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सतविन्द्र कुमार राणा's Blog – July 2020 Archive (1)

खुद को पा लेने की घड़ी होगी- गजल

2122 1212 22

खुद को पा लेने की घड़ी होगी,

वो मयस्सर मुझे कभी होगी।

हाथ से हाथ को छू लेने से

दिल की सिलवट भी खुल गयी होगी।

याद लिपटी है उसकी चादर-सी,

देह लाज़िम मेरी तपी होगी।

उसके बिन मैं सँभल चुका हूँ अब,

मस्त उसकी भी कट रही होगी।

बोल ज्यादा मगर सभी मीठे,

आज भी वैसे बोलती होगी?

तब शरारत ढकी थी चुप्पी में,

आज भी उसको ढाँपती होगी।

दिल में कोई चुभन हुई मेरे,…

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Added by सतविन्द्र कुमार राणा on July 24, 2020 at 12:00am — 4 Comments

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