For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय साथियो,

सादर नमन।
.
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-113 में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-113
विषय : साथी/जीवन साथी
अवधि : 30-08-2024 से 31-08-2024 
.
अति आवश्यक सूचना:-
1. सदस्यगण आयोजन अवधि के दौरान अपनी केवल एक लघुकथा पोस्ट कर सकते हैं।
2. रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना/ टिप्पणियाँ केवल देवनागरी फॉण्ट में टाइप कर, लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड/नॉन इटेलिक टेक्स्ट में ही पोस्ट करें।
3. टिप्पणियाँ केवल "रनिंग टेक्स्ट" में ही लिखें, 10-15 शब्द की टिप्पणी को 3-4 पंक्तियों में विभक्त न करें। ऐसा करने से आयोजन के पन्नों की संख्या अनावश्यक रूप में बढ़ जाती है तथा "पेज जम्पिंग" की समस्या आ जाती है। 
4. एक-दो शब्द की चलताऊ टिप्पणी देने से गुरेज़ करें। ऐसी हल्की टिप्पणी मंच और रचनाकार का अपमान मानी जाती है।आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है, किन्तु बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पाए इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है। देखा गया कि कई साथी अपनी रचना पोस्ट करने के बाद गायब हो जाते हैं, या केवल अपनी रचना के आस पास ही मंडराते रहते हैंI कुछेक साथी दूसरों की रचना पर टिप्पणी करना तो दूर वे अपनी रचना पर आई टिप्पणियों तक की पावती देने तक से गुरेज़ करते हैंI ऐसा रवैया कतई ठीक नहींI यह रचनाकार के साथ-साथ टिप्पणीकर्ता का भी अपमान हैI
5. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति तथा गलत थ्रेड में पोस्ट हुई रचना/टिप्पणी को बिना कोई कारण बताये हटाया जा सकता है। यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
6. रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका, अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल/स्माइली आदि लिखने/लगाने की आवश्यकता नहीं है।
7. प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार "मौलिक व अप्रकाशित" अवश्य लिखें।
8. आयोजन से दौरान रचना में संशोधन हेतु कोई अनुरोध स्वीकार्य न होगा। रचनाओं का संकलन आने के बाद ही संशोधन हेतु अनुरोध करें। 
.    
यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सकें है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.
.
.
मंच संचालक
योगराज प्रभाकर
(प्रधान संपादक)

Views: 628

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

स्वागतम

सादर अभिवादन आदरणीय..

अपने अपने उसूल - लघुकथा - 

दीक्षित जी की लड़की पढ़ने लिखने में बहुत तेज थी अतः उसे परिवार वालों ने कुछ ज्यादा ही छूट दे रखी थी।नतीजन वह निजी मामलों में लगभग निरंकुश हो चुकी थी। वह व्यक्तिगत कार्यों में घर के किसी भी सदस्य का हस्तक्षेप पसंद नहीं करती थी, चाहे वे माँ बाप हों या बड़ा भाई हो। 

अब स्थिति ये हो चुकी थी कि घर का हर सदस्य उसके हर झमेले से बचने की चेष्टा करता था।  

और अब तो वह पढ़ लिख कर अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी थी।सरकारी अफ़सर बन चुकी थी।

लेकिन समस्या यह थी कि पढ़ाई लिखाई के चक्कर में विवाह की उम्र कब निकल गई, पता ही नहीं चला। 

जब रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने मां बाप को याद दिलाना शुरु किया कि,"बेटी तीस पार कर गई है। क्या शादी ब्याह नहीं करना है ?" 

