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मनोज अहसास's Blog – January 2023 Archive (3)

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

2×15

एक ताज़ा ग़ज़ल

टुकड़े टुकड़े में दिन बीता और पहाड़ सी रात कटी।

तेरी उल्फत में जाने जां ज़ीस्त यूँ ही बेबात कटी।

तूने छीन के अँधियारों से मुझको दिया नया जीवन,

तू क्या जाने फिर तेरे बिन कैसे ये सौगात कटी।

इस दुनिया की सबसे पुरानी शर्त है उपयोगी होना ,

उसका मर जाना बेहतर है जिस घोड़े की लात कटी।

चाहत के दो कतरे पीकर जीवन भर सुलगा जीवन,

खुद को लम्हा लम्हा जलाके ये तेरी खैरात कटी।

कैद कर लिया है खुद को बस…

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Added by मनोज अहसास on January 28, 2023 at 11:25pm — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

221 2121 1221 212

मुश्किल में अपने इश्क़ की यूँ देखभाल कर।

अपने कहे का ,अपने लिखे का ख़्याल कर।

महसूस हो न दिल मे कभी उसकी याद तो,

अपने ज़मीर को जगा के सौ सवाल कर।

इक तरफा प्यार फिर भी बहुत कामयाब है,

खुद में ही उलझे रहना है सिक्के उछाल कर।

हम ही नहीं थे आपकी महफ़िल की रौशनी,

अच्छा किया है आपने दिल से निकाल कर।

ये चार दिन की बात तो मेरे लिए थी बस,

तू चाँदनी को रखना हमेशा संभाल कर।

कुदरत के…

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Added by मनोज अहसास on January 22, 2023 at 12:06am — 5 Comments

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

12122   12122   12122    12122

तेरे ख्यालों के अंजुमन में हज़ार पहरे लगे हुए हैं

सजाये कैसे ग़ज़ल का दामन गुनाहों में हम रंगे गए हैं

हमारे जैसा उदास कोई हमें कहीं भी नहीं मिला पर

हमारे दुख से बड़े बहुत दुख ज़माने भर में भरे पड़े हैं

कभी नहीं वो कहेंगे हमसे के उनके दिल में है प्यार अब भी

सकार को भी जिया था हमने नकार को भी समझ रहे हैं

ये ज़िन्दगी की उदास खुशबू जो बस गयी है मेरी रगों में

ज़रा सा खुश हूँ मैं इसमें क्योंकि तुम्हारें…

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Added by मनोज अहसास on January 20, 2023 at 8:00pm — 3 Comments

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