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neeraj commented on Aradhana's blog post अब तक
"एक बात कही थी याद है अब तकलहज़े-वह्ज़े याद नहींएक दर्द हुआ, एहसास है अब तकदिल या ज़हन में याद नहीं…"
Jan 15
neeraj commented on Aradhana's blog post दस्तक
"mousammmmmmmmm ak sundar chitrn prastut karne hetu badhai neeraj"
Jan 15
Aradhana replied to योगराज प्रभाकर's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३
"मन की बंद किताब पर, मौसम धरता धूलपन्ने-पन्ने याद हैं, तुम अक्षर, तुम फूल  ||5||   वही मौसम जो धूल डालता है, पलट कर याद भी वही दिला जाता है.. 'मद आँखों की राह' बहुत सुंदर शब्द चयन और व्यवस्था...बरबस ही ये पंक्तियाँ याद आ…"
Nov 10, 2011
Aradhana replied to योगराज प्रभाकर's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३
"वही तो चालाकी है के कह भी दिया उजागर भी ना हुए :-)))))))))"
Nov 10, 2011
Aradhana replied to योगराज प्रभाकर's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३
"साँस चली संजय भाई? :)))))))))))"
Nov 10, 2011
Aradhana replied to योगराज प्रभाकर's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३
"Sanjay ji, bahut shukriya... saadar."
Nov 10, 2011
Aradhana replied to योगराज प्रभाकर's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३
"अविनाश जी, आपका बहुत शुक्रिया, सादर, आराधना  "
Nov 10, 2011
Aradhana replied to योगराज प्रभाकर's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३
":-)))))))))"
Nov 10, 2011
Aradhana replied to योगराज प्रभाकर's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३
"मौसम का नव रूप सखे... बाँध कर ले जाते हैं आपके शब्द किनारे तक सौरभ जी, हार्दिक बधाई, "
Nov 10, 2011
Aradhana replied to योगराज प्रभाकर's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३
"आदरणीय योगराज जी,आपकी हर कहमुकरी पर दिल करता है कह दें 'हाँ सखी साजन''...क्या खूबसूरत चित्र बन जाते हैं और फिर मुकरना पड़ता है :-)बहुत ही सुंदर, हमेशा की तरह,"
Nov 10, 2011
Aradhana replied to योगराज प्रभाकर's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३
"आदरणीय सतीश जी,जेठ का तेवर तो हर तरह से डराता है...बहुत ही सुंदर रचना...हार्दिक बधाई,सादर,आराधना"
Nov 10, 2011
Aradhana replied to योगराज प्रभाकर's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३
"''मौसम सर्द हो गया रूठे क्यों...?''   मुख़्तसर सी बात है...हेमंत दा की याद आ गई त्रिपाठी जी, बहुत सुंदर.."
Nov 10, 2011
Aradhana replied to योगराज प्रभाकर's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३
"सिया जी, बहुत खूबसूरत...फ़ैज़ का कहा कुछ याद आ गया...मुलहज़ा फरमाईएगा. अब के तो खिज़ा ऐसी गुज़री, वो सारे ज़माने भूल गये, जब मौसम-ए-गुल हर शाखों पर आ-आ के दुबारा गुज़रे था.. सादर, आराधना"
Nov 10, 2011
Aradhana replied to योगराज प्रभाकर's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३
"धरम जी, बिल्कुल सटीक बात कही है खूबसूरत शब्दों के माध्यम से.   हम हैं जिन्हें कोयलों के स्वर से प्यार होता थाकमज़र्फ हैं, परिवेश अपने भयभीत कर लिए हैं   सही है, प्रकृति ने कुछ 'राशन' नही किया, हम सब की प्रवृत्ति ही भीरू हो गयी…"
Nov 10, 2011
Aradhana replied to योगराज प्रभाकर's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३
"सौरभ जी,आज ही शाम अपने बगीचे मे लगी चंपा, हरसिंगार को एक बार फिर आपके दोहे की नज़रों से देखूँगी..   चंपा चढ़ी मुँडेर पर, गद-गद हुआ कनेर झरते हरसिंगार बिन, बचपन हुआ कुबेर सबसे बेहतरीन दोहा..रंग, खुश्बू और कोमलता से 'कुबेर' कर गया..बहुत…"
Nov 10, 2011
Aradhana replied to योगराज प्रभाकर's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १३
"उठती गिरती लहरों की तरह आपकी कविता हबीब जी,बहुत सुंदर,"
Nov 10, 2011

