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मृगतृष्णा-लघुकथा

"देखो आज का अखबार, एक लड़के ने जिसे कोई भी सहूलियत हासिल नहीं थी, राज्य सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर ली. जिसे करना होता है ना, वह लैंप पोस्ट की रौशनी में भी पढ़ लेता है", पिताजी आज फिर उबल रहे थे. इस बार भी राकेश असफल हो गया, वह खुद बहुत उदास था.
"लक्ष्य तो निर्धारित करते नहीं ठीक से, बस साधनों का रोना रोते रहोगे. मुझे लगता था कि मेरे रिटायर होने से पहले मैं भी सुनूंगा कि एक बाबू का लड़का बड़ा अधिकारी बन गया. लेकिन जनाब को तो कोई मतलब ही नहीं है इन सब से", अभी तक उनका बड़बड़ाना जारी था.
पहले भी वह कई बार ऐसे भाषणों को सुन चुका था और वह नजरअंदाज करके रह जाता था. लेकिन इस बार तो आखिरी मौका था और उसने अपनी तरफ से काफी प्रयत्न भी किया था.
"पिताजी, आप जो उदाहरण गिनाते हैं, वह अपवाद में आते हैं, हर लड़का वैसा नहीं हो सकता. कोई भी रेस अगर बराबरी से हो तो ही हार जीत के मायने होते हैं. और यह आप भी जानते हो कि उस एक को छोड़कर, जिसका जिक्र अख़बार में हुआ है, बाकी अधिकांश लड़के या तो ऐसी जगहों से हैं जहाँ उनको तैयारी की तमाम अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं. या फिर वह किसी न किसी कोटे में आते हैं".
उसने एक सांस छोड़ी और पिताजी की तरफ देखा, वह भौचक्के से उसको देखे जा रहे थे. आजतक उसने कभी भी उनको पलटकर जवाब नहीं दिया था.
"पिताजी, जितना दुःख आपको है, उससे रत्ती भर भी कम दुःख मुझे नहीं है. लेकिन यह जो सिस्टम बना है, वह अपने आप में ही ठीक नहीं है. लाखों मेघावी लड़के कुछ सौ सीटों के लिए हर साल जूझते हैं, तो असफलता का प्रतिशत हमेशा बहुत ज्यादा ही होगा ना? मैं अब अपनी वकालत शुरू करूँगा और वहां एक बेहतर वकील बनने की पूरी कोशिश करूँगा", राकेश ने बात ख़त्म की और बाहर निकल गया.
पिताजी को आज यक़ीन होने लगा कि एक बाबू का बेटा भले एक सरकारी अफसर नहीं बन पाए, लेकिन एक संवेदनशील इंसान जरूर बन गया है.


मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by विनय कुमार on May 13, 2019 at 1:13pm

बहुत बहुत आभार आ तेज वीर सिंह जी

Comment by TEJ VEER SINGH on May 8, 2019 at 10:58am

हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार जी।बेहतरीन लघुकथा।।

Comment by विनय कुमार on May 4, 2019 at 4:17pm

बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब

Comment by विनय कुमार on May 4, 2019 at 4:16pm
Comment by Samar kabeer on May 3, 2019 at 11:34am

जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by नाथ सोनांचली on May 2, 2019 at 6:42pm

आद0 विनय कुमार जी सादर अभिवादन। अच्छी लघुकथा लिखी आपने। इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये।

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