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Amod shrivastav (bindouri)'s Blog – March 2019 Archive (9)

सुब्ह शाम की तरह अब ये रात भी गई ..

2121-212-2121-212

सुब्ह शाम की तरह अब ये रात भी गई।।

ख़ैरख्वाह वो बने,खैर-ख्वाही' की गई।।

मुद्दतों के बाद गर जो यूँ बात की गई।।

खामियां जता के ही गात फिर भरी गई।।

गर दो'-आब की पवन,रोंक लें ये खिड़कियां ।

रूह चंद दिवारों के दरमियाँ सिली गई।।

गर कहूँ जो' उनकी' तो साफ़ लफ़्ज हैं यही।

रात-ओ-दिन युँ आदतन हमसे बात की गई ।।

बिन पढ़े किताब -ए- दिल ,ग़र हिंसाब कर दिया ।।

तो दरख़्ती' जिंदगी क़त्ल ही तो की…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on March 22, 2019 at 10:30am — 1 Comment

कोई ऐसे रूठता है क्या

122-1212-22

.

कोई रोकने लगा है क्या  ?

कोई राज दरमियां है क्या?

तेरा फोन अब नहीं आता!!

कोई और मिल गया है क्या ?

मुझे गैर कह दिया तुमने!!

मेरा वास्ता बुरा है क्या ?

मेरे रूबरू नहीं रहते!!

मेरा साथ बददुआ है क्या?

तू ही खैरख्वाह बस मेरा!!

तू भी आजकल खफा है क्या?…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on March 17, 2019 at 9:00pm — 1 Comment

मन की मनमानी को ठुकराने लगे हैं ..

2122-2122-2122

वक्त से दो चार हो जाने लगे हैं।।

मन की मनमानी को ठुकराने लगे हैं।।

अब जो अरमानों को टहलाने-लगे* हैं।।(बहाने बाजी करना)

जीस्त की सच्चाई अपनाने लगे हैं।।

उम्र की दस्तक़ जो है चहरे प मेरे।

श्वेत होकर केश लहराने लगे हैं।।

बचपना अब रूठता सा जा रहा है ।

पौढ़पन* अब अक्श दरसाने लगे हैं।।

मंजिलों में जिनके परचम दिख रहे उन।

सब के तर* पे शाल्य* मनमाने लगे हैं।।( निचला हिस्सा,…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on March 16, 2019 at 1:21pm — 4 Comments

जाने क्या कह रहा है मेरा आज मन ..गीत



शीत जैसी चुभन, आग जैसी जलन।।

जाने क्या कह रहा है मेरा आज मन।।

इक कशिश पल रही है हृदय में कहीं।

कश्मकश चल रही , साथ मेरे कोई।।

डुबकियां ले रहा ही मेरा आज मन।।

इस कदर है अधर से अधर का मिलन।।

जैसे पुरवा पवन छू रही हो बदन।।..१

जाने क्या कह रहा है .....

गर हूँ तन्हा मेरे साथ तन्हाई है।

भीड़ के साथ हूँ तो ये रूसवाई है।

दौड़कर पास आना लिपटना तेरा।।

मेरे आगोश में यूँ सिमटना तेरा।।

यूँ लगे जैसे मिलतें हो धरती…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on March 12, 2019 at 10:48am — 2 Comments

मन भी कितना आतुर है ..

22-22-22-2

मन भी कितना आतुर है।।

ज्यूँ सबकुछ जीवन भर है।।

पशुओं  कि यह हालत भी।

इंसानों से बेहतर है।।

लोक समीक्षा इतनी ही।

जितना चिड़िया का पर है।।

मेरा मेरा मुझको ही।

छाया है सब छप्पर है।।

कितना तुम अब भागोगे ।

तीन-कदम* पर ही घर है।।(बचपन जवानी बुढ़ापा)

खूब बड़े बन जाओ क्या…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on March 11, 2019 at 2:49pm — 3 Comments

मैं वक्त कहाँ कब रुकता हूँ .

22-22-22-22

मैं कुछ और कहाँ कहता हूँ।।
गैरों से लिपटा - अपना हूँ।।

वैमनष्यता न सर उठा पाए।
दुश्मन की तरहा रहता हूँ।।

दरपण भी छू सकता है क्या।
बस ये ऐसे ही - पूछा हूँ।

कलियाँ खुशबू बिखरायेंगी।
मैं वक़्त कहाँ कब रुकता हूँ।।

आमोद रखो, बिश्वास रखो।
पग पग जीवन में अच्छा हूँ।।


..अमोद बिंदौरी / मौलिक अप्रकाशित

Added by amod shrivastav (bindouri) on March 10, 2019 at 11:30am — 5 Comments

सच की झूठी जिल्दकारी क्या करूँ ..

2122-2122-212

याद आती है तुम्हारी क्या करूँ ।।

छाई रहती है खुमारी  क्या करूँ।।

अब नहीं चलता , मेरे पे बस मेरा।

बढ़ रही नित बेक़रारी क्या करूँ।।

खुद मुआफ़िक आयत ए कुरआन हो।

इसमें अच्छी अर्श कारी क्या करूँ।।

झूठा' सिक्का अब चलन बाजार का

सच की झूठी जिल्दकारी क्या करूँ।।

हर्ज़ कोई बात से…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on March 9, 2019 at 3:30pm — 4 Comments

कोई उम्मीद का सूरज कहीं पर है खड़ा सायद

1222-1222-1222-1222

जो नजरें अब तलक बेख़ौफ़ दौड़ी जा रहीं हैं यूँ।।

कई आशाएं तपती रेत को खंघला रहीं हैं यूँ।।

कोई उम्मीद का सूरज , कहीं पर है खड़ा सायद।

पहल की किरने ये पैग़ाम लेकर आ रहीं हैं यूँ।।

ये सन्नाटा जो पसरा चीख़ के कुछ अंश बांकी हैं।

दिशाएँ इंतक़ाम-ए-जंग को दुहरा रहीं हैं यूँ।।

विषमता में खड़ी हो लोकधर्मी जंग लड़कर अब।

रिसाल ए रौशनाई हौसले उमड़ा रहीं हैं यूँ।।

कोई तो लिख रहा बेशक नया भारत किताबों में।…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on March 6, 2019 at 7:39pm — 1 Comment

अहसास होगा याद अगर करते हैं

2212-22-1122-22

अहसास होगा याद अगर करते हैं।।

आती है क्यूँ चाहत, के क्यूँ घर करते हैं।।

इस आस से की कल कुछ अच्छा होगा।

हम लोग इक दिन और सफर करते हैं।।

मैंने भी अक्सर नाम लिये बिन लिख्खा।

जज्बात ए दिल बेनाम सफर करते हैं।।

ये आपकी आहट ही कुरेदेगी घर को।

जो छोड़ जाना आप नज़र करतें हैं।।(पेश करना)…

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Added by amod shrivastav (bindouri) on March 4, 2019 at 12:30pm — 4 Comments

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