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क़मर जौनपुरी
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Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"मतले का ऊला मिसरा दूसरे शैर का ऊला मिसरा तीसरे शैर का सानी मिसरा 5वें का ऊला,छटे का सानी मिसरा ।"
Saturday
Dayaram Methani commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"आदरणीय कमर जौनपुरी जी बहुत अच्छी गज़ल हुई है। ये शेर तो लाजवाब है --- अब ज्ञान बाँटने का है ठेका उन्हें मिलाजो खा रहे हैं मुफ़्त में बिल्कुल हराम की   सुंदर सृजन हेतु बधाई स्वीकार करें।"
Dec 7
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम जनाब समर कबीर साहब और जनाब राज़ साहब हौसला आफ़ज़ाई के लिए। उस्तादे मोहतरम थोड़ा इशारा भी कर देते की शिल्प कहाँ कमज़ोर है तो आइंदा ख़्याल रखना आसान होता। "
Dec 7
Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"जनाब क़मर जौनपुरी साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । शिल्प पर थोड़ा ध्यान देने की आवश्यकता है ।"
Dec 7
राज़ नवादवी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"अदार्नीय क़मर जौनपुरी साहब, सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें. सादर "
Dec 7
क़मर जौनपुरी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७९
"बहुत ही सुंदर ग़ज़ल जनाब राज़ साहब। मुबारकबाद।"
Dec 7
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम तेजवीर सिंह जी हौसला आफ़ज़ाई के लिये।"
Dec 7
TEJ VEER SINGH commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"हार्दिक बधाई आदरणीय क़मर जौनपुरी जी।बेहतरीन गज़ल। अब ज्ञान बाँटने का है ठेका उन्हें मिलाजो खा रहे हैं मुफ़्त में बिल्कुल हराम की/५"
Dec 7
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -14( खुदा की सारी रहमत इश्क के आँचल में रहती है)
"मोहतरम जनाब समर कबीर साहब, जनाब तेजबीर साहब, जनाब श्याम नारायण वर्मा साहब और जनाब राहुल डांगी साहब। बहुत बहुत शुक्रिया व आदाब सभी मोहतरम का हौसला आफ़ज़ाई के लिए।"
Dec 7
क़मर जौनपुरी commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"अच्छी ग़ज़ल हुई है जनाब मनोज कुमार एहसास जी। मुबारकबाद कबूल करें। बहर आपने अलग लिख रखी है। इसकी बहर है 2122 2122 212"
Dec 7
क़मर जौनपुरी posted a blog post

गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )

221-2121-1221-212धज्जी उड़ी हुई है सभी इन्तज़ाम कीक़ानून की सिफ़त है बची सिर्फ नाम की//१तुम थे हवा हवाई बचा के नज़र गएमेरी तरफ़ से कब थी मनाही सलाम की।//२दिल में जगा के टीस चले मुस्कुरा के तुमअब दिल में धक लगी है तुम्हारे पयाम की//३बौरा के जब बसन्ती हवा झूमती चलेकोयल सुनाए कूक तुम्हारे कलाम की//४अब ज्ञान बाँटने का है ठेका उन्हें मिलाजो खा रहे हैं मुफ़्त में बिल्कुल हराम की/५इक शाम जो थी गुज़री तुम्हारे दयार मेंहर शाम याद आती है उस प्यारी शाम की//६तेरा करम हुआ जो मुहब्बत की बज़्म मेंहस्ती ही मिट गई है…See More
Dec 6
Rahul Dangi commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -14( खुदा की सारी रहमत इश्क के आँचल में रहती है)
"बहुत सुन्दर "
Dec 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -12( जब मुल्क़ में नफ़रत का ये बाजार नहीं था)
"आ. भाई कमर जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 5
Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -14( खुदा की सारी रहमत इश्क के आँचल में रहती है)
"जनाब क़मर जौनपुरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 5
TEJ VEER SINGH commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -12( जब मुल्क़ में नफ़रत का ये बाजार नहीं था)
"हार्दिक बधाई आदरणीय क़मर जौनपुरी जी।बेहतरीन गज़ल। मिट जाएं सभी जंग में हिन्दू व मुसलमाँऐसा तो मेरे हिन्द का त्यौहार नहीं था//४"
Dec 5
TEJ VEER SINGH commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -13( फिर भी नादान कलेजे में ज़हर रखता है)
"हार्दिक बधाई आदरणीय क़मर जौनपुरी जी।बेहतरीन गज़ल। पहले शैतान से डरने की ख़बर आती थीआज इंसान ही इंसान से डर रखता है//५"
Dec 5

