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Shanno Aggarwal's Blog – January 2012 Archive (9)

''अपने प्यारे बापू''

आज महात्मा गांधी जी की पुन्य तिथि पर एक बालकविता प्रस्तुत है:

अपने प्यारे बापू

कितने अच्छे थे अपने बापू 

सादा सा जीवन था उनका 

लड़े लड़ाई सच की ही वह

ध्यान हमेशा रखा सबका l



हिंसा ना भाती थी उनको

साथ अहिंसा का अपनाया

सबके लिये थी दया-भावना

काम बड़ा करके दिखलाया l



भारत को आज़ाद कराने में

लगा दिया जीवन था सारा

देश छुड़ाया जब अंग्रेजों से     

सबसे ऊँचा था उनका नारा l



दुबली-पतली काया थी…

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Added by Shanno Aggarwal on January 30, 2012 at 10:30pm — 3 Comments

''आजाद देश के पंछी हम'' एक बाल-गीत

हाँ, आज का दिन छुट्टी का दिन l

आजाद देश के पंछी हम

जय हिंद ! वन्दे मातरम् !

सुबह-सुबह उठी जब मुन्नी

बोली मेरी स्कूल से छुट्टी

भैया की कालेज से छुट्टी

पापा की आफिस से छुट्टी

मौज ही मौज है सारा दिन l

हाँ, आज का दिन छुट्टी का दिन l

आजाद देश के पंछी हम

जय हिंद ! वन्दे मातरम् !

निकलेगा जलूस सड़कों पर

देखेंगे टीवी हम मिलकर

हाथों में सधा तिरंगा होगा

भरत नाट्यम डांस भी होगा

होगी तब खूब ताक धिना-धिन l

हाँ, आज का दिन…

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Added by Shanno Aggarwal on January 26, 2012 at 4:00am — 4 Comments

''नाशाद मेरा मिहिर''

नाशाद मेरा मिहिर तो जिंदगी वफात है  

साँसों के गिर्दाब में इस रूह की निजात है l  

 

साहिर है तेरी कलम में कुछ कमाल का

जैसे खून में भरा हो कुछ रंग गुलाल का l

 

हर्फों में छुपा रखी है सदियों की बेबसी 

तेरे चेहरे पे अब देखती हूँ ना कोई हँसी l

 

बातों में बेरुखाई अब होती है इस कदर   

बेजार सी जिंदगी जैसे बन गई हो जहर l

 

तासीर न कम होती है होंठों को भींचकर

या बेसाख्ता बहते हुये अश्कों से सींचकर…

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Added by Shanno Aggarwal on January 24, 2012 at 7:50pm — 9 Comments

''मौसम के रंग'' (नवगीत)

निशा के आँचल को समेट

खुद को किरणों में लपेट

क्षितिज पार फैली अरुणाई

बहने लगी पवन बौराई 

कोहरे का आवरण हटा    

सूरज ने खोले नयन कोर l

 

नीड़ में दुबके बैठे आकुल

भोर हुई तो चहके खगकुल

खुले झरोखे हवा की सनसन 

आकर तन में भरती सिहरन

है नव प्रभात, संदेश नवल

नव उमंग, मन में हलचल

कमल सरोवर पर अलि-राग

काँव-काँव कहीं करते काग

हर्ष से तरु-पल्लव विभोर l  

 

संक्रांति मनाते हैं हिलमिल…

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Added by Shanno Aggarwal on January 23, 2012 at 3:30am — 9 Comments

फुटकर ख्याल

कल्पना में बिखरे कुछ टुकड़े पेश हैं:

 

घर में छा जातीं खुशियाँ

अगर कोई लल्ला हो गया l

 

और अगर जन्मी बिटिया

तो भारी पल्ला हो गया l

 

जब कभी फसल हुई कम

तो मंहगा गल्ला हो गया l

 

कोई डिग्री लेकर घर बैठे

तो वो निठल्ला हो गया l

 

शादी क्या हुई जनाब की

बीबी का…

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Added by Shanno Aggarwal on January 17, 2012 at 3:30am — 8 Comments

नया साल, नयी उम्मीदें

करवट लेता है नया साल

आओ कुछ उम्मीदें कर लें   

अरमानों के कुछ बूटों को

दामन में हम अपने सी लें l

 

नेकी हो भरी दुआओं में

मायूस ना हो कोई चेहरा 

जीवन हो शांत तपोवन सा

खुशिओं का रंग भरे गहरा l

 

ना आग बने कोई चिंगारी

ना आस बने कोई लाचारी

जग में फैला हो अमन-चैन 

ना कहीं भी हो कोई बेगारी l

 

ओंठों पे खिली तबस्सुम हो

हर दिल में नूर हो इंसानी 

आँखों में रोशन हों…

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Added by Shanno Aggarwal on January 15, 2012 at 8:00pm — No Comments

''दुनिया गोल है''

ये दुनिया गोल है

यहाँ बड़ा ववाल है

हर चीज का मोल है

बड़ा गोलमाल है l

 

बातों में तो मिश्री

मन में कोई चाल है

है बहेलिया ताक में

बिछा के बैठा जाल है l

 

कहीं ताल लबालब 

कहीं पड़ा अकाल है

क्यों इतना अन्याय

उठता रहा सवाल है l

 

कर पायें आपत्ति

ऐसी कहाँ मजाल है

बात-बात में लोगों की

खिंच जाती खाल है l

 

-शन्नो अग्रवाल 

Added by Shanno Aggarwal on January 15, 2012 at 7:37am — 4 Comments

''है समय की दरकार''

है समय की दरकार l

ये है संसार
कभी ना
किसी पर
करना एतबार l

झूठ के खार
कब जाने
किस पर
कर देंगे वार l

खिला हरसिंगार
कब कौन
लूट जाये
पेड़ की बहार l

आज है प्यार
कल को
नफरत के
होंगें अंगार l

है समय की दरकार l

-शन्नो अग्रवाल

Added by Shanno Aggarwal on January 15, 2012 at 6:00am — 2 Comments

''मकर-संक्रांति की यादें और पतंगें''

खुला मौसम गगन नीला

धरा का तन गीला - गीला l

पतंगों की उन्मुक्त उड़ान

तरु-पल्लव में है मुस्कान l 

मकर-संक्रांति को भारत के हर प्रांत में अलग-अलग नामों से जाना जाता है. और वहाँ के वासी अलग-अलग तरीके से इस त्योहार को मनाते हैं. पंजाब में इसे लोहड़ी बोलते हैं जो मकर-संक्राति के एक दिन पहले की शाम को मनायी जाती है. और उत्तरप्रदेश में, जहां से मैं आती हूँ, इसे मकर-संक्रांति ही बोलते हैं. लोग सुबह तड़के स्नान करते हैं ठंडे पानी में. और इस दिन को खिचड़ी दिवस के रूप…

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Added by Shanno Aggarwal on January 13, 2012 at 5:30pm — 7 Comments

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