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Savitri Rathore
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Apr 4, 2016
Dr Ashutosh Mishra commented on Savitri Rathore's blog post मन ने सुना
"इस रचना के लिए मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर "
May 24, 2015
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Savitri Rathore's blog post मन ने सुना
"अधिक आत्मविश्वाश भी छलावा है पेडो की रगड़ से उत्पन्न दावा है"
May 24, 2015
Manoj kumar Ahsaas commented on Savitri Rathore's blog post मन ने सुना
"भाव पूर्ण रचना बधाई सादर"
May 24, 2015
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May 24, 2015
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मन ने सुना

धीरे से कहा जो तुमने, वो मेरे मन ने सुन लिया। तुम नहीं थे समीप मेरे, फिर भी मैंने तुम्हें देख लिया।अधरों पर थी बात ही और, जिसका अर्थ हृदय ने समझ लिया। तुम भूले नहीं थे मुझे,फिर भी तुमने भूलने का-सा अभिनय किया।है निवास हृदय में मेरा ही, किन्तु कुछ और ही दिखला दिया। सोचा करते हो केवल मुझे, पर काम कुछ और बता दिया।कहते हो कि कुछ भी नहीं, पर अधिकार अपना जता दिया। मेरी समीपता से ही होते हो विचलित,स्वभाव इसे बता दिया।नेत्रों में बसी है मेरी ही छवि, पर चित्र कुछ और बना दिया। आते हैं स्वप्न मेरे…See More
May 24, 2015
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Savitri Rathore commented on Savitri Rathore's blog post मन के भाव
"आदरणीय जीतेन्द्र जी और लक्ष्मण जी आप दोनों का अमूल्य प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद !"
Jun 29, 2014
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Savitri Rathore's blog post मन के भाव
"आ0 सावित्री जी इस भावविभोर करने वाली सुंदर प्रेममय रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें l"
Jun 27, 2014
जितेन्द्र पस्टारिया commented on Savitri Rathore's blog post मन के भाव
"मुझे विरह में लीन रखो,तुम चाहे तो आजीवन। दो न अपने दर्शन मुझे,तुम चाहे तो आमरण............बहुत सुंदर, मन को छू जाते भाव. बधाई स्वीकारें आदरणीया सावित्री जी"
Jun 26, 2014
Savitri Rathore commented on Sushil Sarna's blog post सावन का था महीना .....
"अतिसुन्दर रचना ! अद्भुत श्रृंगार !"
Jun 26, 2014
Savitri Rathore commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post हिन्दी गजल - गोपाल
"अतिसुन्दर ग़ज़ल ! बधाई हो।"
Jun 26, 2014
Savitri Rathore commented on Savitri Rathore's blog post मन के भाव
"आदरणीया आशा जी, अन्नपूर्णा जी और कनेरी जी,सादर नमस्कार ! आप सभी के उत्साहवर्धन हेतु मैं आभारी हूँ। स्नेह बनाये रखियेगा। "
Jun 26, 2014

Profile Information

Gender
Female
City State
Agra,Uttar Pradesh
Native Place
Agra
Profession
Teaching
About me
I am a writer and poetess,so i am join this website.

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At 2:25am on March 22, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
sharadindu mukerji
said…

आदरणीया सवित्री जी, आपने मुझे मित्र बनाया इसके लिये आभारी हूँ. मेरा अभिवादन स्वीकार करें.

At 5:36pm on March 7, 2013, mrs manjari pandey said…

 आदरणीया सविता जी  रोचक ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकारें।

At 6:15am on February 28, 2013, Vindu Babu said…
बहुत शुक्रिया सावित्री जी!
हार्दिक आभार...

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मन ने सुना

धीरे से कहा जो तुमने,

वो मेरे मन ने सुन लिया।

तुम नहीं थे समीप मेरे,

फिर भी मैंने तुम्हें देख लिया।

अधरों पर थी बात ही और,

जिसका अर्थ हृदय ने समझ लिया।

तुम भूले नहीं थे मुझे,फिर भी

तुमने भूलने का-सा अभिनय किया।

है निवास हृदय में मेरा ही,

किन्तु कुछ और ही दिखला दिया।

सोचा करते हो केवल मुझे,

पर काम कुछ और बता दिया।

कहते हो कि कुछ भी नहीं,

पर अधिकार अपना जता दिया।

मेरी समीपता से ही होते हो

विचलित,स्वभाव इसे…

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Posted on May 23, 2015 at 7:30pm — 3 Comments

मन के भाव

आज मन के भाव को,
प्रेम का शुभ संचार दो।
आज हृदय की पीर को,
आत्मा में विस्तार दो।।

मैं तुम्हारे गीत गाती
ही रहूँगी जन्म भर।
तुम्हारे प्रेम-दीवानी हो,
ये कहूँगी मृत्यु तक।।   

मुझे विरह में लीन रखो,
तुम चाहे तो आजीवन।
दो न अपने दर्शन मुझे,
तुम चाहे तो आमरण।।

सुनो,मैं तुम्हारी प्रेयसी,
औ मैं ही तुम्हारी प्रेरणा।
चैन कब आएगा तुमको,
इस जन्म में मेरे बिना।।
'सावित्री राठौर'
[मौलिक एवं अप्रकाशित]

Posted on June 24, 2014 at 5:24pm — 9 Comments

तू मेरी मोहब्बत है,तू मेरी इबादत है।

तू मेरी मोहब्बत है,तू मेरी इबादत है।

कैसे मैं तुझसे कहूँ,मुझे तेरी ज़रुरत है।



हरदम मैं लूँ नाम तेरा,चाहे शाम हो या सवेरा,

ये तुझको भी है मालूम, मुझे तेरी आदत है।



पाने को न कुछ पाया,जो तुझको नहीं पाया,

फिर चाहे जहाँ भर की,मेरे पास ये दौलत है।



ये साँस भी छिन जाये,जो पास न तू आये,

आकर आगोश में ले ले,बस इतनी हसरत है।



तुझसे ज़िंदगानी मेरी,तुझसे ही कहानी मेरी,

तेरे बिन जीना कैसा,कह दे,मरने की इज़ाज़त है।

 

'सावित्री राठौर'

[मौलिक…

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Posted on June 21, 2014 at 8:36pm — 6 Comments

जो तू आये तो तुझे अपनी आँखों में क़ैद कर लूँ मैं।

तुझे अपनी ज़िंदगी में इस तरह शामिल कर लूँ मैं,

कि तू मेरे पास न भी हो तो तेरा दम भर लूँ मैं।।



हर घड़ी रहता है इन आँखों को इन्तज़ार तेरा,

जो तू आये तो तुझे अपनी आँखों में क़ैद कर लूँ मैं।



तेरे तसव्वुर में डूबी हैं तन्हाइयाँ और ज़िंदगी मेरी,

ग़र तुझे पा लूँ तो अपनी हर हसरत पूरी कर लूँ मैं।



तेरी बाँहों में आज पिघल जाने को जी चाहता है,

तेरे सीने से लगकर हमेशा को आँखें बंद कर लूँ मैं। …

Continue

Posted on May 5, 2014 at 4:26pm — 13 Comments

 
 
 

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