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दस्तक

कब से देखा है,

याद भी नही तब से देखा है,
इस मौसम को आते हुए
 
एक पहचान सी है
एक मरासिम भी कायम है
फिर भी नायाब सा
किसी हसीन अजनबी की तरह
जेरे लब एक मुस्कुराहट छोड जाता  है
जब भी आता है 
 
मौसमों की भीड़ से गुज़र कर 
अचानक किसी सुबह
हरशिंगार की खुशबू से 
यूँ मन को भिगोता है  
कि फिर किसी मौसम का 
रंग नही चढ़ता…
Continue

Posted on October 11, 2011 at 9:00am — 5 Comments

संस्मरण (Reminiscence)

अभी कुछ दिनो पहले

बचपन के बीत जाने के बाद 
एक खेल खेला करते थे...
नाम छुपा कर अधरों पर
एक फूल संभाले हाथों   मे
बडी उम्मीद के साथ 
पंखुरियाँ तोड़ते हुए कहना,
'He loves me, he loves me not'
हारना  तो एक फूल और,
जीतते तो अनजाने ही 
रंग गुलनार!
तब कब समझा और कब जाना
के हर एक हासिल पर यूं  ही
सौ- सौ कुर्बानियाँ होंगी
बिखरे लम्हों…
Continue

Posted on July 25, 2011 at 7:30pm — 16 Comments

अब तक

एक बात कही थी याद है अब तक

लहज़े-वह्ज़े याद नहीं

एक दर्द हुआ एहसास है अब तक

दिल या ज़हन में याद नहीं,



अक्सर यूँ होता है जब भी,

बात से बात उलझती है,

सोची हुई कहते हैं कुछ,

और कुछ तो यूँ ही फिसलती है

वो अन-सोची बातें ही दिल में,

रह जाती हैं क्या कहिये,

सोच-सोच कर जो भी कहा था

नापा-तौला याद नहीं,



जो साथ खड़े हो तुम मेरे,

तो इनती बात तो सच होगी,

जिस राह से तुम चल कर आये,

हमने भी वही तो चुनी होगी,

राहें वापस… Continue

Posted on July 17, 2011 at 7:30pm — 9 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 8:20am on June 27, 2012, राज़ नवादवी said…

बहुत खूब कहा आराधना जी आपने है-

"एक बात कही थी याद है अब तक
लहज़े-वह्ज़े याद नहीं
एक दर्द हुआ, एहसास है अब तक
दिल या ज़हन में याद नहीं |"

At 3:35pm on October 12, 2011, mohinichordia said…

आराधना जी,मन को मोह लेती हैं आपकी रचनाएँ .बधाई 

At 10:46pm on June 15, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 3:39pm on June 15, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…
At 6:07pm on June 11, 2011,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

इस साहित्यिक जगत में आपका स्वागत है.

क्या आप मुझे जानते हैं? यदि ऐसा नहीं है तो कोई बात नहीं. प्रत्युत्तर मत दीजिएगा.

वस्तुतः जिस शहर का नाम आपने अपने प्रोफाइल में चस्पाँ किया है उस शहर से मेरा अतीत भी नुमाया है. अतः इस बेबाकी से पूछ पा रहा हूँ. 

 

आपने मेरे लिखे को पसंद किया इस हेतु शुक्रगुज़ार हूँ.

 

सादर.

At 6:58pm on June 8, 2011, Admin said…
 
 
 

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