माँ बाप को एक झटका सा लगा। तुरंत माँ बाप ने परिवार के लोगों से विचार विमर्श कर एक ड्राफ़्ट तैयार किया ताकि कुछ मशहूर समाचार पत्रों में विज्ञापन दिया जा सके।

माँ ने सलाह दी कि विज्ञापन देने से पहले एक बार बेटी को भी दिखा लो। 

सब ने एक मत से इस कार्य के लिये माँ को ही जिम्मेदारी दे दी। 

माँ ने भी सहर्ष इस कार्य की हामी भर ली। 

जैसे ही माँ ने यह कागजात बेटी को दिखाये। बेटी ने माँ की तसल्ली के लिये तुरंत वे कागजात अपने बैग में रख लिये। और माँ को आश्वस्त किया कि वह आज ही अपने परिचित  तीन चार अखबार वालों को यह विज्ञापन दे देगी ।

अगले दिन जब परिवार ने अख़बार में शादी का विज्ञापन देखा, तब से ही सारा परिवार सदमे में है।   

उस विज्ञापन के अंत में एक विशेष नोट लिखा था।

जो लोग स्त्री की पवित्रता में विश्वास करते हों वे लोग कृपया इस विज्ञापन पर आवेदन नहीं करें।" 

मौलिक एवं अप्रकाशित

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। अच्छी लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी।

आदाब। प्रदत्त विषयांतर्गत एक गंभीर और चुनौतीपूर्ण मुद्दे और विसंगति पर बढ़िया प्रस्तुति और गोष्ठी के आग़ाज़ हेतु हार्दिक बधाई मुहतरम जनाब तेजवीर सिंह साहिब। पाठक को झकझोर कर रख दिया। एक साथ कई ज्वलंत विचार उत्पादक कथ्य। हालाॅंकि अभी यह ऐसा ड्राफ्ट है, जिसमें अधिक समय देकर निखार लाया जा सकता है। दरअसल विवरणात्मक अधिक हो गया है। परिवार के किसी सदस्य, मॉं और बेटी के बीच एक-दो प्रभावशाली संवाद बुने जा सकते हैं। लेकिन अपनी -अपनी शैली व लेखनी की बात भी है। शीर्षक बढ़िया है।(अपने-अपने उसूल)। समापन वाक्य झकझोरने वाला है लेकिन इसमें शब्द 'पवित्रता' बहुआयामी है; 'हृदय की पवित्रता' या 'शरीर की पवित्रता' या 'कुॅंवारेपन का प्रमाण' ? मेरे विचार से समापन पंचपंक्ति इस प्रकार की होनी चाहिए:

//रिश्ते के लिए कृपया वे पुरुष कतई आवेदन न करें, जो स्त्री के जीववैज्ञानिक कुॅंवारेपन (वर्जिनिटी) के प्रमाण पर ही विश्वास रखते हों!"//

हार्दिक आभार आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी। आपके सुझाव एवं सलाह उत्तम हैं और गौर करने योग्य हैं।मै अवश्य इन पर मनन करुंगा। लघुकथा का उद्देश्य एक गंभीर सामाजिक बुराई को रेखांकित करना है। जिसका मुख्य कारण अंधविश्वास और रूढ़िवादी विचारधारा है। इस कारण कई परिवार टूट जाते हैं।पवित्रता के मामले में अधिक खुल कर मैंने जानबूझ कर नहीं लिखा।क्योंकि यह विषय नारी सम्मान से जुड़ा है।वैसे भी लघुकथा में कुछ अनकहा होना भी एक परम्परा है।सादर।

आदरणीय तेजवीर सिंह जी इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर

अमर प्रेम

सहोदरी अपने ऑफिस के साथी कर्मचारी को शादी की बधाई देते हुये उसकी शादी का कार्ड खोलकर देखने लगी।कार्ड में छपे राधा- कृष्ण की तस्वीर देख उसके अंदर के दुःख का दरिया उमड़ पड़ा। सजल हुई ऑखों में बिछड़े प्रेम से जुड़ी यादें तैर गई।

वो और उसके पड़ोस में रहने वाला बचपन का दोस्त समर .. साथ खेलते, पढ़ते हुये कब बड़े हो गये पता ही नहीं चला।आजन्म साथ निभाने के वादे करते हुये भविष्य बनाने अपनी-अपनी राह चल पड़े। 

