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तन्हाई में ...

होती है
बहुत ज़रूरत
तन्हाई में
तन्हा हाथ को
अपने से
एक हाथ की
बोलता रहे
जिसका स्पर्श
सदियों तक
अलसाई सी तन्हाई में

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 557

Comment

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Comment by Sushil Sarna on July 31, 2019 at 8:15pm

आदरणीय  vijay nikore जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से शुक्रिया। 

Comment by vijay nikore on July 30, 2019 at 10:33pm

अच्छी रचना के लिए बधाई, आदरणीय सुशील जी।

Comment by Sushil Sarna on July 30, 2019 at 5:56pm

आदरणीय  narendrasinh chauhan  जी सृजन के भावों को अपनी स्नेहाशीष से अलंकृत करने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on July 30, 2019 at 5:56pm

आदरणीय  Samar kabeer जी सृजन के भावों को अपनी स्नेहाशीष से अलंकृत करने का दिल से आभार।

Comment by narendrasinh chauhan on July 25, 2019 at 3:37pm

ख़ूब सुंदर रचना

Comment by Samar kabeer on July 24, 2019 at 12:11pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता हुई,बधाई स्वीकार करें ।

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