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Afroz 'sahr'
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  • बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणिया राजेश कुमारी साहिबा को "सारस्वत सम्मान" तथा "अदब की आवाज़" सम्मान से नवाज़ा गया इस ख़ुशी के मौक़े पर में दिल की गहराईयों से आदरणिया राजेश कुमारी साहिबा को बहुत बहुत मुबारकबाद पेश करता हूँ।,,"
Wednesday
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"जनाब डा.छोटे लाल साहिब ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया,,"
Jan 13
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"जनाब अखिलेश कृष्ण साहिब ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया,,,"
Jan 13
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"तू दुनिया के सब दुख सहले तुझ को सुख मिल जाएगा। नफ़रत छोड़ महब्बत करले तुझको सुख मिल जाएगा।। जीवन आनी जानी छाया कौन सदा रहता जग में।  मिलजुल कर तू सबसे रहले तुझको सुख मिल जाएगा।। सबके दुख में शामिल होकर मार ग़मों के मुंह ठोकर। नेकी करके गर तू…"
Jan 13
dandpani nahak left a comment for Afroz 'sahr'
"आदरणीय अफरोज जी आदाब बहुत शुक्रिया आपने मेरी रचना पढ़ी मुझे अभी बहुत सीखना है आशा है आप मेरी इसी तरह मदद करेंगे"
Jan 10
Afroz 'sahr' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post प्रतिबंधित मुलाकात हुई है-ग़ज़ल
"जनाब पंकज जी हिफ़ाज़त "सौंपी" जाती है । सौंपा नहीं जाता,,,,वैसे आपने आपके हिसाब से सही बाँधा है तो कोई बात नहीं आप स्वतंत्र हैं ।,,,,,"
Jan 9
Afroz 'sahr' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post प्रतिबंधित मुलाकात हुई है-ग़ज़ल
"आदरणीय पंकज मिश्रा जी इस रचना पर बधाई स्वीकार करें। मतले के सानी मिसरे की तक़्तीअ को लेकर असमंजस है। कृपा कर स्पष्ट करें।5वें शेर में लफ़्ज़ "हिफ़ज़त" स्त्रीलिंग है।इसी शेर में लफ़्ज़ "आघात" पुल्लिंग है,,,,"
Jan 9
Afroz 'sahr' commented on SALIM RAZA REWA's blog post जो अपने माँ-बाप के - सलीम रज़ा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब इस रचना पर बधाई स्वीकार करें। मिसरा " ज़ख़्म ए दिल को कुछ तो दवा मिल जाएगा" में लफ़्ज़ "दवा" मुअन्नस अर्थात स्त्रीलिंग है। आपने पुल्लिंग बाँधा है। देखिएगा,,,"
Jan 9
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जनाब समर कबीर साहिब इस कामयाबी पर बहुत बहुत मुबारकबाद, अल्लाह आपको इसी तरह नवाज़ता रहे,,,आमीन,"
Jan 8
Afroz 'sahr' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - मुकम्मल भला कौन है इस जहां में
"जनाब राम अवध जी रदीफ़ की और प्रतिक्रिया देने के बाद ध्यान गया। शेर को यूँ कहा जा सकता है। "हैं महलों से बढ़कर के ये ख़ूबसूरत" "नज़र में तुम्हारी फ़कत झुग्गियाँ हैं""
Jan 6
Afroz 'sahr' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - मुकम्मल भला कौन है इस जहां में
"जनाब राम अवध जी इस रचना पर बधाई स्वीकार करें। मतले का ऊला मिसरा लय में नहीं है।दूसरे शेर को यूँ कहा जा सकता है। " हैं महलों से बढ़कर के घर अपने कच्चे" "कहां इनके जैसा कोई आशियां है" "खामियां" को ख़ामियां, "ज़िहादी…"
Jan 6
Afroz 'sahr' commented on SALIM RAZA REWA's blog post वज़्म ये सजी कैसी कैसा ये उजाला है - सलीम रज़ा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब इस रचना पर बधाई स्वीकार करें। "3 रे शे'र का ऊला मिसरा लय में नहीं है।4 थे शे'र में लफ़्ज़ "जगना" अशुध्द है। सही लफ़्ज़ "जागना" है। 5 वे शे'र मे "जहाँन ए" को "जहान ए"…"
Jan 5
Afroz 'sahr' commented on SALIM RAZA REWA's blog post मुश्क़िलों में दिल के भी रिश्ते - सलीम रज़ा
"जवाब सलीम रजा़ साहिब उम्दा कलाम मुबारकबाद कु़बूल करें।मतले के सानी मिसरे में काफ़िया "बेगाने" की मात्रा गिर रही है क्या ये अरूज़ सम्मत है।दूसरे शे'र में "चंद दिन" एब ए तनाफ़ुर है।6टे शेर में "अदायों" को अदाओं…"
Jan 3
Afroz 'sahr' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल इस्लाह के लिए :मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास साहिब इस रचना पर बधाई स्वीकार करें। गुणी जनों की बातों पर गौ़र फ़रमाएं,,,"
Jan 2
Afroz 'sahr' commented on SALIM RAZA REWA's blog post साथ तुम नहीं होते कुछ मज़ा नहीं होता- सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम रज़ा जी उम्दा कलाम बहुत बधाई आपको,,,"
Jan 2
Afroz 'sahr' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल -नये साल में कुछ नया कर दिखायें
"आदरणीय राम अवध जी बहुत ही उम्दा कलाम मजा़ आ गया"
Jan 2

