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AMIT
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AMIT commented on AMIT's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक आभार आदरणीय !"
Apr 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on AMIT's blog post ग़ज़ल
"बहुत ही खूब ग़ज़ल कही है आपने..बधाई आदरणीय"
Apr 9
AMIT commented on AMIT's blog post ग़ज़ल
"बहुत बहुत शुक्रिया सर !"
Apr 7
Samar kabeer commented on AMIT's blog post ग़ज़ल
"जनाब अमित जी आदाब,उम्द: ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Apr 7
AMIT commented on AMIT's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल पसंद करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय !"
Apr 5
Sushil Sarna commented on AMIT's blog post ग़ज़ल
"महकती है हमेशा ज़ीस्त यूँ भी कि सांसों में तेरा गजरा छुपा है आदरणीय अमित जी बहुत खूबसूरत अशआर बन पड़े हैं। दिल से बधाई।"
Apr 5
AMIT commented on AMIT's blog post ग़ज़ल
"अरे वाह्ह्ह मनोज भाई आप भी हैं यहाँ ,बहुत बहुत शुक्रिया भाई !"
Apr 4
Manoj kumar Ahsaas commented on AMIT's blog post ग़ज़ल
"बहुत खूब  स्वागत है अमित भाई"
Apr 3
AMIT posted a blog post

ग़ज़ल

ग़ज़ल मिलन की रात का लम्हा छुपा हैनज़र में बस तेरा चेहरा छुपा है दुआ लेकर निकलना रोज़ घर से यहाँ हर मोड़ पर ख़तरा छुपा हैलबों पर प्यास लेकर फिरने वालेतेरे अंदर भी इक दरिया छुपा हैमहकती है हमेशा ज़ीस्त यूँ भीकि सांसों में तेरा गजरा छुपा हैसनम मत जा अभी ख़्वाबों से मेरेअभी तो चाँद भी आधा छुपा है'अहद' लिखना न होगा बंद मेराअभी दिल में बहुत लावा छुपा है !मौलिक और अप्रकाशितSee More
Apr 3
AMIT commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post पथ के पथगामी-
"नमस्कार सर !"
Apr 3
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ग़ज़ल की कक्षा

इस समूह मे ग़ज़ल की कक्षा आदरणीय श्री तिलक राज कपूर द्वारा आयोजित की जाएगी, जो सदस्य सीखने के इच्‍छुक है वो यह ग्रुप ज्वाइन कर लें |धन्यवाद |See More
Nov 22, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर left a comment for AMIT
"आपका अभिनन्दन है. ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए  ग़ज़ल की कक्षा   ग़ज़ल की बातें    भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है | | | | | | | | आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ…"
Nov 15, 2015
AMIT is now a member of Open Books Online
Nov 15, 2015

Profile Information

Gender
Male
City State
SAHARANPUR
Native Place
MUZFFRABAD
Profession
BUSSINESS
About me
POET & Story writer

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ग़ज़ल

ग़ज़ल 

मिलन की रात का लम्हा छुपा है

नज़र में बस तेरा चेहरा छुपा है

 दुआ लेकर निकलना रोज़ घर से 

यहाँ हर मोड़ पर ख़तरा छुपा है

लबों पर प्यास लेकर फिरने वाले

तेरे अंदर भी इक दरिया छुपा है

महकती है हमेशा ज़ीस्त यूँ भी

कि सांसों में तेरा गजरा छुपा है

सनम मत जा अभी ख़्वाबों से मेरे

अभी तो चाँद भी आधा छुपा है

'अहद' लिखना न होगा बंद मेरा

अभी दिल में बहुत लावा छुपा है !

मौलिक और…

Continue

Posted on April 3, 2019 at 2:06pm — 7 Comments

ग़ज़ल

ग़ज़ल

वो न देगा दान मन्दिर के लिये

कुछ नहीं रब एक काफ़िर के लिये



लोग जिसकी शान में दिल से झुकें

ताज ऐसा चाहिए सिर के लिये



हौसला जिंदा रहे दिल में अगर

मुश्किलें क्या हैं मुसाफ़िर के लिये



इक पहेली बन गया है ऐ सनम

अक्स तेरा हर मुसव्विर के लिये



जाम,साकी,फूल ,तितली भूल जा

कुछ तो लिख तू दौरे हाज़िर के लिये



जिस्म ही वो चाहता है,दिल नहीं

प्यार है इक खेल शातिर के लिये



ज़ीस्त में कुछ तो कमा ले नेकियां

एक… Continue

Posted on September 28, 2017 at 6:45pm — 1 Comment

ग़ज़ल

ग़ज़ल

जीवन का मक़सद देखेगी

दुनिया तेरा कद देखेगी



खादी पहने इन गुंडों को

कब तक ये संसद देखेगी



फिरकापरस्ती बदनज़रों से

मस्जिद का गुम्बद देखेगी



सूखी धरती उम्मीदों से

बारिश की आमद देखेगी



तू हो चाहे जितना अच्छा

दुनिया तुझको बद देखेगी



दुनिया तेरी सब यादों को

मुझसे ही बरामद देखेगी



खून जवानों का यूँ बहते

कब तक ये सरहद देखेगी



गाँव अगर जाऊँ तो आँख

फिर सूखा बरगद देखेगी



करने… Continue

Posted on September 26, 2017 at 6:58pm — 8 Comments

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At 9:49pm on November 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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