For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गीतिका .....8 + 8---निगाहें

आँज गगन का नील निगाहें

लगती गहरी झील  निगाहें

 

माँस बदन पर दिख जाये तो

बन जाती है चील निगाहें

 

आन टिकी है मुझ पर सबकी

चुभती पैनी कील निगाहें

 

बंद गली के उस नुक्कड़ पर

करती है क्या डील निगाहें

 

इक पल में तय कर लेती है

यार हज़ारों मील निगाहें

 

बाँध सकेगा मन क्या इनको

देती मन को ढील निगाहें

 

दिखने दे ‘खुरशीद’ नज़ारे

किरणों से मत छील निगाहें 

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 788

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by khursheed khairadi on February 23, 2015 at 10:36am

आदरणीय गोपालनारायण सर ,आदरणीय गिरिराज सर , आदरणीया परी जी ,आदरणीया प्रतिभा जी ,आदरनिये सुशील सर जी,आदरणीय दिनेश जी ,आप सभी का हार्दिक आभार |दिनेश भाई  नील=नीला रंग (संस्कृत\पुर्लिंग), आँजना=अंजन लगाना ,,मेरा भाव यह था कि ''नायिका की आँखें गगन का नीला रंग आँज कर किसी गहरी झील के सदृश्य हो गई है "  कुछ अच्छे शेर पहले हुये थे बाद में मतला कहा  गया था, इस कारण प्रयास में कुछ कमी रही हो |एक बार  पुनः स्नेह बरसाए |सादर आभार | 

Comment by दिनेश कुमार on February 22, 2015 at 7:17am
बेहतरीन ग़ज़ल हुई हैआदरणीय खुर्शीद भाई जी, सिर्फ पहला मिसरा मुझे नहीं समझ आया, बाकी सभी Top class...वाह वाह वाह
Comment by Sushil Sarna on February 19, 2015 at 7:31pm

आँज गगन का नील निगाहें
लगती गहरी झील निगाहें

माँस बदन पर दिख जाये तो
बन जाती है चील निगाहें

नमन आपकी लेखनी को आदरणीय .... हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 19, 2015 at 1:21pm

आ० खैरादी जी

इतनी उम्दा गजल कौन लिख सकता  है i मतले ने ही मन मोह लिया- आँज गगन का नील निगाहें i   शायद  'का ' शब्द में   टंकन त्रुटि  है i  पूरी गजल लाजवाब i शानदार i पुरअसर i  सादर i

Comment by Pari M Shlok on February 19, 2015 at 12:00pm
माँस बदन पर दिख जाये तो

बन जाती है चील निगाहें

बंद गली के उस नुक्कड़ पर

करती है क्या डील निगाहें
निगाहों का सुन्दर विश्लेषण ... नज़रो को कितने रंगो में ढाल पेश किया आपने ..कमाल लिखा वाह

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 19, 2015 at 10:32am

आदरणीय खुर्शीद भाई , बहुत सुन्दर गज़ल हुई है , काफिया भी बड़ा कठिन  लगा मुझे , पर आपने खूबसूरती से  निबाह लिया है ॥ आपकओ हार्दिक बधाइयाँ ॥

माँस बदन पर दिख जाये तो

बन जाती है चील निगाहें

 

आन टिकी है मुझ पर सबकी

चुभती पैनी कील निगाहें  --- दोनो अशार  बेहद पसंद आये ॥ बधाई , आदरणीय ।

 

Comment by khursheed khairadi on February 19, 2015 at 10:01am

आदरणीय विजयशंकर सर ,आदरणीय हरिप्रकाश सर ,आप महानुभवों का स्नेह सतत अच्छा लिखने को प्रेरित करता है |सादर आभार |

Comment by khursheed khairadi on February 19, 2015 at 9:59am

आदरणीय मिथिलेश जी ,सराहना के लिए हृदय से आभार |आपकी तरही ग़ज़ल काफ़ी सुन्दर बनी है |मूल ग़ज़ल को भावों को अधिक विस्तार देती हुई है |तरही मिसरा कील के अर्थ को अधिक मर्म के साथ प्रस्तुत कर रहा है |हार्दिक बधाई |सादर आभार |

कोमल दिल को रोज डराती 

"चुभती पैनी कील निगाहें"

Comment by khursheed khairadi on February 19, 2015 at 9:54am

आदरणीय कबीर साहब ,गीतिका आपको भायी ,इसके लिए हृदय से आभार |मतला वाकई ढीला लग रहा है ,अगर इसे यूं रखूं 

आँज गगन का नील निगाहें 

लगती गहरी झील निगाहें 

इस मतले पर आपका आशीर्वाद चाहूँगा |सादर |

Comment by khursheed khairadi on February 19, 2015 at 9:51am

आदरणीया राजेश कुमारी जी ,गीतिका आपको पसंद आयी इसके लिए हृदय से आभार ,स्नेह बनाय रखियेगा |सादर |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"आदरणीय अमिताजी, हार्दिक बधाइयाँ    प्रस्तुति में रचनात्मकता के साथ-साथ इसके प्रस्तुतीकरण…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद  छंद की अंतिम दोनों पंक्तियों की…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक मार्मिक भावदशा को शाब्दिक करने का सार्थक प्रयास हुआ है, आदरणीया अमिता तिवारीजी. आप सतत अभ्यासरत…"
8 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"शुक्रिया आदरणीय सर जी। डाउनलोड करने की उस व्यवस्था में क्या हम अपने प्रोफाइल/ब्लॉग/पन्ने की पोस्ट्स…"
10 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अभी प्रश्न व्यय का ही नहीं सक्रियता और सहभागिता का है। पोर्टल का एक उद्देश्य है और अगर वही डगमगा…"
11 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जैसा कि ज्ञात हुआ है कि संचालन का व्यय प्रतिवर्ष 90 हज़ार रुपये आ रहा है। इस रकम को इतने लंबे समय तक…"
14 hours ago
Admin replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"लगभग 90 हजार प्रति वर्ष"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सादर नमस्कार और आदाब सम्मानित मंच। ओबीओ के वाट्सएप समूह से इस दुखद सूचना और यथोचित चर्चा की जानकारी…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय, ओ.बी.ओ. को बंद करने का निर्णय दुखद होने के साथ साथ संचालक मण्डल की मानसिक पराजय, थकान आदि…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"नीचे आए हुए संदेशों से यह स्पष्ट है कि अब भी कुछ लोग हैं जो जलते शहर को बचाने के लिए पानी आँख में…"
Monday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय जी  ओबीओ को बन्द करने की सूचना बहुत दुखद है । बहुत लम्बे समय से इसके साथ जुड़ा हूँ कुछ…"
Monday
pratibha pande replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओबीओ से पिछले बारह साल से जुड़ी हूँ। इसके बंद हो जाने की बात से मन भारी हो रहा है।मेरे कच्चे-पक्के…"
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service