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Dr Vandana Misra
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Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सुन्दर रचना है"
Sep 20
Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया पुष्पा जी, बहुत आभार आपका, मुझे जैसा समझ में आया, उस हिसाब से दूसरे मात्रिक छंद जो गेय हों, वह भी लिख सकते हैं, आखिर की पंक्तियों से ऐसा अर्थ मुझे लगा था, हरिगीतिका छंद एक दो लिखे हैं, पर अभी मेरी पकड़ नहीं है उस ऊपर, उत्साहवर्धन हेतु पुनः…"
Sep 20
Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
""दोहा छंद" प्रमुदित बालाएं सभी, खेल रहीं फुटबॉल। चेहरों पर ही है लिखा, सारा दिल का हाल।। दन्त पंक्ति है खिल रही, चेहरों पर उत्साह। जो भी देखें जन सभी, कह उठते हैं वाह।। पिछड़ा इन्हें न मानिए, जिन्हें न अक्षर ज्ञान। इनमें जो प्रतिभा भरी, हम…"
Sep 19
Dr Vandana Misra joined Admin's group
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चित्र से काव्य तक

"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोंत्सव" में भाग लेने हेतु सदस्य इस समूह को ज्वाइन कर ले |See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr Vandana Misra's blog post सृष्टि का चलन
"आ. वंदना जी, सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Sep 11
आशीष यादव commented on Dr Vandana Misra's blog post सृष्टि का चलन
"एक अच्छी रचना हुई है। बधाई स्वीकार करें आदरणीया। "
Sep 10
Dimple Sharma commented on Dr Vandana Misra's blog post सृष्टि का चलन
"आदरणीया डॉ. वंदना मिश्रा जी नमस्ते, वाह बहुत खुबसूरत रचना हुई है आपकी बधाई स्वीकार करें आदरणीया।"
Sep 2
Samar kabeer commented on Dr Vandana Misra's blog post सृष्टि का चलन
"मुहतरमा डॉ. वंदना मिश्रा जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 31
Dr Vandana Misra posted a blog post

सृष्टि का चलन

सृष्टि का चलनचाँद चमकता सूर्य की ही रोशनी से हर दिन, एक दिन क्यों आ जाता सूर्य और पृथ्वी के बीच, लगाता सूर्य को ग्रहण बहुत पास जाकर रोकता उसका प्रकाश,  बना देता है उसे अपने ही जैसा, यह प्यार है चाँद का या जलन, नहीं नहीं.... चन्द्र किरणों की तो शीतल है छुअन यह तो है बस रचयिता की लीला और सृष्टि का चलन !मौलिक व अप्रकाशितडॉ वन्दना मिश्रा31/8/2020See More
Aug 31
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr Vandana Misra's blog post शुतुरमुर्ग
"आ. बंदना जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 12
Samar kabeer commented on Dr Vandana Misra's blog post शुतुरमुर्ग
"मुहतरमा वंदना मिश्रा जी आदाब,सुदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
May 9
Dr Vandana Misra posted blog posts
May 8
Dr Vandana Misra posted a blog post

"विश्व स्वास्थ्य दिवस" पर एक मुक्तक

विश्व स्वास्थ्य दिवस" पर एक मुक्तक*****************************सर्वे भवन्तु सुखिनः की आज करें मिल प्रार्थनास्वास्थ्य दिवस की आज है बस यह शुभकामनाकोई भूखा न रहे और न कोई अस्वस्थविश्व शांति की जाग उठे सब में शुद्ध भावना------ मौलिक व अप्रकाशितSee More
Apr 7
Samar kabeer commented on Dr Vandana Misra's blog post संदेश समय यह देता है!
"मुहतरमा डॉ. वंदना मिश्रा जी आदाब,ओबीओ पटल पर आपका हार्दिक स्वागत है । अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 31
Dr Vandana Misra commented on Usha Awasthi's blog post दूजा नहीं विकल्प
"सुंदर सन्देश"
Mar 30
Dr Vandana Misra posted blog posts
Mar 28

