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Rekha Joshi's Blog – October 2012 Archive (2)

मेरे हमसफर

ओ मेरे  हमसफर ओ हमदम मेरे 
मेरी आँखों में देख तस्वीर अपनी 
जो बन चुकी है अब तकदीर मेरी 
बह चली मै अब बहती हवाओं में 
उड़ रही हूँ हवाओं में संग तुम्हारे 
इस से पहले कि रुख  हवाओं का 
न बदल जाये कहीं थाम लो मुझे  
कहीं ऐसा न हो शाख से टूटे हुये
पत्ते सी भटकती रहूँ दर बदर मै
जन्म जन्म के साथी बन के मेरे 
ले लो मुझे आगोश में तुम अपने 
ओ…
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Added by Rekha Joshi on October 17, 2012 at 11:57am — 7 Comments

सुनयना [लघु कथा ]

अपने नाम को सार्थक करती हुई कजरारे नयनों वाली सुनयना अपनी प्यारी बहन आरती से बहुत प्यार करती थी |किसी हादसे में आरती के नयनों की ज्योति चली गई थी लेकिन सुनयना ने जिंदगी में उसको कभी भी आँखों की कमी महसूस नही होने दी | हर वक्त वह साये की तरह उसके साथ रहती,उसकी हर जरूरत को वह अपनी समझ कर पूरा करने की कोशिश में लगी रहती |एक दिन सुनयना को बुखार आ गया जो उतरने का नाम ही नही ले रहा था ,उसके खून की जांच करवाने पर पता चला कि उसे कैंसर है ,उसके मम्मी पापा के पैरों तले तो जमीन ही खिसक गई ,लेकिन सुनयना…

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Added by Rekha Joshi on October 5, 2012 at 1:13pm — 10 Comments

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