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मन-भावक इतिहास - डॉo विजय शंकर

अच्छा लगता है
पुरखों को याद करना ,
उनकीं कथाएं , उनकीं उब्लब्धियाँ ,
सुनना और बयान करना ॥
एक गौरवपूर्ण अतीत और
उसकी सुनहरी स्मृतियाँ ॥
और , सुन्दर सपने देखना ,
फिर कोई भगीरथ आएगा
गंगा क्या , इस बार स्वर्ग ही
धरती पर उतार लाएगा ॥
अभी से दलाल या ठेकेदार
ढूँढ लो , उसके संपर्क में रहो,
स्वर्ग का टिकट वही न दिलाएगा ॥


मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Dr. Vijai Shanker on December 1, 2014 at 11:14am
आदरणीय डॉo गोपाल नारायण जी आपकी पारखी नज़र को नमन एवं धन्यवाद।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 1, 2014 at 10:10am

व्यंग भी है  i पीड़ा भी है i सन्देश भी है i क्या त्रिवेणी  बहाई है सर !

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 29, 2014 at 9:00am
आपकी बधाई के लिए ह्रदय से बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय हरी वल्लभ शर्मा जी।
Comment by harivallabh sharma on November 28, 2014 at 11:42pm

बहुत सटीक व्याख्या आज के मानव की मानसिकता की...बधाई उत्कृष्ट सृजन हेतु आदरणीय Dr.Vijai Shanker जी.

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 27, 2014 at 11:07pm
प्रिय जिजेन्द्र जी , सच्चा लिखा और अच्छा लिखा , सच्चा है और अच्छा भी है , लोग मान लेंगें ?
आपके ह्रदय के उदगार हैं , आदरणीय हैं , बधाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 27, 2014 at 11:03pm
आपको रचना पसंद आई , रचना की यही सार्थकता है , आदरणीय राजेश कुमारी जी बधाई के लिए ह्रदय से धन्यवाद , सादर।
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on November 27, 2014 at 10:56pm

बहुत अच्छा और सच्चा लिखा, सर. मन को सुकून मिलता है आपकी रचनाओं को पढने पर

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 27, 2014 at 10:44pm
चोट करना मकसद नहीं है , हाँ , शायद वो भी जागें कभी , बस एक कोशिश है, आदरणीय गणेश जी बागी जी , आपकी बधाई के लिए ह्रदय से सादर धन्यवाद।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 27, 2014 at 10:39pm
रचना को मान देने के लिए ह्रदय से सादर धन्यवाद आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 27, 2014 at 10:37pm
बात सिर्फ स्वर्ग के टिकट खरीदने तक सीमित नहीं है , हम्मे तो एक ऐसी संस्कृति का सृजन कर डाला है जहां सब कुछ खरीदना पड़ रहा है , जिन्हें मुहय्या कराने की जिम्मेदारी है वही उसे बेंच रहे हैं। बधाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी , सादर।

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