For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मैं वक्त कहाँ कब रुकता हूँ .

22-22-22-22

मैं कुछ और कहाँ कहता हूँ।।
गैरों से लिपटा - अपना हूँ।।

वैमनष्यता न सर उठा पाए।
दुश्मन की तरहा रहता हूँ।।

दरपण भी छू सकता है क्या।
बस ये ऐसे ही - पूछा हूँ।

कलियाँ खुशबू बिखरायेंगी।
मैं वक़्त कहाँ कब रुकता हूँ।।

आमोद रखो, बिश्वास रखो।
पग पग जीवन में अच्छा हूँ।।


..अमोद बिंदौरी / मौलिक अप्रकाशित

Views: 53

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on March 17, 2019 at 4:54pm

आद0 आमोद श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। बढ़िया प्रयास है, बधाई स्वीकार कीजिये।

Comment by Samar kabeer on March 12, 2019 at 2:20pm

"ग़ज़ल की कक्षा" में जनाब अजय तिवारी साहिब का आलेख "मीर द्वारा इस्तेमाल की गई बहरैं" का अध्यन करें ।

वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि 22 को 112 ले सकते हैं,और इस बह्र में गेयता का विशेष ध्यान रखना पड़ता है ।

Comment by amod shrivastav (bindouri) on March 12, 2019 at 1:42pm

कलियाँ खुशबू बिखरायेगी।

मैं समय का बहता दरया हूँ।।..(मुझे इसमें रब्त भी नही लगा और  समय का' भी भ्रमित कर रहा था

आमोद लिये बिस्वास बढ़ो...इसमें द-लि.. क्या 2 होगा??

पग -पग जीवन में अच्छा हूँ।

Comment by amod shrivastav (bindouri) on March 12, 2019 at 1:27pm

आ समर दादा प्रणाम ..

दादा इन बहरों की एक जानकारी चाहिए थी ..क्या इन में मात्रा भार गिर सकता है । 

जैसे मूलतः ..22 को 112, या 211 में जोड़ कर पूरा होता है ।

मैं यहाँ भ्रमित हो गया 

"मैं समय का' बहता दरिया हूँ " ये "समयक "

 इसी तरह ... वैमन स्यता'न...

कृपया इस पर मर्गदर्शन दीजियेगा

Comment by Samar kabeer on March 12, 2019 at 12:23pm

जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'वैमनष्यता न सर उठा पाए।
दुश्मन की तरहा रहता हूँ'

ये शैर बह्र में नहीं,देखिये ।

'मैं वक़्त कहाँ कब रुकता हूँ'

ये मिसरा लय में नहीं है ।

'आमोद रखो, बिश्वास रखो'

ये मिसरा लय में नहीं है ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'कागा उवाच' (लघुकथा) :
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
8 minutes ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'होंगी ही उससे…"
10 minutes ago
Hariom Shrivastava posted blog posts
23 minutes ago
vishva prakash mehra is now a member of Open Books Online
2 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
15 hours ago
मोहन बेगोवाल posted a blog post

ग़ज़ल

   चल छुपे जो तेरे थे राज़ नुमायाँ कर दें।दर्द अपने को पराये या के दरमाँ कर दें।जिंदगी उम्र बताई न…See More
18 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ये कौन आया है महफ़िल में चाँदनी पहने------पंकज मिश्र
"आदरणीय बाऊजी बहुत बहुत आभार"
23 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ये कौन आया है महफ़िल में चाँदनी पहने------पंकज मिश्र
"आदरणीय बृजेश जी बहुत बहुत आभार"
23 hours ago
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post सुब्ह शाम की तरह अब ये रात भी गई ..
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,इस प्रयास के लिए बधाई ।"
yesterday
Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post पत्थरों पे हैं इल्ज़ाम झूठे सभी-गजल
"जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'रहबरी तीरगी की रहे…"
yesterday
SALIM RAZA REWA posted photos
yesterday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी साहब आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें"
Saturday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service