किरन तम का चीरेगी सीना,

प्रभा से प्रकाशित सकल वस्तु होंगे।

हृदय-तम में दीपक जलाता चला… Continue

Added by रामबली गुप्ता on April 4, 2016 at 10:30am — 14 Comments

गीत- भावना के वाह को अब रोक लो

भावना के वाह को अब रोक लो तुम।

कहो कुछ भी किन्तु पहले सोंच लो तुम।।

भावना के वाह...........



शब्द-शर मुख से निकल ना लौटता है।

सालता तन-बदन हिय को घोंटता है।

कर न दें आहत किसी को शब्द तेरे,

हे! सखे! रुककर जरा यह सोंच लो तुम।

भावना के वाह.............



मान देकर हृदय सबका जीत तो लो।

शब्द-मधु बरसा उरों को सींच तो लो।

मान दोगे मान पावोगे सदा ही,

बोल मीठे बोल दो तो बोल लो तुम।

भावना के वाह...........



है बड़ा कोई यहाँ छोटा… Continue

Added by रामबली गुप्ता on April 2, 2016 at 5:32am — 10 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Monday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Monday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service