AjAy Kumar Bohat commented on IMRAN KHAN's blog post वही तो सृजनकार है....
Bhawesh Rajpal commented on IMRAN KHAN's blog post वही तो सृजनकार है....
Bhawesh Rajpal commented on IMRAN KHAN's blog post वही तो सृजनकार है....
rajesh kumari commented on IMRAN KHAN's blog post वही तो सृजनकार है....
Sarita Sinha commented on IMRAN KHAN's blog post वही तो सृजनकार है....
CHOTU SINGH commented on IMRAN KHAN's blog post वही तो सृजनकार है....
IMRAN KHAN posted a blog post
Saurabh Pandey commented on IMRAN KHAN's blog post चल दिल चलें अपने जहाँ.......
IMRAN KHAN commented on IMRAN KHAN's blog post चल दिल चलें अपने जहाँ.......
CHOTU SINGH commented on IMRAN KHAN's blog post चल दिल चलें अपने जहाँ.......
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA commented on IMRAN KHAN's blog post चल दिल चलें अपने जहाँ.......Posted on May 8, 2012 at 1:00pm 8 Comments 2 Likes
जिसका अंक है कोई, न रूप आकार है,
जो प्रकाश पुंज है, जो निर्विकार है,
कणों कणों से एक सुर में ये पुकार है,
वही तो सृजनकार है, वही तो सृजनकार है।
ये नगर ये…
ContinuePosted on May 6, 2012 at 11:41am 7 Comments 1 Like
दर्द भरा है ये समां, होने लगा धुआं धुआं.
ये तेरी मंजिलें कहाँ, चल दिल चलें अपने जहाँ.
दो पल मुझे हंसा गया, सदियों मगर रुला गया.
सीने में आग जल गयी, इतना मुझे सता गया,
रोने लगा रुवां रुवां, चल दिल चलें अपने…
ContinuePosted on April 21, 2012 at 1:30pm 7 Comments 1 Like
जिनसे इंसां का भी दर्जा नहीं पाया हमने,
मुद्दतों ऐसे ही इंसानों को पूजा हमने.
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प्यार की पौध के मिटने से तो मर जायेंगे,
खून के अश्क से बागान को सींचा हमने.
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हाँ उजाला नहीं होना मेरी इन राहों में,
शम्स ए पुरनूर से पाया ये अँधेरा हमने.
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हमने मुंसिफ के भी हाथों में जो खंजर देखे,
कांपता दिल था मुक़दमा नहीं डाला हमने.
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वहशी लोगों में किसी कांच से नाज़ुक हम थे,
हुज्जतों से बड़ी दामन ये बचाया…
ContinuePosted on February 12, 2012 at 1:10pm 7 Comments 1 Like
ज़ाहिर है पाक साफ़ तख़य्युल ख़राब है,
चेहरा तो चाँद सा है मगर दिल ख़राब है।
कहते हैं मुझसे चीख़ के रंजो मलाले दिल,
राहें तेरी हसीन थी मन्ज़िल ख़राब है।
अपनी अना के ख़ोल में जो खुद छुपा रहा,
उसने भी अलम दे दिया महफिल खराब है।
करते हैं शेख़ जी भी यहाँ ऐबदारियाँ,
इस दौर में तन्हाँ नहीं बातिल ख़राब है।
इक राह आख़िरी थी बची वो भी खो गई,
लगता है ये नसीब मुकम्मिल ख़राब है।
इक दौर में बुलन्दी मेरी…
Continue
khalid ansari said…
Ganesh Jee "Bagi" said…
PREETAM TIWARY(PREET) said…
Admin said… आवश्यक सूचना:-
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Saurabh Pandey commented on arunendra mishra's blog post जीवन तुझसे एक वर माँगू
Albela Khatri commented on Albela Khatri's blog post धुंए का शौक लग गया तो ज़िन्दगी गई
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