नर रूप में नारायण सेवा करने सहोदरी ने चिकित्सक बनने और देश सेवा के लिए समर सेना में भर्ती हो गया।

जन्मों के बंधनों में देश सेवा आड़े आ गई।अकस्मात् छिड़े युद्ध बुलावा आ गया। परिजनों की भावनाओं से सर्वोपरि देश सेवा का मार्ग समर ने चुना।

जाते हुये सहोदरी से जल्दी लौटकर आने का वादा करते हुये कहा अपना वादा निभाने जल्दी ही लौटकर आऊंगा….उसके गले लगते हुये सहोदरी ने  मौन स्वीकृति देते हुये उसकी ऑखें भर आई।

अपने साथी की आवाज से सहोदरी चेती। सहोदरी कार्ड मे टपके ऑंसू को पोछते हुये मुस्करा उठी मैं भी तो अपने मोहन की राधा….!

स्वरचित व अप्रकाशित 

बबीता गुप्ता 

आदाब। विषयांतर्गत देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की महानता और मार्मिकता का कथ्य समेटते हुए सच्चे प्रेम की भावपूर्ण रचना हेतु हार्दिक बधाई आदरणीया बबीता गुप्ता जी। शादी के कार्ड खोलते हुए दिल को

 के कार्ड/परतें खोलने फ्लैशबैक का बढ़िया प्रयोग। लेकिन सब कुछ कह दिया गया है। कुछ अनकहा भी हो, संवाद भी हों, तो रचना में निखार आ सकेगा। अभी रचना की बेहतर शैली और बेहतर भाषा शैली पर समय दिया जा सकता है मेरे विचार से। सादर 

हार्दिक बधाई आदरणीया बबीता गुप्ता जी। बहुत खूबसूरत लघुकथा ।

आ. बबीता बहन सादर अभिवादन।अच्छी कथा हुई है। हार्दिक बधाई।

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"आदरणीय अमिताजी, हार्दिक बधाइयाँ    प्रस्तुति में रचनात्मकता के साथ-साथ इसके प्रस्तुतीकरण…"
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद  छंद की अंतिम दोनों पंक्तियों की…"
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक मार्मिक भावदशा को शाब्दिक करने का सार्थक प्रयास हुआ है, आदरणीया अमिता तिवारीजी. आप सतत अभ्यासरत…"
11 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"शुक्रिया आदरणीय सर जी। डाउनलोड करने की उस व्यवस्था में क्या हम अपने प्रोफाइल/ब्लॉग/पन्ने की पोस्ट्स…"
13 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अभी प्रश्न व्यय का ही नहीं सक्रियता और सहभागिता का है। पोर्टल का एक उद्देश्य है और अगर वही डगमगा…"
14 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जैसा कि ज्ञात हुआ है कि संचालन का व्यय प्रतिवर्ष 90 हज़ार रुपये आ रहा है। इस रकम को इतने लंबे समय तक…"
17 hours ago
Admin replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"लगभग 90 हजार प्रति वर्ष"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सादर नमस्कार और आदाब सम्मानित मंच। ओबीओ के वाट्सएप समूह से इस दुखद सूचना और यथोचित चर्चा की जानकारी…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय, ओ.बी.ओ. को बंद करने का निर्णय दुखद होने के साथ साथ संचालक मण्डल की मानसिक पराजय, थकान आदि…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"नीचे आए हुए संदेशों से यह स्पष्ट है कि अब भी कुछ लोग हैं जो जलते शहर को बचाने के लिए पानी आँख में…"
Monday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय जी  ओबीओ को बन्द करने की सूचना बहुत दुखद है । बहुत लम्बे समय से इसके साथ जुड़ा हूँ कुछ…"
Monday
pratibha pande replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओबीओ से पिछले बारह साल से जुड़ी हूँ। इसके बंद हो जाने की बात से मन भारी हो रहा है।मेरे कच्चे-पक्के…"
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service