For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं

बह्र- 2122-2122-2122-212

ज्यों हवा दस्तक करे खटखट कोई होता नहीं।।
मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं।।

इस तरह परछाई सा महसूस होता वो मुझे।
जैसे कोई दरमियाँ अपने है पर दिखता नहीं।।

हर बुढ़ापा रात भर कुछ खोजता है जाने क्या
नींद में भी जागता रहता है क्यों सोता नहीं ।।

चौक में करता नुमाइश ,वक्त भी दल्ला हुआ।
एक झटके में मुझे क्यों नग्न कर देता नहीं।।

इक समंदर कैद है आँखों में अपने दर्द का ।
जो भरा रहता है अंदर,पर कभी बहता नहीं।।

आमोद बिन्दौरी /मौलिक अप्रकाशित

Views: 106

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 11, 2018 at 11:30am

अच्छी ग़ज़ल कही है...आदरणीय समर जी ने बहुत ही बारीक़ नजर डाली है..यही सीखने में सहायक है।

Comment by Naveen Mani Tripathi on October 9, 2018 at 10:36am

आ0 आमोद श्रीवास्तव जी बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई । बधाई आपको।

Comment by Samar kabeer on October 8, 2018 at 11:47am

जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,आपकी ग़ज़ल में क़वाफ़ी सहीह नहीं हैं,इस पर विचार करें ।

Comment by Mohammed Arif on October 8, 2018 at 10:49am

आदरणीय आमोद जी आदाब,

                                बहुत अच्छी ग़ज़ल कहने का प्रयास । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे । मेरी ओर से दिली मुबारकबाद ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी प्रदत्त चित्र पर सुंदर अभिव्यक्ति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें एवं आयोजन का…"
4 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"चित्र देख कर कह रहे, बहुत गहन ही बात  बेटा-बेटी एक होंं, तब बदले हालात !! .. बधाई इन दोहों पर…"
5 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायन भाईजी अच्छी शुरुवात करते हुए अचानक  कश्मीर के मान चित्र तक पहुंच गए, लेकिन…"
14 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"अच्छे दोहे हो गये, सुगढ़ हुआहै कथ्य  चित्र के अनुरूप ही, शब्द-शब्द है तथ्य .. .. बधाई, बहुत…"
38 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय  भाई  छोटेलालजी दोहावली की प्रशंसा के लिए हृदय से बधाई, आभार।"
49 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहे की तारीफ की, सौरभजी आभार। धन्यवाद देता हृदय, एक नहीं सौ बार॥ सादर  "
52 minutes ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जब तिरंगे में लिपट गांव वो आया होगा (२८ )
"जयहिंद "
1 hour ago
narendrasinh chauhan commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जब तिरंगे में लिपट गांव वो आया होगा (२८ )
"जय हिन्द "
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"सही-भली दोहावली, रचते हैं अखिलेश निखरे-निखरे चित्र को शब्दों का गणवेश शुभ-शुभ "
2 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहा छंद (1) खटिया पर बच्चा खड़ा, पिए डोल में शीर धीरे धीरे हँस रही, माता उसके तीर (2) मुझको लगता…"
4 hours ago
Jitendra sharma posted a blog post

लौट के आये उड़ान से - ग़ज़ल

दिन-भर जो बात करते रहे आस्मान सेसूरज ढला तो लौट के आये उड़ान सेथा वक़्त का ख़याल या हारे थकान सेनिकले…See More
6 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') added a discussion to the group English Literature
Thumbnail

Arms and ammunition (Poem)

 Guns and swordsSymbol of braveryUsed by soldiersFor country's victoryGuns and swordsSymbol of…See More
6 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service