Profile Information

Gender
Male
City State
Jhumri Tilaiya
Native Place
Jaunpur
Profession
Hindi Teacher
About me
Myself Hindi teacher since 21 years. Trying to compose kavita and gazal

क़मर जौनपुरी's Blog

गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )

221-2121-1221-212



धज्जी उड़ी हुई है सभी इन्तज़ाम की

क़ानून की सिफ़त है बची सिर्फ नाम की//१

तुम थे हवा हवाई बचा के नज़र गए

मेरी तरफ़ से कब थी मनाही सलाम की।//२

दिल में जगा के टीस चले मुस्कुरा के तुम

अब दिल में धक लगी है तुम्हारे पयाम की//३

बौरा के जब बसन्ती हवा झूमती चले

कोयल सुनाए कूक तुम्हारे कलाम की//४

अब ज्ञान बाँटने का है ठेका उन्हें मिला

जो खा रहे हैं मुफ़्त में बिल्कुल हराम की/५

इक शाम जो…

Continue

Posted on December 6, 2018 at 10:31pm — 7 Comments

गज़ल -14( खुदा की सारी रहमत इश्क के आँचल में रहती है)

1222-1222-1222-1222



अगर दिल को अदब औ शायरी से प्यार हो जाए

तुम्हें भी इश्क की खुशबू का कुछ दीदार हो जाए //१

मचलते दिल की धड़कन में चुभे जब इश्क का कांटा ।

ख़ुदा से रूह का रिश्ता तभी बेदार हो जाये//२

खुदा की सारी रहमत इश्क़ के आँचल में रहती है

छुपा लो सर को आँचल में हसीं संसार हो जाए//३

फ़ना हो जाए दीवाना जुनूने इश्क़ की ख़ातिर

खुशी से चूमे सूली को ख़ुदा का यार हो जाए//४

ये दिल बेजान वीना की तरह खामोश रहता…

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Posted on December 5, 2018 at 12:23am — 7 Comments

गज़ल -13( फिर भी नादान कलेजे में ज़हर रखता है)

2122 1122 1122 22/112

छोड़ जाएगा यहीं सब ये ख़बर रखता है

फिर भी दौलत पे वो मर मर के नज़र रखता है//१

ज़िन्दगी प्यार के अमरित से ही होती है रवां

फिर भी नादान कलेजे में ज़हर रखता है //२

कितना मज़बूर है वो रोड पे भूखा बच्चा

एक रोटी के लिए कदमों में सर रखता है//३

आदमी कितना अकेला है भरी दुनिया में

कहने को भीड़ भरे शह्र में घर रखता है//४

पहले शैतान से डरने की ख़बर आती थी

आज इंसान ही इंसान से डर रखता…

Continue

Posted on December 2, 2018 at 8:17am — 7 Comments

गज़ल -12( जब मुल्क़ में नफ़रत का ये बाजार नहीं था)

221--1221--1221--122

जब मुल्क़ में नफऱत का ये बाज़ार नहीं था

हर शख़्स लहू पीने को तैयार नहीं था //१

अब बाढ़ सी आई है शबे ग़म की नदी में

जब तुम न थे दिल में तो ये बेज़ार नहीं था//२

जो देश की सरहद पे सदा ख़ून बहाए

क्या देेेश की मिट्टी से उन्हें प्यार नहीं था//३

मिट जाएं सभी जंग में हिन्दू व मुसलमाँ

ऐसा तो मेरे हिन्द का त्यौहार नहीं था//४

जब मुल्क़ परेशां था फिरंगी के सितम से

मिल जुुल के लड़े मुल्क ये लाचार नहीं…

Continue

Posted on December 2, 2018 at 7:30am — 5 Comments

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