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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog – March 2019 Archive (3)

साड़ी शराब ले न अब मतदान कीजिए - लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'(गजल )

२२१/ २१२१/२२२/१२१२



जीवन हो जिसका संत सा गुणगान कीजिए

शठ से हों कर्म उसका ढब अपमान कीजिए।१।



साड़ी शराब ले  न  अब  मतदान कीजिए

लालच को अपने, देश पर कुर्बान कीजिए।२।



करता है जो भी भीख का वादा चुनाव में

जूतों  से  ऐसे  नेता  का  सम्मान कीजिए।३।



कुर्सी को उनकी और मत साधन बनो यहाँ

वोटर हो अपने वोट का कुछ मान कीजिए।४।



मंशा है जिनकी राज हित जनता को…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 26, 2019 at 6:52pm — 4 Comments

कैसे बाँचें पीढ़ियाँ, रंगों का इतिहास - दोहे ( लक्ष्मण धामी' मुसाफिर' )

दोहे

कदम थिरकने लग गए, मुख पर छाए रंग

फागुन में मादक हुआ, मानव का हर अंग।१।



टेशू महका हैं इधर, उधर आम के बौर

रंगों की चौपाल है, खूब सजी हर ठौर।२।



अमलतास को छेड़ती, मादक हुई बयार

भर फागुन हँसती रहे, रंगों भरी फुहार।३।



धरती से आने लगी, मादक-मादक गंध

फागुन का है रंग से, जन्मों का अनुबंध।४।



हवा पश्चिमी ले गयी, पर्वों की बू-बास

कैसे बाँचें  पीढ़ियाँ, रंगों  का इतिहास।५।



हिन्दू मुस्लिम…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 20, 2019 at 3:15pm — 4 Comments

साँझ होते  माँ  चौबारे  पर  जलाती  थी दीया -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल )

२१२२/२१२२/२१२२/२१२



मखमली  वो  फूल  नाज़ुक  पत्तियाँ  दिखती  नहीं

आजकल खिड़की पे लोगों तितलियाँ दिखती नहीं।१।



साँझ होते  माँ  चौबारे  पर  जलाती  थी दीया

तीज त्योहारों पे भी  वो बातियाँ दिखती नहीं।२।



कह  तो  देते  हैं  सभी  वो  बेचती  है  देह  पर

क्यों किसी को अनकही मजबूरियाँ दिखती नहीं।३।



अब तो काँटों  पर  जवानी  का  दिखे  है ताब पर

रुख पे कलियों के चमन में शोखियाँ…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 2, 2019 at 7:41pm — 7 Comments

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