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धार्मिक साहित्य Discussions (168)

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भजन - मेरे साईं ( अन्नपूर्णा बाजपेई )

  तेरी आँखों मे वो नूर है साई  जब भी विकल हो शरण मे आई  तूने संभाला है मुझको मेरे साईं  गले से हर बार तूने लगाया है साईं  मेरे साईं .......…

Started by annapurna bajpai

0 Apr 2, 2014

भजन.....हे! बजरंगी

भजन.....हे! बजरंगी हे! बजरंगी दया तुम्हारी, क्यों कर मुझ पर नही हुई।मैं आफत-विपदा का मारा, मेरी गल्ती कहॉं हुई।। सुबह सबेरे मैं नित उठ कर…

Started by केवल प्रसाद 'सत्यम'

0 Apr 1, 2014

सीतान्वेषी राम

छंद  -   मालिनीपरिभाषा -इस छंद के प्रत्येक  चरण में  १५ वर्ण  आठवे तथा  फिर सातवे वर्ण  पर विराम देकर होते हैं   i  प्रत्येक  चरण में दो नग…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

1 Mar 30, 2014
Reply by रमेश कुमार चौहान

'मामेकं शरणम् व्रज '

                छुधित  गरुण ने डैने फैलाये  I  एक लम्बी उड़ान भरी  I  नीचे हिमालय  का नीरव साम्राज्य था  I  अचानक उन्हें एक भयानक  भुजंग  दि…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

1 Nov 26, 2013
Reply by annapurna bajpai

नन्द लाला नन्द लाला

नन्द लाला  नन्द लाला नन्द लाला  नन्द लाला  नन्द लाला नन्द लाला ।जय हो आके दर्शन हमको अब दे दो दीन दयाला । जब से तुम हो गये मथुरा के महारा…

Started by बसंत नेमा

0 Nov 22, 2013

अनुरोध (कविता) अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव

                                                                           हेलो- हाय का अर्थ नहीं,  फिर भी कहते हैं हाय- हेलो। फोन,  मोबाइल…

Started by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव

0 Nov 11, 2013

" टेसू..उत्सव" लेख

मध्यप्रदेश के नर्मदांचल क्षेत्र, जो की पूर्वी निमाड़ व  मालवा से लगा हुआ है, में नवरात्रि के पश्चात्, विजयादशमी से लेकर शरद-पूर्णिमा तक एक उ…

Started by जितेन्द्र पस्टारिया

8 Oct 18, 2013
Reply by जितेन्द्र पस्टारिया

तू भगवती शारदे

हरिगीतिका छंद (चतुष्पदी मात्रिक छंद16,12 पर यति 5वी,12वी 19वी एवं 26वी मात्रा लघु पदांत गुरू) हे श्वेत हंस विराजनी मां, तू भगवती शारदे । त…

Started by रमेश कुमार चौहान

0 Oct 14, 2013

“ काली महिमा ”

“ काली महिमा ”    हे भवानी जय माँ दुर्गा हे काली अब दया करो । जगत जननी ममतामयी माँ पालनहारी कृपा करो ।। चारो तरफ है घोर अन्धेरा माँ अब तु…

Started by बसंत नेमा

0 Oct 9, 2013

‘दुर्गा सप्तश्लोकी स्तोत्र’ समस्त ओ बी ओ परिवार को नवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं

‘दुर्गा सप्तश्लोकी स्तोत्र’ को हिंदी में छंदबद्ध कर अनुवाद करने का प्रयास किया है माँ इस नादान की त्रुटियों को क्षमा करें जय हो माँ तुम्हार…

Started by SANDEEP KUMAR PATEL

2 Oct 8, 2013
Reply by SANDEEP KUMAR PATEL

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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
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"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
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"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
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Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
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Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
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Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
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