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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Blog – August 2019 Archive (2)

आईना टूट न जाए मग़र ये ध्यान रहे----------ग़ज़ल

2122 1122 1212 112

तुम हसीं हो ये भले ही तुम्हें गुमान रहे

आईना टूट न जाए मग़र ये ध्यान रहे

पाँव मन्ज़िल की तरफ रख सँभल सँभल के ज़रा

एक दिल भी है तेरी राह में ये ध्यान रहे

तू ज़माने से रहे बे-ख़बर नहीं कहता

किन्तु इस दिल के भजन पर भी तेरा कान रहे

तेरी साँसों के हर-इक गीत में रहूँ शामिल

ताल सुर नाद ये पंकज ही तेरी तान रहे

पूछ मत नींद सुकूँ का हिसाब आशिक़ से

आशिक़ी कैसी अगर ध्यान में ज़ियान…

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Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 29, 2019 at 9:30am — 2 Comments

तुम मेरे ख़ाबों के गुलशन में मिलो------ग़ज़ल

2122 2122 2122 212

तुम मेरे ख़ाबों के गुलशन में रहो हक़ है तुम्हें

मुझ से जब चाहो ख़यालों में मिलो हक़ है तुम्हें

तुम को तकने की ख़ता, नींदें गँवाने की सज़ा

बदला आँखों से मेरी ऐसे ही लो हक़ है तुम्हें

बस तुम्हारा नाम हर पल जप रहा है मेरा दिल

मेरे सीने से लगो तुम भी सुनो हक़ है तुम्हें

कल्पना के व्योम में जितना मेरा विस्तार है

वह क्षितिज पूरा तुम्हारा, तुम उड़ो हक़ है तुम्हें

शब्द सारे भाव हर लय ताल…

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Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 6, 2019 at 10:45am — 8 Comments

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