Profile Information

Gender
Female
City State
NOIDA
Native Place
Darbhanga

Aradhana's Blog

दस्तक

Posted on October 11, 2011 at 9:00am 6 Comments

कब से देखा है,

याद भी नही तब से देखा है,
इस मौसम को आते हुए
 
एक पहचान सी है
एक मरासिम भी कायम है
फिर भी नायाब सा
किसी हसीन अजनबी की तरह
जेरे लब एक मुस्कुराहट छोड जाता  है
जब भी आता है 
 
मौसमों की भीड़ से गुज़र कर 
अचानक किसी सुबह
हरशिंगार की खुशबू से 
यूँ मन को भिगोता है  
कि फिर किसी मौसम का 
रंग नही चढ़ता…
Continue

संस्मरण (Reminiscence)

Posted on July 25, 2011 at 7:30pm 17 Comments

अभी कुछ दिनो पहले

बचपन के बीत जाने के बाद 
एक खेल खेला करते थे...
नाम छुपा कर अधरों पर
एक फूल संभाले हाथों   मे
बडी उम्मीद के साथ 
पंखुरियाँ तोड़ते हुए कहना,
'He loves me, he loves me not'
हारना  तो एक फूल और,
जीतते तो अनजाने ही 
रंग गुलनार!
तब कब समझा और कब जाना
के हर एक हासिल पर यूं  ही
सौ- सौ कुर्बानियाँ होंगी
बिखरे लम्हों…
Continue

अब तक

Posted on July 17, 2011 at 7:30pm 10 Comments

एक बात कही थी याद है अब तक

लहज़े-वह्ज़े याद नहीं

एक दर्द हुआ एहसास है अब तक

दिल या ज़हन में याद नहीं,



अक्सर यूँ होता है जब भी,

बात से बात उलझती है,

सोची हुई कहते हैं कुछ,

और कुछ तो यूँ ही फिसलती है

वो अन-सोची बातें ही दिल में,

रह जाती हैं क्या कहिये,

सोच-सोच कर जो भी कहा था

नापा-तौला याद नहीं,



जो साथ खड़े हो तुम मेरे,

तो इनती बात तो सच होगी,

जिस राह से तुम चल कर आये,

हमने भी वही तो चुनी होगी,

राहें वापस… Continue

Comment Wall (6 comments)

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At 3:35pm on October 12, 2011, mohinichordia said…

आराधना जी,मन को मोह लेती हैं आपकी रचनाएँ .बधाई 

At 8:26am on July 27, 2011, ved 'vyathit' said…

aaraadhna ji aabhr 

At 10:46pm on June 15, 2011, Ganesh Jee "Bagi" said…
At 3:39pm on June 15, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…
At 6:07pm on June 11, 2011, Saurabh Pandey said…

इस साहित्यिक जगत में आपका स्वागत है.

क्या आप मुझे जानते हैं? यदि ऐसा नहीं है तो कोई बात नहीं. प्रत्युत्तर मत दीजिएगा.

वस्तुतः जिस शहर का नाम आपने अपने प्रोफाइल में चस्पाँ किया है उस शहर से मेरा अतीत भी नुमाया है. अतः इस बेबाकी से पूछ पा रहा हूँ. 

 

आपने मेरे लिखे को पसंद किया इस हेतु शुक्रगुज़ार हूँ.

 

सादर.

At 6:58pm on June 8, 2011, Admin said…
 
 
 

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