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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Blog – March 2019 Archive (7)

मिलती अवाम को ख़ुशी की जलपरी नहीं  (४०)

(२२१ २१२१ १२२१ २१२ )

.

मिलती अवाम को ख़ुशी की जलपरी नहीं 

रुख़्सत अगर वतन से हुई भुखमरी नहीं 

**

उल्फ़त जनाब होती नहीं है रियाज़ियात 

चलती है इश्क़ में कोई दानिशवरी * नहीं


**

उम्र-ए-ख़िज़ाँ में आप जतन कुछ भी कीजिये 

नक्श-ओ-निग़ार-ए-रुख़ की कोई इस्तरी नहीं 

**

बरसों से काटती है ग़रीबी में रोज़-ओ-शब

कैसी अवाम है कहे खोटी खरी नहीं

**

घर में न…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on March 26, 2019 at 11:00pm — 4 Comments

रंग-ए-रुख़सार निखरने का सबब क्या आखिर(३९ )

रंग-ए-रुख़सार निखरने का सबब क्या आखिर
आज फिर सजने सँवरने का सबब क्या आखिर
***
आइना बोल उठा अब्र कहाँ बरसेंगे
काकुल-ए-पेचाँ बिखरने का सबब क्या…
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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on March 23, 2019 at 7:00pm — 6 Comments

सरदार लाज़मी हो असरदार तो जनाब (३८ )

++ग़ज़ल ++(221 2121 1221 212 /2121 ) 

सरदार लाज़मी हो असरदार तो जनाब 

जो चुन सके अवाम के कुछ ख़ार तो जनाब 

****

ऐसा भी क्या शजर जिसे फूलों से सिर्फ़ इश्क़ 

कोई हो शाख शाख-ए-समरदार* तो जनाब (*फल से लदी डाली )

***

होगा नसीब में कि न हो बात और है 

ता-ज़ीस्त रहती प्यार की दरकार तो जनाब 

***

जज़्बात बर्ग-ए-गुल* से ही होते हैं क़ल्ब…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on March 20, 2019 at 10:51pm — 2 Comments

उम्र भर जो भी ग़रीबी के निशाँ देखेगा (३६)

उम्र भर जो भी ग़रीबी के निशाँ देखेगा 

कैसे मुमकिन है वो बाँहों में जहाँ देखेगा 

** 

कितना बारूद भरा होगा बताना मुश्किल 

लफ्ज़ से कोई निकलता जो धुआँ देखेगा 

**

दिल की रानाई का अंदाज़ा लगाए कैसे 

जो फ़क़त हुस्न कि फिर शोला-रुख़ाँ* देखेगा 

**

दर्द महसूस भला ग़म का उसे हो क्यों कर 

ज़िंदगी…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on March 8, 2019 at 1:00am — 1 Comment

मिला न जो हिज़्र इश्क़ में तो कहाँ मुक़म्मल हुई मुहब्बत (३५)

मिला न जो हिज़्र इश्क़ में तो कहाँ मुक़म्मल हुई मुहब्बत 

डरे फ़िराक़-ओ-ग़मों से उसको न इश्क़ फरमाने की ज़रूरत 

**

सफ़र मुहब्बत की मंजिलों का हुज़ूर होता कभी न आसाँ 

यहाँ न साहिल का कुछ पता है न तय सफ़र की है कोई मुद्दत

**

न जाने कितने हैं इम्तिहाँ और क़दम क़दम पर बिछे हैं कांटे 

रह-ए-मुहब्बत पे है जो चलना तो दिल में रक्खें ज़रा सी हिम्मत 

**

रक़ीब गर मिल गया कोई तो बढ़ेंगी…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on March 5, 2019 at 10:30am — 4 Comments

खिजाँ ने गुलशनों में दर्द यूँ बिखेरे हैं (३४ )

खिजाँ ने गुलशनों में दर्द यूँ बिखेरे हैं 

चमन के बागबाँ के बच्चे आज भूखे हैं 

**

बहार तुझ पे है दारोमदार अब सारा 

कि फूल कितने चमन में ख़ुशी के खिलते हैं 

**

अजीब शय है तरक़्क़ी भी लोग जिस के लिए 

ज़मीर बेच के ईमान बेच देते हैं 

**

क़ुबूल कर ली खुदा ने हर इक दुआ जब भी 

दुआ में ग़ैर की खातिर ये हाथ उट्ठे…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on March 3, 2019 at 7:30pm — 4 Comments

मुख़्तलिफ़ हमने यहाँ सोच के पहलू देखे (३३ )



मुख़्तलिफ़ हमने यहाँ सोच के पहलू देखे

अक़्ल हैरान है,ऐसे मियाँ जादू देखे

**

आदमी शह्र में हैरान परेशाँ देखा

जब कि जंगल में बिना ख़ौफ़ के आहू देखे

**

जब अमावस को गया चाँद मनाने छुट्टी

नूर फ़ैलाने को बेताब से जुगनू देखे

**

दिल में इंसान के अल्लाह नदारद देखा

और हैवान बने आज के साधू देखे

**

प्यार अहसास है,महसूस किया जाता है

कैसे मुमकिन है कोई चश्म से ख़ुशबू देखे

**

रोटियाँ थोक में मिलती हैं…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on March 1, 2019 at 7:00pm — 4 Comments

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