For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो (ग़ज़ल)

बह्र : २२ २२ २२ २२ २२ २२ २

जब चाहें तब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो

दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो

ये दुनिया बेहतर हो दिन भर ऐसे काम करें 

फिर सारी शब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो

अट्ठारह घंटे खटते जो पूँजी की ख़ातिर

अपने साहब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो

जैसे बचपन में करते थे बिन सोचे समझे 

फिर बेमतलब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो

नफ़रत का विष पी-पीकर जो जॉम्बी बन फिरते

वो भी यारब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो

‘सज्जन’ इक दिन सदियों की नफ़रत से तंग आकर 

सारे मज़हब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो

--------------------

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 132

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on January 28, 2020 at 3:11pm

जनाब धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।

'अपने साहब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो'

इस मिसरे में क़ाफ़िया दोष है,सहीह शब्द है "साहिब",देखियेगा 

Comment by Shyam Narain Verma on January 22, 2020 at 8:11pm
आदरणीय धर्मेंद्र सिंह जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर
Comment by Manoj kumar Ahsaas on January 21, 2020 at 7:30pm

बड़ी रदीफ़ क्या आपने अच्छी गजल पेश की है मित्र हार्दिक शुभकामनाएं

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 21, 2020 at 6:47am

वाह..वाह..क्या कहने

इस बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई, आ. भाई सर्मेन्द्र जी ..

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"मुहतरम जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और पसंदगी के इज़हार और हौसला…"
1 minute ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय अनिल कुमार सिंह जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत…"
5 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"जनाब लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद, पसन्दगी और त्रुटियों की ओर ध्यानाकर्षित कराने…"
9 minutes ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय सलिक गणवीर जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें। दूसरे में 'गई' के बदले चुकी…"
12 minutes ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय मुसाफ़िर जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई . गिरह ख़ूब लगा "
17 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"बहन डिंपल शर्मा जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ."
31 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय अ.कु.सिंह साहबसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ."
33 minutes ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"सादर धन्यवाद सालिक गणवीर जी"
33 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"भाई लक्षण धामी 'मुसाफ़िर' जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से…"
34 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय अनिल कुमार सिंह जीसादर अभिवादनउम्दा तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर."
44 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीया डिंपल शर्मा जीसादर अभिवादनउम्दा तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर.चौथा शैर…"
45 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय भाई सुरेन्द्रनाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जीसादर अभिवादनउम्दा तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों…"
51 minutes ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service