For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए

221   1221    1221    122

वेदना के पल कुँवारे ले चलो
कुछ तो जीने के सहारे ले चलो

दिल बहुत मायूस है परदेस में
बस हमें अब घर हमारे ले चलो

झील सी आंखों में हैं खामोशियाँ
थोड़े से सपने उधारे ले चलो

मैकदे में बंटती है अब भी शिफा
मैकदे में ज़ख्म सारे ले चलो

दुनिया मे महफूज कोई भी नहीं
साथ कितने भी सहारे ले चलो

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 47

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अजय गुप्ता on Monday

भाई मनोज जी, सबसे पहले तो अच्छी ग़ज़ल और अलग अंदाज़ अशार के लिए बधाई. अब आपकी ग़ज़ल पर आते है.

///वेदना के पल कुँवारे ले चलो
कुछ तो जीने के सहारे ले चलो

--मतला पढने में अच्छा लग रहा है.

/////दिल बहुत मायूस है परदेस में
बस हमें अब घर हमारे ले चलो

---- घर तो परदेस में भी होता है. देस अब हमको हमारे ले चलो. कुछ इस तरह कीजिये 

////झील सी आंखों में हैं खामोशियाँ
थोड़े से सपने उधारे ले चलो

----झील, ख़ामोशी, सपने. इस शेर में तो रब्त ही नहीं आ रहा.

///मैकदे में बंटती है अब भी शिफा
मैकदे में ज़ख्म सारे ले चलो

---अच्छा शेर है 

////दुनिया मे महफूज कोई भी नहीं
साथ कितने भी सहारे ले चलो

---अच्छा है 

Comment by राज़ नवादवी on December 7, 2018 at 9:15pm

आदरणीय मनोज कुमार जी, आदाब, सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए मुबारकबाद. सादर. 

Comment by Samar kabeer on December 7, 2018 at 8:57pm

जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

अरकान के बारे में क़मर साहिब बता ही चुके हैं ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 7, 2018 at 3:20pm

आ. भाई मनोज जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Manoj kumar Ahsaas on December 7, 2018 at 11:05am

बहुत बहुत शुक्रिया कमर जौनपुरी साहब

दरअसल दूसरी ग़ज़ल पोस्ट करनी थी और ये पोस्ट कर दी बहर पहले ही लिख दी थी

याद दिलाने के लिए हार्दिक आभार

सादर

Comment by क़मर जौनपुरी on December 7, 2018 at 12:57am

अच्छी ग़ज़ल हुई है जनाब मनोज कुमार एहसास जी। मुबारकबाद कबूल करें।

बहर आपने अलग लिख रखी है।

इसकी बहर है

2122 2122 212

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"सम्मान स्वयं का बखान श्रेष्ठता का गुरूर रात दिन की उठा पटक कीचड़ उछालने का शौक गिराकर आगे निकल जाने…"
4 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"ग़ज़ल (मान ले कहना तू मेरा उसका मत सम्मान कर) (फाइ ला तुन _फाइ ला तुन _फाइ ला तुन _फाइ लु न) मान…"
46 minutes ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"वाह मोहम्मद आरिफ साहिब बहुत ही चुभती कटाक्षिकाओं से उत्सव का आगाज़। पहली तो अन्तस् तक भेद गई।"
55 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"कटाक्षिकाएँ --------------------- (1) क्या कहा ? सम्मान चाहते हो किस भाव का ख़रीदोंगे ?…"
1 hour ago
राज़ नवादवी posted blog posts
2 hours ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"ओबीओ लाइव महाउत्सव अंक 98 में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post खामियाजा ( लघु कथा )
"कृपया "लघु कथा" को सुधार कर "लघुकथा" लिख दीजियेगा।"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post खामियाजा ( लघु कथा )
"वाह। दोहरे कटाक्ष। दोहरी स्वीकारोक्ति! जैसे को तैसा। हालात-ए-हाज़रा। बेहतरीन सारगर्भित विचारोत्तेजक…"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on VIRENDER VEER MEHTA's blog post दूरदृष्टि - लघुकथा
"सकारात्मकता लिए बेहतरीन समापन के साथ बढ़िया रचना। हार्दिक बधाई आदरणीय वीरेंद्र वीर मेहता साहिब। इसे…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घुटन के इन दयारों में तनिक परिहास बढ़ जाये - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार ।"
4 hours ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८१
"आदरणीय समर कबीर साहब, आदाब. एक बात वाज़ेह करनी थी, जनाब मद्दाह साहब एवं जनाब उस्मानी साहब के लुगत…"
6 hours ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८१
"आदरणीय समर कबीर साहब, एक बात वाज़ेह करनी थी, जनाब मद्दाह साहब एवं जनाब उस्मानी साहब के लुगत में…"
6 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service