For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

शीत के मौसम से मच रही गदर है
इक्का-दुक्का ही कोई आता नजर है l

जमी बर्फ जमीं पे खामोश सा शहर है
पंछी ना चहका कोई ठूँठ हर शजर है l

होता बहुत मुश्किल निकलना घरों से
हाथ में दस्ताने और गले में मफलर है l

कांपती सी दिखती हर दूर तक डगर है
लोग बुत से चलते फिसलने का डर है l

बिन फूल-पात दिखते हैं पेड़ नंगे सारे
बस बर्फ के फूलों से ढका हुआ सर है l

दूब पर सफेदी चमकती है रजत जैसी
झुक रहे हैं तरु और धुंधली सी सहर है l

-शन्नो अग्रवाल

Views: 596

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Shanno Aggarwal on March 12, 2013 at 2:27am

प्रभात जी, रचना की सराहना के लिये आपका बहुत धन्यबाद. 

Comment by Shanno Aggarwal on March 12, 2013 at 2:26am

उपासना जी, आपका हार्दिक धन्यबाद.  

Comment by prabhat kumar roy on March 11, 2013 at 4:49pm

प्रकृति प्रदत्त शीत ऋतु का शानदार मनभावन चित्रण कर दिया शानो अग्रवाल ने। बहुत बधाई।

Comment by upasna siag on January 24, 2013 at 3:58pm

बहुत सुन्दर........

Comment by Shanno Aggarwal on January 23, 2013 at 2:30am

विशाल जी, आपका बहुत धन्यबाद. 

Comment by Shanno Aggarwal on January 23, 2013 at 2:29am

राजेश कुमारी जी, रचना की सराहना हेतु आपका हार्दिक धन्यबाद. 

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on January 22, 2013 at 9:34pm

वाह.........सर्दी के मौसम की एक तस्वीर बनाती सी गजल के लिये दिल से बधाई.........


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 22, 2013 at 3:16pm

बहुत सार्थक और सुन्दर  चित्र खींचा है बर्फीले मौसम का शन्नो जी हार्दिक बधाई 

Comment by Shanno Aggarwal on January 22, 2013 at 3:09am

प्राची जी, आपसे रचना पर प्रशंसा पाकर बहुत खुशी हुई...आपका हार्दिक आभार. 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 21, 2013 at 6:01pm

बहुत सुन्दर आदरणीया शन्नो जी, 

बहुत सुन्दर शब्दों में बर्फीली सर्दी के नजारों को समेटा है, बहुत बहुत बधाई इस सुन्दर प्रकृति की अभिव्यक्ति पर. सादर.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
12 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
15 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Feb 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service