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गीत-इसलिये हैं नैन घायल आँसुओं से तर-ब-तर-बृजेश कुमार 'ब्रज'

किसलिये हैं नैन घायल
आँसुओं से तर-ब-तर?

फिर किसी सुनसान कोने
चीख कोई जो उठी
रात की खामोशियों में
रातरानी रो उठी
दानवी अट्टाहसों में
आह तड़पी घुट गई
टूटती साँसें समेटे
लड़खड़ाती वो उठी

इस कदर बरपी क़यामत
बन गई मातम सहर
इसलिये हैं नैन घायल
आँसुओं से तर-ब-तर

है नहीं जग में ठिकाना
आँख जाए नीर का
मोल कोई दे सकेगा
वेदना का पीर का
जिस नज़र पे था भरोसा
घात भी उससे मिली
हाथ ही अंधे हुये तब
धर्म क्या शमशीर का

आग बरसे आसमां से
तप रही है रहगुजर
इसलिये हैं नैन घायल
आँसुओं से तर-ब-तर

(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 7, 2018 at 3:20pm

आदरणीय तेजवीर सिंह जी बहुत बहुत आभार..सादर

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 7, 2018 at 3:19pm

स्वागत संग आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी..

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 7, 2018 at 3:19pm

आदरणीय डा.साहब आपका धन्यवाद...

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 7, 2018 at 3:17pm

आदरणीय समर कबीर जी सादर नमन स्वीकारें..उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार..सादर

Comment by TEJ VEER SINGH on October 7, 2018 at 10:42am

हार्दिक बधाई आदरणीय बृजेश कुमार जी। बेहतरीन गीत।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 6, 2018 at 4:49pm

आ. भाई ब।जेश जी आच्छा गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on October 6, 2018 at 1:23pm

आदरणीय बृजेश जी बहुत उम्दा सृजन बधाई कुबूल कीजिए

Comment by Samar kabeer on October 6, 2018 at 11:48am

जनाब बृजेश जी आदाब,अच्छा गीत हुआ है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 4, 2018 at 10:54pm

आदरणीय रामबली जी आपका स्वागत है..छंदों पे अभी कोशिश ही की है..पहले बंध की पहली पंक्ति में वो गलती से हो गया..मात्रा पतन की आज़ादी नहीं होती इसका इल्म है..सुधार करता हूँ। लेकिन कहीं इस छंद को मुक्तक के रूप में भी पढ़ा है।सादर

Comment by रामबली गुप्ता on October 4, 2018 at 10:46pm

भावों के हिसाब से तो बहुत ही सुंदर रचना हुई है आद० भाई बृजेश कुमार जी किन्तु छंद के शिल्प के हिसाब से इसमें अभी बहुत काम है। सर्वप्रथम छंदों में मात्रा पतन की छूट नही होती। गीतिका छंद के शिल्प में भी कई जगह भटकाव मिला आपकी रचना में। गीतिका छंद का प्रत्येक पद निम्न प्रकार चलेगा-

गीतिका शुभ गीतिका शुभ गीतिका शुभ गीतिका

दो दो पदों की तुकांतता होनी चाहिए तथा मात्रा पतन मान्य नही है।

 हार्दिक बधाई स्वीकारें। सादर

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