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Lucknow
Profession
Doctor
संदेश समय यह देता है!
प्रभु ने तुम्हें बनाया था जब
साथ तुम्हारे और बहुत कुछ
भी सिरजा था,
तुम अपने मद में भूल गए
किरदार में अपने फूल गए
दोहन तो सबका खूब किया
पोषण पर किंतु न ध्यान दिया
सब जीव-जंतु और वृक्ष, नदी
ये सब तुमको कुछ देते हैं
बदले में कुछ ना लेते हैं
अस्तित्व से तेरे जुड़े हैं ये
सबके पीछे कुछ कारण हैं
उस कारण को भी भूल गए
तुम सीमित ज्ञान में फूल गए
संतुलन प्रकृति का छेड़ोगे
या अपनी आंखें मूंदोगे
यदि अब भी तुम ना चेतोगे
तो काल यही दिन लाएगा
ये वक़्त मिला है इसीलिये
तुम सीखो, गुनो और समझो
फिर औरों को भी समझाओ
जिनको तुम जाहिल कहते हो
है प्रकृति तुम्हें ये सिखा रही
एक सूक्ष्म तार से जुड़े हैं सब
न भेद करो न बाँटो अब
अपनी भाषा में बता रही
तुम ज्ञानवान, वो ज्ञानहीन
तुम पर ही जिम्मेदारी है
देना होगा तुमको ही उन्हें
तुम समय की अब ये पुकार सुनो
निष्क्रियता में यूँ न बैठो
ख़ुद करो सृजन और करवाओ
तुम मेरा यूँ उपयोग करो 
सन्देश समय ये देता है...
सन्देश समय ये देता है....
सन्देश समय ये देता है!!
मौलिक व अप्रकाशित

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सृष्टि का चलन

सृष्टि का चलन

चाँद चमकता

सूर्य की ही रोशनी से

हर दिन,

एक दिन क्यों आ जाता

सूर्य और पृथ्वी के बीच,

लगाता सूर्य को ग्रहण

बहुत पास जाकर

रोकता उसका प्रकाश, 

बना देता है उसे

अपने ही जैसा,

यह प्यार है चाँद का

या जलन,

नहीं नहीं....

चन्द्र किरणों की तो

शीतल है छुअन

यह तो है बस

रचयिता की लीला

और सृष्टि का चलन !…

Continue

Posted on August 31, 2020 at 4:12pm — 4 Comments

शुतुरमुर्ग

शुतुरमुर्ग

सामने आई
विपदा देख
शुतुरमुर्ग सा
रेत में सिर धँसाये पड़ा,
बिल्ली को देख
कबूतर सा
आँखें मूँदे
सहमा बड़ा,
आज मानव
युद्ध सामने देखकर भी
क्यों कायर सम खड़ा,
काश! फिर कोई

जामवंत आये
हनुमान को
उनका बल
याद दिलाये।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on May 8, 2020 at 3:30pm — 2 Comments

"विश्व स्वास्थ्य दिवस" पर एक मुक्तक

विश्व स्वास्थ्य दिवस" पर एक मुक्तक
*****************************

सर्वे भवन्तु सुखिनः की आज करें मिल प्रार्थना
स्वास्थ्य दिवस की आज है बस यह शुभकामना
कोई भूखा न रहे और न कोई अस्वस्थ
विश्व शांति की जाग उठे सब में शुद्ध भावना

------ मौलिक व अप्रकाशित

Posted on April 7, 2020 at 1:36pm

संदेश समय यह देता है!

प्रभु ने तुम्हें बनाया था जब
साथ तुम्हारे और बहुत कुछ
भी सिरजा था,
तुम अपने मद में भूल गए
किरदार में अपने फूल गए
 
दोहन तो सबका खूब किया
पोषण पर किंतु न ध्यान दिया
सब जीव-जंतु और वृक्ष, नदी
ये सब तुमको कुछ देते हैं
बदले में कुछ ना लेते हैं
 
अस्तित्व से तेरे जुड़े हैं ये
सबके पीछे कुछ कारण हैं
उस कारण को भी भूल…
Continue

Posted on March 28, 2020 at 5:19pm — 1 Comment

 
 
 

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