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धार्मिक साहित्य Discussions (168)

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भजन

भजन ..... बरसो रे घनश्याम तुम चाहो तो अपने आँसू करूं तुम्हारे नाम बरसो रे घनश्याम...... मन उपवन में अभिलाषा की सूख गयी है क्यारी जित देखूं…

Started by Abha saxena Doonwi

1 Aug 28, 2017
Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़')

श्रीकृष्ण-स्तुति-गीत(आधार छंद-चौपाई)

मोर-मुकुटधारी-अवतारी। हे नट-नर्तक -कृष्ण-मुरारी।। नयन-कंज तन नीलनलिन नव। वक्ष वृहद उर करुणा-गृह तव।। कानों मे मकराकृत कुंडल। अधर सुधा-मुरल…

Started by रामबली गुप्ता

1 Aug 28, 2017
Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़')

तुम्ही हो खेवइयाँ सबकी

दरबार सजा भक्तो से माँ, दर्शन आस जगाऊ मै। तेरे बिन माँ कौन सहारा, तुझमे आश्रय पाऊ मै। डूब रही पतवार हमारी, माया के भवसागर में। मोह पाश में…

Started by नाथ सोनांचली

1 Aug 28, 2017
Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़')

सदस्य टीम प्रबंधन

मकर-संक्रान्ति पर विशेष

  भारत वस्तुतः गाँवों का देश है. यहाँ के गाँव प्रकृति और प्राकृतिक परिवर्त्तनों से अधिक प्रभावित होते हैं, बनिस्पत अन्य भौतिक कारणों से. च…

Started by Saurabh Pandey

31 May 4, 2016
Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़')

गणेश वंदन (त्रिभंगी छंद)

हे गौरी नंदन, प्रभु सुख कंदन, हे विघ्न हरण, भगवंता ।गजबदन विनायक, शुभ मति दायक, हे प्रथम पूज्य, इक दंता ।।हे आदि अनंता, प्रिय भगवंता, रिद्…

Started by रमेश कुमार चौहान

0 Aug 13, 2015

दोहा -वंशी

दोहा -----मुरली धर मुरली बजा , गोकुल होत अधीर। राधा रानी चल पड़ीं , पहुँचत यमुना तीर । । भौरे फुस फुस कर रहे , फूलों डारे कान । राधा रानी आ…

Started by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA

0 Jul 14, 2015

शिव की पूजा करले प्राणी

शिव की पूजा करले प्राणी  शिव ही सृष्टि निर्माता है शिव लेते है उसी भाव को भाव जो मन में आता है |   सती, पार्वती, गौरी, माता शिव  के  हर  दम…

Started by sakhi singh

0 Dec 10, 2014

आये न श्याम !

                  आये न श्याम  !     कैसे करूं मनुहार                                  सखी, थके नैना पंथ निहार                             …

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

0 Nov 3, 2014

माँ के चरणों में - २

छन्न पैकैंया छन्न पकैंया जाना है बड़ी दूर |चलते-चलते पांव थक गये, मंजिल है बड़ी दूर || छन्न पैकैंया छन्न पकैंया, माँ बैठी चोटी पर |दर्शन को त…

Started by Meena Pathak

2 Oct 6, 2014
Reply by Meena Pathak

नव दुर्गा

नव दुर्गा भक्ति नवधा से समाहित, शुद्ध हो आराधना।  योग शुभ नवरात्रि मन की, पूर्ण करता कामना। ।  माँ बड़ी कल्याणकारी, यह जगत अवधारना।  आज आओ…

Started by Satyanarayan Singh

0 Oct 2, 2014

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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
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Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
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Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
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Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
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आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
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Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
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सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
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कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
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हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
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Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
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Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
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दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
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