For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अचानक याद आया --- डॉo विजय शंकर

कहते हैं गुलाब के साथ
कांटे जरूर होते हैं ,
पर कुदरत ने जीता जागता एक गुलाब ,
ऐसा भी बनाया है कि बनाने वाले की माया
कोई समझ नहीं पाया है,
उसको काँटों से बिलकुल मुक्त बनाया है,
इसे कुदरत की मेहरबानी कहें या नाइंसाफी ,
जो जिंदगी देती हैं उसकी ही जिंदगी को
इस कदर कमजोर बनाया है,
हद हो गयी आदमी ने इसी का
हर तरह से बस फायदा ही उठाया है ,
मर्द होने की अपनी जिम्मेदारियों को
बस यह कह कर निभा दिया है ,
कि हमने मेमने को बता दिया ,
घर में रहो , बाहर निकलो ही क्यों ,
कपड़े कैसे पहनो,पढ़ो क्यों, बोलो क्यों ,
छुप जाओ , छुप जाओ, छुप जाओ ,
कभी कहीं , घर में या बाहर,
भेड़िये मिलें और झपट ही पड़े तो
भेड़ियों को हरा देने को बता दिया है ,
हमने मेमने को ये बता दिया ,
हमने उसे वो बता दिया ,
हमने उसे भेड़िये से खुद को
बचा लेने को बता दिया ,
हमने उसे जान बचा लेने का हक़ दिया है,
हमने उसे ये भी बता दिया है।

मौलिक एवं अप्रकाशित
एवं सामयिक।

Views: 527

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 10, 2015 at 8:11pm
आपको पसंद आई , आभार , आदरणीय महर्षि त्रिपाठी जी , सद्भावनाओं के लिए धन्यवाद , सादर
Comment by maharshi tripathi on March 10, 2015 at 7:31pm

बहुत बहुत बधाई आ.विजयशंकर जी ,,,काफी गहराई है आपकी कविता में |

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 8, 2015 at 1:06pm
प्रिय जीतेन्द्र जी ,रचना आप को पसंद आई, उसे सार्थकता मिली, आभार, आपकी बधाई के लिए ह्रदय से धन्यवाद , सादर।
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 8, 2015 at 11:04am

बहुत गहन व् सारगर्भित प्रस्तुति, आदरणीय डा.विजय जी. बधाई स्वीकारें

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 7, 2015 at 7:00pm
आदरणीय सोमेश जी , आपकी पकड़ बिलकुल सही है , विषय वहीँ से लिया गया है , प्रस्तुति को सार्वजनीय बनाया गया है , आपकी सद्भावनाओं के लिए आभार एवं धन्यवाद, सादर।
निवेदन है कि क्या नागार्जुन जी की पंक्तियों को आप मेरे इनबॉक्स में भेज सकेंगें , सादर।
Comment by somesh kumar on March 6, 2015 at 11:24pm

जहाँ तक मुझे लगता है निर्भया कांड पे आने वाली डोक्युमेंटरी और उसमें जाहिर की गई भावना को आप ने गुलाब के माध्यम से शब्द दिए हैं |समसामयिक विषय पर इस प्रकार लिखना आपकी रचना की जीवन्तता का परिणाम है |अभी नागर्जुन दादा को पढ़ रहा था कुछ-कुछ वैसी ही सीधी सरल भाषा है इस कविता की --बधाई 

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on March 5, 2015 at 10:16pm

मुबारक हो, मुबारक हो ॥

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 5, 2015 at 10:12pm
बहुत बहुत आभार आपका , आदरणीय विजय प्रकाश शर्मा जी, रचना को स्वीकृति प्रदान करने के लिए , आपसे काफी समय बाद संपर्क हुआ , आपकी सद्भावनाओं के लिए भी ह्रदय से धन्यवाद,
होली पर मैंने इसी मौच पर यूँ भी कलम चलाई है , आपको सादर ,
आई होली , होली आई ,
होली शुभ हो ,
भरपूर रंग हो , गुलाल हो,
दिलकश छींटे हों , बौछार हो,
उमंग हो, सुरूर हो , खुमार हो,
बहार हो, दुलार हो , प्यार हो ,
प्यार ही प्यार हो , रंगीन प्यार हो,
शोख़ियाँ हों , शेखियाँ हों ,
ऊँची-ऊँची उमंगें हों ,
रंग हो , तरंग हो,
चाहें जिसे , उसी का संग हो,
मुबारक हो, मुबारक हो ॥
होली सभी को मुबारक हो ,
Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on March 5, 2015 at 10:02pm

आ. डॉ विजय शंकरजी!
अत्यंत समसामयिक एवम सारगर्भित प्रस्तुति पर अनगिनत बधाई ,आपने होली में यह तूफानी कलम चलाई।

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 5, 2015 at 9:54pm
आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी, आभार , रचना आपको पसंद आई, आपकी सद्भावनाओं के लिए बहुत बहुत धन्यवाद , सादर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी , सुझाव और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।  चौपाई विधान में 121…"
20 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय भाईजी  चौपाई की मुक्त कंठ से प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार । चौपाई विधान में…"
29 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"शब्द बाण…"
45 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक जी, रचना/छंदों पर अपनी राय रखने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।  //तोतपुरी ... टंकण…"
8 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"ग़ज़ल को इतना समय देने के लिए, शेर-दर-शेर और पंक्ति-दर-पंक्ति विस्तार देने के लिए और अमूल्य…"
8 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय,  आपका कोटिश: धन्यवाद कि आपने विस्तृत मार्ग दर्शन कर ग़ज़ल की बारीकियाँ को समझाया !"
8 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय नमस्कार, आपने  अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया दी बहुत शुक्रिया। ग़म-ए-दौलत से मेरा इशारा भी…"
10 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  आदरणीय अजय गुप्ता अजेय जी सादर, प्रथम दो चौपाइयों में आपने प्रदत्त चित्र का सुन्दर वर्णन…"
19 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर नमस्कार,  प्रदत्त  चित्र पर आपने सुन्दर चौपाइयाँ…"
20 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"दिल रुलाना नहीं कि तुझ से कहें हम ज़माना नहीं कि  तुझ से कहें । अच्छा शेर हुआ। ज़माना तो…"
20 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"वो तराना नहीं कि तुझ से कहें आशिक़ाना नहीं कि तुझ से कहें । यह शेर कहता है कि यह तराना आशिक़ाना…"
20 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"यह मेरी बेध्यानी का परिणाम है, मुझे और सतर्क रहना पड़ेगा। "
21 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service