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Male
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ujjain
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About me
contractor

Afroz 'sahr''s Blog

ग़ज़ल निकल गए आँसू,,,,

   2122  1212  22

दफ़अतन जो निकल गए आँसू।

सारे मंज़र बदल गए आँसू।।

लाख की कोशिशें छुपाने की।

राज़ दिल का उगल गए आँसू।।

इक ख़ुशी ने मुझे पुकारा है।

ये ख़बर सुन के जल गए आँसू।।

ख़ुश्क दामन तुझे बताऊँ क्या।

वो सबब जो सँभल गए आँसू।।

इत्तिफ़ाकन ही ख़ुश्क थीं पलकें।

इंतिकामन मचल गए आँसू।।

इक तबस्सुम जो आगया लब पर।

मारे ग़म के पिघल गए आँसू।।

कौन सा पल…

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Posted on December 24, 2017 at 11:00am — 11 Comments

ग़ज़ल,,,,इशारों का साथ दो,,,,,,,

221/2121/1221/212



है इख़्तियार तुमको बहारों का साथ दो।

लेकिन कभी तो दर्द के मारों का साथ दो।।



गर हैं निजात के लिए दरकार नेकियाँ।

डोली उठाने वाले कहारों का साथ दो।।



बाहम वो मिल सके न जो सारी हयात में।

मजबूर बेक़रार कनारों का साथ दो।।



तुम इन उदासियों की रिदाओं को चीर कर।

दिलकश हसीन शौख़ नजारों का साथ दो।।



ये वक़्त का तकाजा़ है दानाइ भी यही।

रक्खो ज़ुबान बंद इशारों का साथ दो।।



मिट्टी के ढेर हैं ये फ़कत और… Continue

Posted on December 4, 2017 at 1:36pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,भीगी पलकों पे कई ख़्वाब,,

2122/1122/1122/22/112



अश्क़ आँखों में यूँ बेताब हुआ करते हैं

भीगी पलकों पे कई ख़्वाब हुआ करते हैं।



जिनकी क़ीमत ही नहीं लोगों की नज़रों में कोई

रब की नज़रों में वो सुरख़ाब हुआ करते हैं।



जो भी रखते हैं बुज़ुर्गों की रिवायत का भरम

लोग दुनिया में वो नायाब हुआ करतें हैं।



ख़ुश्क फूलों की तरह मुझको समझने वालों

गुल में ख़ुश्बू के कई बाब हुआ करते हैं।



तुहमतें गैरों पे साज़िश की लगाने वाले

तेरे दुश्मन तेरे एहबाब हुआ करते… Continue

Posted on November 7, 2017 at 1:00pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,

1222/1222/1222/1222



जो सच हो ही नहीं सकता वो सपना छोड़ आया हूँ

में अपनी हसरतें सहरा में तंहा छोड़ आया हूँ।



ख़िरद ने जबसे जोड़ा है हक़ीकत से मेंरा रिश्ता

तख़य्युल को ख़लाओं में भटकता छोड़ आया हूँ।



ज़रूरत मुझको ले कर आ गई परदेस में लेकिन

में अपने घर में इक पुतला अना का छोड़ आया हूँ।



सबब जिसके हुए जाते थे अपने ही मेंरे दुश्मन

वो चाँदी छोड़ दी मैंने वो सोना छोड़ आया हूँ।



वो इक लम्हा जो गफ़लत में तेरी चाहत के बिन… Continue

Posted on October 17, 2017 at 7:30pm — 10 Comments

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At 5:25pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय अफरोज जी आदाब
बहुत शुक्रिया आपने मेरी रचना पढ़ी मुझे अभी बहुत सीखना है आशा है आप मेरी इसी तरह मदद करेंगे
At 2:29pm on September 12, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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