For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुछ अलग सी वजह-- लघुकथा


आज उसके छह महीने पूरे हो रहे थे, कल से वह वापस अपनी खूबसूरत और आरामदायक दुनिया में जा सकता था. उसे याद आया, जब से सरकार ने नियम बनाया था कि हर डॉक्टर को छह महीने गांव में प्रैक्टिस करनी पड़ेगी, उसके लिए यह करना सबसे कठिन था. पिताजी की अच्छी खासी दुनिया थी उस महानगर में, बड़ी हवेली, भरा पूरा परिवार और हर तरह की सुख सुविधा. एम बी बी एस करने के बाद सबने यही कहा था कि छह महीने तो फटाफट गुजर जायेंगे और उसके बाद पिताजी महानगर में ही सब इंतज़ाम करा देंगे.
गांव में जिसके घर वह रह रहा था, उनकी उम्र काफी थी और वह काफी बीमार भी रहते थे. शुरू शुरू में अनिक्षा के बावजूद वह उनका इलाज करता, लेकिन धीरे धीरे उनको ठीक रखने में उसे अपनी पढ़ाई की सार्थकता दिखाई पड़ने लगी. उनकी पत्नी, जिसे वह दादी कहता था, के हाथ का बना खाना एक अलग ही प्रकार का स्वाद देता, जो उसे कभी भी अपने घर के खाने में नहीं मिला था. शहर में रहने के दरम्यान उसे कभी ऐसे अनुभव नहीं हुए थे जब किसी गरीब व्यक्ति से उसे लगाव महसूस हुआ हो.
कल जब उसने दादी से बताया कि उसका समय अब पूरा हो गया और वह वापस अपने शहर चला जायेगा तो दादी का चेहरा फक़्क़ पड़ गया. पिछले छह महीनों में वह उनके घर का हिस्सा बन गया था और बीच बीच में जब वह अपने घर जाता तो लौट कर आने पर उसको देखते ही दादी का चेहरा खिल जाता था. आस पास के गांव के काफी मरीज भी उसके यहाँ आते और इलाज़ कराकर जाते समय पैसे तो नहीं लेकिन ढेरों दुआएं जरूर देकर जाते थे. उसके जेहन में तमाम चेहरे घूमने लगे जो फटे पुराने कपड़े पहने, अधिकांश पैदल आते, कुछ साइकिल से भी आते. लेकिन उन चेहरों में जो भाव दिखाई देता, वह उसने पहले कभी नहीं देखा था. वह इस गांव या अगल बगल के जिस भी गांव में जाता, लोग इतनी इज़्ज़त देते कि वह अभिभूत हो जाता. वहीँ शहर में उसे घर के बाहर निकलने पर शायद ही कोई पहचानता था, इज़्ज़त देना तो बहुत दूर की बात थी.
"आओ बचवा, खाना खा लो, तुम्हारे पसंद की दाल बनाई है और साथ में सरसो का साग भी, कल तो तुम चले ही जाओगे", दादी की आवाज़ ने उसे वर्तमान में ला पटका. वह भरे मन से खाना खाने उठा और खाने के दौरान उसका ध्यान खाने पर कम, विचारों में ज्यादा लगा था.
खाना खाने के बाद वह बाहर अपने कमरे में आया, खिड़की से उसे बच्चे धूल मिटटी में खेलते दिखे. उसकी भी इच्छा हुई कि वह जाकर बाहर बच्चों के साथ उसी धूल मिटटी में खेले जिसके लिए वह बचपन में तरसता था. कुछ देर यूँ ही देखते रहने के बाद उसने फोन उठाया और पापा को मेसेज किया "अभी कुछ महीने और मैं यहाँ बिताऊंगा, फिर शहर का सोचूंगा. एक बार आपलोग भी यहाँ आईये, शायद मेरे फैसले की वजह समझ में आ जाएगी". और कुछ ही देर बाद वह बच्चों के साथ खेल रहा था.


मौलिक एवम अप्रकाशित

Views: 513

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by विनय कुमार on January 8, 2019 at 5:54pm

इस सकारात्मक टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ नीता कसार जी

Comment by Nita Kasar on December 27, 2018 at 6:38pm

अमूमन लोग गाँव में जाने से बचते हैं,पर जो जाते है वे जानते है आज भी नि:स्वार्थ प्रेम वहीं बसता है।संदेशप्रद कथा के लिये बधाई आद०विनय कुमार जी ।

Comment by विनय कुमार on December 27, 2018 at 6:05pm

इस प्रोत्साहित करती टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ बबिता गुप्ता जी

Comment by विनय कुमार on December 27, 2018 at 6:04pm

बहुत बहुत आभार आ मुहतरम जनाब समर कबीर साहब

Comment by babitagupta on December 27, 2018 at 3:16pm

बेहतरीन रचना, उन चिकित्सकों और उनके घरवालों को संदेश देने के साथ, उस सोच को बदलने के लिए  प्रेरित करती ,कि ये पेशा नाममात्र की सेवा के बदले बैंक भरने का साधन।बधाई स्वीकार कीजिएगा ,आदरणीय विनय सरजी।

Comment by Samar kabeer on December 26, 2018 at 6:45pm

जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"साथियों, आप सभी के बहुमूल्य विचारों का स्वागत है, इस बार के लिए निर्णय लिया गया है कि सभी आयोजन एक…"
9 hours ago
Admin posted discussions
9 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
9 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"नीलेश भाई के विचार व्यावहारिक हैं और मैं भी इनसे सहमत हूँ।  डिजिटल सर्टिफिकेट अब लगभग सभी…"
Friday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार, अब तक आए सभी विचार पढ़े हैं। अधिक विचार आयोजन अवधि बढ़ाने पर सहमति के हैं किन्तु इतने…"
Friday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इन सुझावों पर भी विचार करना चाहिये। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"यह भी व्यवहारिक सुझाव है। इस प्रकार प्रयोग कर अनुभव प्राप्त किया जा सकता है। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"हाल ही में मेरा सोशल मीडिया का अनुभव यह रहा है कि इस पर प्रकाशित सामग्री की बाढ़ के कारण इस माध्यम…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय प्रबंधन,यह निश्चित ही चिंता का विषय है कि विगत कालखंड में यहाँ पर सहभागिता एकदम नगण्य हो गयी…"
Thursday
amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service