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मुक्तक -कोरोना

किसी की जां पे बन आई, किसी को खेल कोरोना
नहीं मुश्किल, बहुत आसान अपने 'हाथ ही धोना'

कि छोटी-छोटी बातों को रखो तुम ध्यान में अपने
रहेगा दूर फिर हमसे विदेशी रोग का रोना

चलो छोड़ो गले मिलना,'नमस्ते' ही को अपनाओ
बढ़ाओ अपनी क्षमता और 'शाकाहार' ही खाओ
कि 'चुन्नी और गमछा' ही बहुत हैं मुंह को ढकने को
हमारी संस्कृति आला इसे उपयोग में लाओ

पूनम माटिया

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Comment by Poonam Matia on April 9, 2020 at 11:33pm

धन्यवाद  @सूबे सिंह जी ........ कोरोना पर काफ़ी कुछ लिख डाला हाल ही में

Comment by सूबे सिंह सुजान on March 22, 2020 at 10:27pm

पूनम माटिया जी करोना पर अच्छी रचना हुई है बहुत बहुत बधाई हो 

Comment by Poonam Matia on March 19, 2020 at 1:57am

नमस्कार ! बहुत समय बाद ओ बी ओ में कुछ नया पोस्ट किया | आ.@लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी और आ.समर कबीर जी आपके द्वारा मिले प्रोत्साहन-पुष्पों  के लिए हृदयतल से आभार

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 17, 2020 at 7:42am

आ. पूनम जी, सादर अभिवादन । वर्तमान परिप्रेक्ष में अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on March 15, 2020 at 11:59am

मुहतरमा पूनम मटिया जी आदाब, मुक्तक का अच्छा प्रयास हुआ है, बधाई स्वीकार करें ।

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